इस आईएएस अफसर ने 6 महीने में हटवाया 13 लाख मीट्रिक टन कचरा

By yourstory हिन्दी
January 31, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:20:58 GMT+0000
 इस आईएएस अफसर ने 6 महीने में हटवाया 13 लाख मीट्रिक टन कचरा
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कचरे का ढेर

बीते कुछ सालों से भारत में स्वच्छता को लेकर एक आंदोलन चल रहा है जिसका नाम है स्वच्छ भारत अभियान। हर तरह से कोशिश की जा रही है कि भारत को पूरी तरह से स्वच्छ बनाया जा सके। सरकार से लेकर देश के नागरिक अपने-अपने स्तरों पर इस कोशिश में लगे हुए हैं। इंदौर के म्यूनिसिपल कमिश्नर आशीष सिंह ने इंदौर को कचरामुक्त बनाकर एक नए शहर के रूप में तब्दील कर दिया है। उनकी ये कोशिश काबिल ए तारीफ है।


इंदौर के देवगुराड़िया इलाके में 100 एकड़ जमीन पर कचरे का एक बड़ा ढेर बन गया था इंदौर शहर को 2017 के स्वच्छ सर्वेक्षण सर्वे में भारत के सबसे साफ शहरों में शामिल किया गया था, लेकिन इस कचरे के ढेर की वजह से शहर की गंदगी बढ़ती जा रही थी। इस गंदगी की वजह से प्रशासन और नागरिकों दोनों को मुश्किलें आ रही थीं। लेकिन सिर्फ 6 महीने के भीतर आईएएस अफसर आशीष सिंह ने इस जगह से 13 लाख मीट्रिक टन कचरे को साफ करवाया और 400 करोड़ रुपये कीमत की इस जमीन को भी खाली कर दिया।


एक इंटरव्यू में आशीष सिंह ने कहा, 'हमने कचरा साफ करने वाली मशीनों को किराए पर लिया और उन्हें खुद से चलवाने का फैसला किया। इन मशीनों के जरिए हमने सिर्फ 6 महीनों में कचरे के इस ढेर को हटवा दिया। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें हमने सिर्फ 10 करोड़ रुपये ही खर्च किए।' वहीं ठेके के जरिए इस काम को करवाने में 60 करोड़ से भी ज्यादा का खर्च आ रहा था। 


कचरे के ढेर के खाली हो जाने से शहर को 100 एकड़ जमीन मिल गई है। अब इस खाली पड़ी जमीन से 10 एकड़ में गार्डेन और 90 एकड़ में सिटी फॉरेस्ट बनाया जाएगा। इंदौर शहर के लोग कचरे के इस विशाल ढेर से तंग आ चुके थे। कचरे से उठती दुर्गंध से लोगों का जीना मुश्किल हो गया था और सांस लेने में परेशानी आ रही थी। यह 'जीरो लैंडफिल' और 'कचरा-मुक्त' इंदौर शहर बनाने की ओर बेहतरीन प्रयास है। आपको बता दें कि इंदौर को लगातार दो बार देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शामिल किया जा चुका है।


अब इंदौर में आधुनिक तकनीक के उपयोग के माध्यम से कचरे के पर्यावरण के अनुकूल निपटारा किया जाता है, जिसमें प्लास्टिक कचरे को जलाने वाले ईंधन के रूप में परिवर्तित किया जाता है। आशीष सिंह ने बताया कि यह यह प्रोसेज़ घर में ही गीले और सूखे कचरे को अलग करने के साथ शुरू होता है। इसके बाद, शहर भर से एकत्र किए गए कचरे को पहले 10 नोडल पॉइंट्स पर ले जाया जाता है, जहां से इसे ट्रेंचिंग ग्राउंड में भेजा जाता है। यहाँ पूरे कचरे को अलग-अलग किया जाता है।


इसके साथ ही इंदौर में होम कंपोस्टिंग यूनिट लगाने की योजना बनाई गई है। इस यूनिट को बनाने में अभी लगभग 1500 रुपए का खर्च आता है जिसमें तीन मटकों की यूनिट लगाकर उसमें गीला कचरा डालकर खाद बनाई जाती है। निगम इस दिशा में भी प्रयास कर रहा है कि यह यूनिट और सस्ती दरों पर नागरिकों के घरों में लगाई जा सके। यूनिट लगने से गीला कचरे की मात्रा कम होगी और खाद बनाकर लोग उसका उपयोग अपने बगीचों व गमलों में कर सकेंगे।


इंदौर नगर निगम ने एक निजी कंपनी की मदद से देवी अहिल्याबाई होलकर फल-सब्जी मंडी में शहर का पहला बायोमीथेनाइजेशन प्लांट लगाया है। इस संयंत्र के जरिये हर रोज फल-सब्जियों के 20 टन अपशिष्ट को 1,000 किलोग्राम बायो-सीएनजी में बदला जा सकता है। सिंह ने कहा, 'शुरुआत में हम अपनी 63 सिटी बसों (शहरी लोक परिवहन बस) में से करीब 15 बसों को बायो-सीएनजी से दौड़ाएंगे।'


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