समूह से संवरी महिलाओं की जिंदगी, 6 महीने में मिले 6 करोड़ के ऑर्डर

By जय प्रकाश जय
February 02, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:20:58 GMT+0000
समूह से संवरी महिलाओं की जिंदगी, 6 महीने में मिले 6 करोड़ के ऑर्डर
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स्वयं सहायता समूह की महिलाएं

इन महिलाओं की मेहनत और कामयाबी की विश्वबैंक तक गूंज है। ये महिलाएं समूह बनाकर तरह-तरह के सामान तैयार करने के साथ ही स्वयं घर-घर घूमकर बेच-बिक्री भी कर रही हैं। पिछले कुछ ही महीनों में उन्हें लगभग छह करोड़ रुपए के आर्डर मिल हैं। इस समूह की हर महीने लगभग तीन लाख तक की कमाई हो जा रही है। 


कहते हैं न कि 'संघे शक्ति सर्वदा', पांच उंगलियां मिल जाएं तो मुट्ठी बन जाती हैं, पांच पंच परमेश्वर हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ में इस समय लगभग एक लाख महिलाओं के एक ऐसे ही समूह ने कुछ ऐसा कर दिखाया है कि जानने वाले हैरत में पड़ जाते हैं। राज्य की आरंग जिला पंचायत (छत्तीसगढ़) में मंदिरहसौद गांव की ये महिलाएं समूह बनाकर तरह-तरह प्रॉडक्ट बाजार में उतार रही हैं। उनके हुनर की पूरे देश में कुछ ऐसी तारीफ हुई है कि हाल ही में वर्ल्ड बैंक की टीम उनकी योजना को दुनिया के सभी देशों में लागू कराने के लिए पूरी प्लानिंग की रिपोर्ट ले गई है। 


ये महिलाएं टेंट, लाइटिंग, किराना सामान, मेहंदी, साड़ी सामग्री की गिफ्ट पैकिंग, लांड्री सर्विसेस, फूलों की सप्लाई, बिहान गिफ्ट हेल्पर सहित पूजन सामग्री तैयार करती हैं। वे ठेले पर सब्जी और किराने की दुकानें भी चला रही हैं। वे महिलाएं अपने सामान गांव-गांव घूमकर बेच रही हैं। वे आर्डर पर सामानों को स्वयं सीधे ग्राहकों के घरों तक पहुंच दे रही हैं। प्रॉडक्शन से लेकर बिक्री, आपूर्ति तक सारा काम वे स्वयं संभाल रही हैं। अपने काम को उन्होंने 'मिशन 25' नाम दिया है। गांव-कस्बों तक फैले हुए उनके लोग दुकानों, होटलों, संस्थानों से उन्हें डिमांड आर्डर दिलाते रहते हैं। इस तरह का नवाचार करने वाला रायपुर राज्य का पहला जिला बन गया है। 


दरअसल, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) का उददेश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को देश की मुख्यधारा से जोड़ना और विभिन्न कार्यक्रमों के जरिये उनकी गरीबी दूर करना है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने जून, 2011 में आजीविका-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की शुरूआत की थी। आजीविका-एनआरएलएम का मुख्य उद्देश्य गरीब ग्रामीणों को सक्षम और प्रभावशाली संस्थागत मंच प्रदान कर उनकी आजीविका में निरंतर वृद्धि करना, वित्तीय सेवाओं तक उनकी बेहतर और सरल तरीके से पहुंच बनाना और उनकी पारिवारिक आय को बढ़ाना है। इसके लिए मंत्रालय को विश्व बैंक से आर्थिक सहायता मिलती है। 


एनआरएलएम ने स्व-सहायता समूहों तथा संघीय संस्थानों के माध्यम से देश के छह सौ जिलों, छह हजार प्रखंडों, ढाई लाख ग्राम पंचायतों और छह लाख गांवों के सात करोड़ ग्रामीण गरीब परिवारों (बीपीएल) को दायरे में लाने का और आठ से दस साल की अवधि में उन्हें आजीविका के लिए आवश्यक साधन जुटाने में सहयोग देने का संकल्प ले रखा है। मिशन, इसके अतिरिक्त गरीब जनता को अपने अधिकारों और जनसेवाओं का लाभ उठाने में, तरह तरह के जोखिम उठाने में और सशक्तीकरण के बेहतर सामाजिक संकेतकों को समझने में मदद करता है। एनआरएलएम इस बात में विश्वास रखता है कि गरीबों की सहज क्षमताओं का सदुपयोग हो और देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था में उनका योगदान हो, जिसके लिए उनकी सूचना, ज्ञान, कौशल, संसाधन, वित्त तथा सामूहिकीकरण से जुड़ी क्षमताएं विकसित की जाएं।


इस मिशन के सहयोग से रायपुर की महिलाओं को ऊंची उड़ान का अवसर मिला है। किसी वक्त में ये महिलाएं मनरेगा की मजदूरी से अपना घर-गृहस्थी चलाने के लिए विवश थीं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' से जुड़ते ही उनके जीवन की दिशा बदल गई। इस समय 'मिशन 25' के रायपुर जिले में दो हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनमें लगभग एक लाख महिलाएं कार्यरत हैं। उनकी कामयाबी में स्थानीय जिला पंचायत का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन की मदद से इस समूह को बीते छह महीनों के भीतर ही छह करोड़ रुपए के आर्डर मिल गए। 


पिछले दिनों जब वर्ल्ड बैंक की तीन सदस्यीय टीम उनके काम-काज की जानकारी जुटाने पहुंची तो इन महिलाओं की खुशी का कोई पारावार नहीं रहा। अकेले पेवर ब्लॉक और साबुन निर्माण यूनिट से समूह की हर माह तीन लाख रुपए तक की कमाई हो रही है। इसके आलावा वे सेनेटरी नैपकिन भी बनाकर बेचने लगी हैं। आइआइएम और मैग्नेटो मॉल में तो उनके बाकायदा स्टॉल लगने लगे हैं। ये महिलाएं दफ्तरों में स्टेशनरी, पेन, फिनाइल आदि की सप्लाई भी कर रही हैं। ट्रिपल आइटी, बीआइटी और बड़े-छोटे होटलों में खाने और ड्राईक्लीनर्स की भी वे सप्लाई कर रही हैं।


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