सुप्रीम कोर्ट का काम हल्का कर रहा है ये AI स्टार्टअप, अब जल्द निपट सकेंगे पेंडिंग केस

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देश की अदालतें पेंडिंग केस के बोझ तले दबी हुई हैं और देश की सर्वोच्च अदालत भी इससे अलग नहीं है। हालांकि अब एक एआई ड्रिवेन स्टार्टअप ने सुप्रीम कोर्ट को इस समस्या से बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया है।

इसी साल अप्रैल के पहले हफ्ते में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक एआई-संचालित पहल का अनावरण किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट पोर्टल फॉर असिस्टेंस इन कोर्ट्स एफिशिएंसी (SUPACE) कहा जाता है। यह पहल देश की विभिन्न कोर्ट में पड़े लंबित मामलों को निपटाने का काम करेगी।

सुप्रीम कोर्ट (सांकेतिक फोटो)

इस स्टार्टअप का कमाल

SUPACE को तैयार करने का काम पुणे, नागपुर और दिल्ली में स्थित स्टार्टअप मैनकॉर्प इनोवेशन लैब्स ने किया है। लोगों को कम समय में न्याय मिल सके इसके लिए इस स्टार्टअप ने टेक्नालजी का सहारा लिया है। स्टार्टअप ने पटना हाईकोर्ट में अपने पायलट प्रोजेक्ट भी चलाये हैं जहां केस के आवंटन के लिए AI का सहारा लिया गया था। इसी के साथ स्टार्टअप ने झारखंड की हाईकोर्ट के लिए झारखंड संवाद नामक एक चैटबॉट बनाया था।

साल 2018 में रथिन देशपांडे और विष्णु गीते के साथ कंपनी की स्थापना करने वाले मंथन त्रिवेदी ने मीडिया से बात करते हुए बताया है कि झारखंड उच्च न्यायालय के पास न्यायाधीशों की सहायता के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं थे। चैटबॉट उसी तरह सवालों का जवाब देता है जैसे एक कानून रिसर्चर केस को पढ़कर देता है।

छोड़ दी थी हावर्ड की पढ़ाई

मंथन त्रिवेदी 2015 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय में थे और अपने इस आइडिया पर काम करने के लिए हावर्ड की पढ़ाई छोड़कर भारत आ गए। इस दौरान त्रिवेदी ने यहाँ की समस्या को ढंग से समझने के लिए भारत का दौरा भी किया।

मैनकॉर्प इनोवेशन लैब्स का एक नया स्मार्ट सॉल्यूशंस प्रॉडक्ट एक इंटीग्रेटेड सिस्टम है जो माइक्रोसॉफ्ट वर्ड, पीडीएफ रीडर और एडिटर, जूम या गूगल मीट जैसे कई सिस्टम को एक प्लेटफॉर्म पर लाता है और दूर से काम करने वालों की मदद करता है। मैनकॉर्प इनोवेशन लैब्स अब आयकर विभाग के लिए एक ऑटोमेटिक डिफेक्ट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम पर भी काम कर रहा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, न्यायपालिका (सांकेतिक फोटो, साभार: baliyans.com)

त्रिवेदी के अनुसार जब कोई इनकम टैक्स केस फाइल करता है तो उसे यह सूचना मिलने में कई दिन लग जाते हैं कि उसके आवेदन में क्या कमी रह गई है, जबकि अब स्टार्टअप इस प्रक्रिया को ऑटोमेटिक करने की ओर बढ़ रहा है जहां लोगों के आवेदन अपलोड करने के साथ ही यदि कोई गलती मिलती है तो ऑटोमेटेड सिस्टम फौरन ही नोटिफिकेशन के जरिये इसको सूचना आवेदनकर्ता को दे देगा।

बड़े बाज़ार को बनाया है लक्ष्य

मैनकॉर्प इनोवेशन लैब्स में लगभग एक मिलियन डॉलर का प्रारंभिक निवेश के साथ शुरू हुआ था और अब कंपनी B2C (बिजनेस-टू-कंज्यूमर) और B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) बाजारों में प्रवेश करने के लिए 1 से 1.5 मिलियन डॉलर की फंडिंग के इरादे के साथ आगे बढ़ रही है। गौरतलब है कि कंपनी ने सरकारी संगठनों के बीच एक मजबूत जगह बना ली है, लेकिन इसका फोकस बी2बी व्यापार पर अधिक है।

त्रिवेदी के अनुसार छोटे निर्माण व्यवसाय और कानूनी प्रथाओं जैसे असंगठित क्षेत्र को टेक्नालजी का लाभ नहीं मिलता है क्योंकि उनके लिए या तो ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं या अफोर्डेबल नहीं हैं। कंपनी सभी के लिए ऐसे उत्पाद लेकर आ रहे हैं जो किफ़ायती

है।

Edited by रंजना त्रिपाठी