कलाकारों को बुनियादी सुविधाएं और समर्थन देने के लिए मुंबई की इस आंत्रप्रेन्योर ने शुरू किया इनक्यूबेटर

अमृता देवड़ा द्वारा स्थापित, द डिजाइनेरा (The Designera) मूर्तिकारों, पेंटर, फोटोग्राफरों और चित्रकारों के लिए एक इनक्यूबेटर जैसा मंच प्रदान करता है।
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जहां नैस्कॉम, केरल स्टार्टअप मिशन, टी-हब और डीलैब्स स्टार्टअप्स के लिए इनक्यूबेटर के रूप में काम करते हैं, तो वहीं अमृता देवड़ा ने भारत के उभरते कलाकारों के लिए इनक्यूबेटर जैसा मंच प्रदान करने के लिए द डिजाइनेरा की स्थापना की।

भले ही स्टार्टअप की सेलेक्टिव क्यूरेशन प्रोसेस यानी चयनात्मक अवधि प्रक्रिया की स्वीकृति दर 5 प्रतिशत से भी कम है लेकिन द डिजाइनेरा कलाकारों और उनकी कलाकृतियों का चयन करता है, जिसमें वर्टिकल स्कल्पचर, पेंटिंग, फोटोग्राफी और इलस्ट्रेशन शामिल हैं।

द डिजाइनेरा का नवी मुंबई में 16,000 से अधिक वर्ग फुट का आर्ट स्टूडियो है। यहां कलाकार अपनी कलाकृतियों को बनाने के लिए काम कर सकते हैं। खास बात ये है कि उन्हें यहां हर जरूरी चीज उपलब्ध होती है।

YourStory के साथ बातचीत करते हुए अमृता ने बताया, "एक स्थिर आय, एक अत्याधुनिक स्टूडियो, बेहतरीन बुनियादी ढाँचा, और स्वयं के इनक्यूबेटर द्वारा प्रदान किया गया पूर्ण रचनात्मक समर्थन यह सुनिश्चित करता है कि कलाकार उन सभी साधनों से लैस हों जिनकी उन्हें जरूरत है।"

कलाकारों के सारे आर्टवर्क डिजाइनेरा के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं जहां से आप उन्हें खरीद सकते हैं।

आर्ट के प्यार के लिए

अमृता के पास डिजाइन में बैकग्राउंड है उन्होंने सेंट्रल सेंट मार्टिंस, लंदन से पढ़ाई की है। इसके अलावा वे मुंबई युनिवर्सिटी से कॉमर्स में डिग्री हासिल करने वाली हैं।

उन्होंने 18 साल की उम्र में ही उद्यमशीलता का रास्ता अपनाया लिया। उन्होंने कैमलॉट कोवर्क्स शुरू किया जोकि एक शेयर्ड वर्किंग स्पेस का उद्यम है। इसके तुरंत बाद, आर्ट के प्रति उनके प्रेम ने उन्हें जनवरी 2020 में द डिजाइनेरा शुरू करने के लिए मजबूर कर किया।

अमृता की कला के प्रति दीवानगी ने उन्हें दुनिया भर में यात्रा करने के लिए प्रेरित किया - वेनिस के बिएनले, आर्ट बेसल से न्यूयॉर्क में आधुनिक कला के संग्रहालय तक।

हालाँकि, अमृता को द डिजाइनेरा शुरू करने का आइडिया तब हिट किया जब वह कोलकाता में दुर्गा पूजा देखने गईं और भारत के भीतर शिल्प कौशल को देखकर मंत्रमुग्ध हो गईं। अमृता कहती हैं, “यह एक ऐसा क्षण था जब मैंने महसूस किया कि भारतीय कला का सही मूल्यांकन नहीं किया गया है। एक अंतरराष्ट्रीय कैनवास पर इन सभी स्थानों को देखकर, और फिर भारतीय प्रतिभा और मंच के बेमेल को देखकर, मैंने खुद को भारतीय कला का ध्वजवाहक बनने के लिए प्रतिबद्ध किया।"

बेस्ट को शॉर्टलिस्ट करना

संभावित कलाकार द डिजाइनेरा में अप्लाई करने के लिए इसके ऑनलाइन एप्लीकेशन के माध्यम से अप्लाई कर सकते हैं। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी एफिलिएशन, या बीहंस (Behance) जैसे थर्ड-पार्टी प्लेटफार्मों के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

इसके बाद इन आकांक्षी कलाकारों के काम की समीक्षा निम्नलिखित मापदंडों पर द डिजाइनेरा पैनल द्वारा की जाती है:

-क्या आपकी कृतियों (pieces) में मजबूत प्रेरणा और कहानी झलकती है

-इस्तेमाल की गई तकनीक, और क्या आपकी कृतियों में एक मजबूत महारत शामिल है

-कलाकार द्वारा बनाई गईं कृतियों की मात्रा

-और अंत में, क्या कलाकार द डिजाइनेरा के समकालीन, आधुनिक और कला सौंदर्य पर फिट बैठता है

अमृता बताती हैं, "एक बार जब किसी कलाकार को शॉर्टलिस्ट किया जाता है, तो पैनल के साथ एक वर्चुअल या इन-पर्सन इंटरव्यू की व्यवस्था की जाती है, जहाँ हम कलाकृति को देखना भी पसंद करते हैं।"

एक बार जब किसी कलाकार को शॉर्टलिस्ट कर लिया जाता है, तो वे डिजाइनेरा के बुनियादी ढांचे और संसाधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। आर्टिस्ट इनक्यूबेटर अपने प्लेटफॉर्म पर उन कलाकारों की कला कृतियों को बनाने और सूचीबद्ध करने के लिए उन्हें इजाजत देता है।

कलाकारों से मिलिए

ये कुछ कलाकार हैं जिन्हें डिजाइनेरा में इनक्यूबेट किया गया है:

मेघा सक्सेना: वह अपनी रोमांटिक स्टाइल के लिए फेमस है, और उनके काम का एक बड़ा हिस्सा मिलान की उसकी यात्रा से प्रभावित है। मिलान में उनके असीम अनुभव के प्रभाव को उन्होंने अपनी वास्तुकला, जैज, फैशन, कल्चर और खुद के प्यार के माध्यम से चित्रित किया है।

यश माजलेकर: मुंबई स्थित खुद से सीखे चित्रकार यश की कृतियां अत्यंत व्यक्तिपरक हैं। वह समय और मानवीय द्वंद्व की अवधारणा से प्रेरणा लेते हैं। उनके समकालीन चित्रों में बोल्ड रंगों, खेदहीन शब्दों और उत्तेजक रूपों का उपयोग किया गया है।

अभिषेक कल्याणपुरकर: चित्रांकन में एक दशक से अधिक के अनुभव के साथ, अभिषेक मुंबई के एक खुद से सीखे कलाकार हैं, और उनका डिजाइन के साथ एक गंभीर प्रेम संबंध है। उनका काम भारतीय पौराणिक कहानियों और पात्रों के लिए उनके प्यार से प्रेरित है।

फेनिल शाह: आईएसडीआई के पूर्व छात्र फेनिल ने 19 साल की उम्र में राल कला (resin art) के साथ अपनी यात्रा शुरू की। उनकी कलाकृति प्रकृति के तत्वों से प्रेरित है और इसमें अशांत रंग और कीमती क्रिस्टल शामिल हैं।

दिनेश परमार: ललित कला अकादमी स्टेट अवार्ड पाने वाले, दिनेश का कार्य धारणाओं के आयाम के पार जाता है क्योंकि वह एक व्यवस्था के अंदर अराजकता होने का भ्रम पैदा करता हैं।

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