मर्द गाड़ी से उतर-उतरकर शीशा साफ करते, लेकिन विंडशील्‍ड वाइपर बनाने का ख्‍याल एक औरत के दिल में आया

By Manisha Pandey
May 18, 2022, Updated on : Fri Aug 26 2022 08:58:02 GMT+0000
मर्द गाड़ी से उतर-उतरकर शीशा साफ करते, लेकिन विंडशील्‍ड वाइपर बनाने का ख्‍याल एक औरत के दिल में आया
आज 2022 में विंडशील्‍ड वाइपर कोई अनोखी चीज नहीं. वो किसी भी कार का एकदम बुनियादी और जरूरी हिस्‍सा है, वैसे ही जैसे खाने में नमक हो. लेकिन 119 साल पहले अलाबामा की उस 36 साल की लड़की ने जब कार का शीशा साफ करने वाली मशीन के बारे में सोचा तो वो अपने समय से बहुत आगे की बात थी. ये कहानी है मैरी एंडरसन की.
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

फर्ज करिए आप अपनी कार ड्राइव करके कहीं जा रहे हैं, लेकिन उस कार में विंडशील्‍ड वाइपर नहीं है. यूं समझ लीजिए कि ये 100 साल पहले उस जमाने की बात है, जब कारें आज की कारों की तरह एडवांस नहीं हुआ करती थीं. तब कार का मतलब था चार पहिए, सीट, इंजन, गियर, ब्रेक और स्टियरिंग. बिलकुल बेसिक मॉडल और डिजाइन. तो उस गाड़ी में सब बुनियादी चीजें हैं, लेकिन विंडशील्‍ड वाइपर नहीं है. बाहर तेज बारिश हो रही है या बर्फ पड़ रही है.


क्‍या आप कार चला पाएंगे?


शायद नहीं. या चला तो पाएंगे, लेकिन बार-बार कार से उतरकर शीशा साफ करना पड़ेगा. आज शायद किसी को इस बात का यकीन न हो, लेकिन 130 साल पहले ऐसा ही होता था. चलती गाड़ी से हाथ बाहर निकालकर या फिर रुक-रुककर शीशा साफ करना पड़ता था.

जब तक मैरी एंडरसन ने विंडशील्‍ड वाइपर का आविष्‍कार नहीं किया था. इस आविष्‍कार की कहानी बड़ी रोचक है.  


साल 1902 की बात है. 36 साल की मैरी एंडरसन न्‍यूयॉर्क में थीं और एक स्‍ट्रीट कार में कहीं जा रही थीं. दिसंबर का महीना था और शहर में बर्फ पड़ रही थी. सामान्‍य दिनों में सड़क पर सरपट भागने वाली गाड़ी आज बहुत धीरे-धीरे रुक-रुककर चल रही थी. कुछ देर तक तो बर्फ के बीच भी सड़क दिखती रहती, फिर कार का शीशा बर्फ से इतना भर जाता कि कुछ भी दिखाई देना बंद हो जाता. वो गाड़ी वाला बार-बार गाड़ी रोककर और खिड़की से अपना हाथ और सिर बाहर निकालकर गाड़ी का शीशा साफ करता. कभी जब बर्फ बहुत भर जाती तो गाड़ी से उतरकर साफ करता. पूरे रास्‍ते यही तमाशा चलता रहा.


उस दिन न्‍यूयॉर्क की सड़क पर उस स्‍ट्रीट कार में बैठे हुए मैरी के मन में एक आइडिया आया. इस कार की स्‍क्रीन पर कोई ऐसी चीज होनी चाहिए, जिसे गाड़ी के अंदर बैठे-बैठे ही चलाया जा सके और जो अपने आप शीशे पर पड़ रही बर्फ को साफ कर दे.


न्‍यूयॉर्क से लौटने के बाद भी ये विचार उनके मन में चलता रहा. वो खुद कोई इंजीनियर तो थीं नहीं. रीअल स्‍टेट डेवलपर थीं. लेकिन उनके मन में कहीं ये ख्‍याल अटक गया था.


1886 में जर्मन इंवेन्‍टर कार्ल बेंज ने पहले ऑटोमोबाइल का निर्माण किया था. उस पहली कार को बने 16 साल हो चुके थे. जर्मनी से लेकर अमेरिका तक जहां-जहां भी कार पहुंची थी, सभी को उसे चलाते हुए इस बुनियादी समस्‍या का सामना करना पड़ता था. लेकिन किसी के मन में अभी तक ये ख्‍याल नहीं आया था कि ये समस्‍या दूर होनी चाहिए. कार चलाने वालों को लगता था कि बार-बार गाड़ी से उतरकर बर्फ साफ करना या बारिश में मुश्किल से गाड़ी चलाना ही नियति है. चार पहियों पर सर्राटे से इधर-उधर भागने वाली ऐसी जादुई मशीन मिल गई. यही क्‍या कम है. 


सच पूछो तो संसार की हर छोटी-बड़ी खोज ऐसे ही होती है कि कोई एक उस समस्‍या को नियति मानने से इनकार कर देता है और उसका हल खोजने में लग जाता है. अलाबामा वापस लौटकर मैरी एंडरसन ने एक ऐसा डिजाइन तैयार किया, जो कार के शीशों पर बाहर से अटैच होता और उसकी फंक्‍शनिंग को कार के भीतर बैठकर कंट्रोल किया जा सकता. ये एक तरह से कार के शीशे साफ करने का उपकरण था. इसका नाम विंडशील्‍ड वाइपर तो बाद में पड़ा.


मैरी ने अपने बनाए डिजाइन को एक इंजीनियर और स्‍थानीय कंपनी की मदद से साकार रूप दिया. मैरी यह देखकर खुशी से खिल उठीं कि उनकी बनाई डिजाइन सचमुच काम कर रही थी. एक कार में उसे फिट कर दिया गया था और अब कार के भीतर बैठे-बैठे हाथ से उसका लिवर घुमाकर ही शीशे को साफ करना मुमकिन हो गया था.


फिर सवाल उठा इसे पेटेंट कराने का. मैरी ने 18 जून,1903 को  पेटेंट के लिए अप्‍लाय किया और उसी साल 10 नवंबर को उन्‍हें 17 साल के लिए विंडशील्‍ड वाइपर का पेटेंट मिल गया.


आज 119 साल बाद विंडशील्‍ड वाइपर्स किसी के लिए कोई अनोखी चीज नहीं है. वो किसी भी कार का वैसे ही एकदम बुनियादी और जरूरी हिस्‍सा है, जैसे खाने में नमक. लेकिन न्‍यूयॉर्क की सड़क पर उस शाम गिरती हुई बर्फ के बीच चलती गाड़ी में बैठे मैरी के मन में जो विचार आया था, उसकी वजह एक ही थी कि जीवन में आई किसी भी मुश्किल को आप अपनी नियति नहीं मान लेते. उस मुश्किल को दूर करने की, उसका हल ढूंढने की कोशिश करते हैं. जैसे उस शाम मैरी एंडरसन ने किया था. 

हमारे दैनिक समाचार पत्र के लिए साइन अप करें