देश को मिल सकता है पहला समलैंगिक हाई कोर्ट जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दोबारा भेजा सरकार को नाम

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने फिर की समलैंगिक वकील सौरभ कृपाल को जज बनाने की सिफारिश. केंद्र ने पहले की थी आपत्ति.

देश को मिल सकता है पहला समलैंगिक हाई कोर्ट जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दोबारा भेजा सरकार को नाम

Friday January 20, 2023,

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक बार फिर वकील सौरभ कृपाल को दिल्ली हाईकोर्ट का जज नियुक्त किए जाने की सिफारिश की है. कॉलेजियम की तरफ से यह सिफारिश केंद्र को भेज दी गई है.

कॉलेजियम ने इसके पहले भी केंद्र को इस संबंध में सिफारिश भेजी थी, लेकिन उनके सेक्‍सुअल ओरिएंटेशन को देखते हुए केंद्र ने इस प्रस्‍ताव पर अपनी आपत्ति जताई थी. यौन रूझान को आधार बनाकर सिफारिश से इनकार करने के सरकार के फैसले पर इस बार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अपनी आपत्ति जताई है.

केंद्र को यह आशंका थी कि अपने यौन रूझान को देखते हुए समलैंगिकों के प्रति उनका नजरिया पूर्वाग्रहपूर्ण हो सकता है और इस तरह की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. इसी आधार पर सरकार ने कॉलेजियम के प्रस्‍ताव को एक बार फिर पुनर्विचार करने के लिए वापस भेज दिया था.

18 जनवरी कॉलेजियम ने एक बार फिर सौरभ कृपाल के नाम की सिफारिश की है. कॉलेजियम ने कहा है कि सौरभ के यौन रूझान की बात छिपी हुई नहीं है. वह इस बारे में खुलकर बात करते हैं और यह तथ्‍य सभी की संज्ञान में है. कायदे से तो उन्‍हें इस बात का श्रेय दिया जाना चाहिए.

न्यायपालिका के लिए अपनी संभावित उम्मीदवारी को देखते हुए उन्‍होंने कभी अपने सेक्‍सुअल ओरिएंटेशन को छिपाने या गुप्‍त रखने की कोशिश नहीं की.

भारत का संविधान समलैंगिकता को स्‍वीकार करता है और समलैंगिक लोगों के मानवाधिकारों को समान रूप से देखता है. इसलिए संविधान को ध्‍यान में रखते हुए उनके यौन रूझान के आधार पर उनकी  उम्मीदवारी को खारिज करना सुप्रीम कोर्ट के द्वारा तय किए गए समता और बराबरी के संवैधानिक सिद्धांतों के ही खिलाफ होगा.

इस कॉलेजियम में भारत के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ शामिल हैं.

यहां आपको यह बता दें कि सौरभ कृपाल की नियुक्ति का प्रस्ताव पिछले पांच सालों लंबित पड़ा है. 13 अक्टूबर 2017 को दिल्ली हाईकोर्ट कॉलेजियम ने  सर्वसम्मति से उनके नाम की सिफारिश की थी. उसके बाद 11 नवंबर 2021 को उच्‍च्‍तम न्‍यायालय के कॉलेजियम ने भी उनके नाम की सिफारिश को मंजूरी दे दी.

केंद्र ने सौरभ कृपाल के नाम का प्रस्‍ताव वापस भेजते हुए सौरभ के पार्टनर के बारे में भी कुछ आशंकाएं जताई थीं. जैसेकि उनके पार्टनर एक स्विस नागरिक हैं. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का इस पर भी रुख साफ है.

कॉलेजियम का कहना है कि सौरभ के पार्टनर से हमारे देश की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं हो सकता. इस बात का कोई डर नहीं है कि उनका पार्टनर हमारे देश के साथ कोई दुश्‍मनाना व्‍यवहार करेगा. उनका पार्टनर जिस देश से ताल्‍लुक रखता है, उस देश के साथ भी भारत के संबंध मित्रतापूर्ण हैं.


Edited by Manisha Pandey