इन इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने डिस्लेक्सिया प्रभावित बच्चों के लिए तैयार किया एक ख़ास ऐप

By Sujata Sangwan
May 12, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:32:07 GMT+0000
इन इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने डिस्लेक्सिया प्रभावित बच्चों के लिए तैयार किया एक ख़ास ऐप
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'ऑगमेंट 11 वाय' की टीम

आंकड़ों के मुताबिक़, भारत में लगभग 3.5 करोड़ डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं। डिस्लेक्सिया एक ऐसी बीमारी है, जिसकी वजह से पीड़ित बच्चों को पढ़ने-लिखने में दिक्कत पेश आती है और इस वजह से वे अच्छे नंबरों के साथ पास नहीं हो पाते। आजकल के प्रतिभागी दौर में ऐसे बच्चों को कमज़ोर समझा जाता है, जबकि ऐसा नहीं है क्योंकि इस बीमारी या असक्षमता का बच्चे की बुद्धिमता से कोई संबंध नहीं होता। डिसलेक्सिया से पीड़ित बच्चा साधारण बच्चों जितना ही या उनसे अधिक समझदार हो सकता है।


इस समस्या के समाधान के रूप में मुंबई के मुकेश पटेल स्कूल ऑफ़ टेक्नॉलजी मैनेजमेंट ऐंड इंजीनियरिंग के चार छात्रों ने मिलकर 'ऑगमेंट 11 वाय' एक ऐप तैयार किया, जिसकी सहायता से डिसलेक्सिक बच्चों को पढ़ने-लिखने में मदद दी जा सकती है। तुषार गुप्ता, मुदिता सिसोदिया, शेज़ीन फैज़ुलभोय और मिताली राजू ने मिलकर इस ऐप को विकसित किया है और आपको बता दें कि ये चारों ही स्टूडेंट्स 30 साल से कम उम्र के हैं।


ऐंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफ़ॉर्म्स पर हाल ही में इस फ़्री ऐप को लॉन्च किया गया है। यह ऐप मोबाइल फ़ोन में मौजूद कैमरे की मदद से डिसलेक्सिया से पीड़ित बच्चों को पढ़ने के काम में मदद करता है। यह ऐप ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) तकनीक पर आधारित है, जो एक ख़ास फ़ॉर्मेंट में कॉन्टेन्ट प्रस्तुत करता है और साथ ही, इसमें कस्टमाइज़ करने की सुविधा के साथ कई फ़ीचर्स मौजूद है, जो डिसलेक्सिक बच्चों के लिए पढ़ना आसान बना देते हैं।


तुषार गुप्ता अंतिम वर्ष के इंजीनियरिंग छात्र हैं और हाल में ऑगमेंट 11 वाय प्रोजेक्ट को लीड कर रहे हैं। तुषार पिछले चार सालों से कई स्टार्टअप्स और एंटरप्राइज़ेज़ के साथ बतौर कन्सलटेन्ट जुड़े रहे हैं। भविष्य में वह ह्यूमन कंप्यूटर इंटरेक्शन में पोस्ट ग्रैजुएशन के लिए जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलजी (अटलांटा) जाने की तैयारी कर रहे हैं।


तुषार बताते हैं कि यह प्रोजेक्ट एक थीसेस प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ था और एक पूरे साल के शोध के इस प्रोजेक्ट ने एक ऐसे उत्पाद का स्वरूप लिया, जो डिसलेक्सिया से पीड़ित बच्चों के भविष्य को बेहतर बना सकता है।


ऑगमेंट 11 वाय की टीम ने जानकारी दी कि ऐप को भारत, माल्टा, नीदरलैंड्स, कनाडा, यूएस, आयरलैंड, यूके और नाइजीरिया के यूज़र्स द्वारा टेस्ट किया जा चुका है।


12-14 साल के डिसलेक्सिक बच्चों के साथ ऐप को टेस्ट करने पर टीम ने पाया कि हर बच्चे को पढ़ने के लिए लगने वाले समय में 21.03 प्रतिशत तक कटौती हुई। इसके अलावा, 93 प्रतिशत बच्चों ने यह माना कि ऐप में मौजूद बैकग्राउंड और टेक्स्ट के बीच कॉनट्रास्ट के ख़ास फ़ीचर की मदद से उन्हें काफ़ी मदद मिली। इसका मतलब है कि जिस बच्चे को किताब का एक चैप्टर पढ़ने में एक घंटे का समय लगता था, अब वही बच्चा ऑगमेंट 11 वाय की मदद से 40 मिनट में अपना चैप्टर ख़त्म कर सकता है।


ऑसवल्ड लैब्स द्वारा स्मार्टफ़ोन के लिए ऐप्स के एक सेट ऋवन ऐप्स की मार्केटिंग की जाती है और ऑगमेंट 11 वाय भी इसी का एक हिस्सा है। ऋवन ऐप्स दिव्यांगों के लिए ही तैयार किए जाते हैं। इन ऐप्स में सुनने में असक्षम लोगों के लिए लाइव सबटाइटल्स ऐप और दृष्टिबाधित लोगों के लिए विज़िबली ऐप शामिल हैं।


ऑगमेंट 11 वाय से शुरुआत करते हुए ओसवल्ड लैब्स ने एक रिसर्च फ़ंड तैयार किया था, जो अपने सालाना मुनाफ़े का 10 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक भलाई के लिए तैयार होने वाली ऐसी ही तकनीकों के रिसर्च और डिवेलपमेंट में लगाता है।

ऋवन प्लेटफ़ॉर्म के बारे में बात करते हुए ओसवल्ड लैब्स के सीईओ आनंद चौधरी ने कहा, "ऋवन प्लेटफ़ॉर्म की शुरुआत कर हम बेहद ख़ुश हैं और तुषार की टीम ने मिलकर डिसलेक्सिक बच्चों के लिए जो ऐप तैयार किया है, उसके संबंध में भी मैं काफ़ी उत्साहित हूं।"


आनंद कहते हैं कि ऑगमेंट 11 वाय इस क्षेत्र में काम कर रहे अन्य ऐप्स से इसलिए अलग और बेहतर है क्योंकि यह डिसलेक्सिया से पीड़ित बच्चों को एक निर्धारित रीडिंग पैटर्न नहीं मुहैया कराता बल्कि उन्हें यह सहूलियत भी देता है कि वे अपने हिसाब से कॉनट्रास्ट, टाइपफ़ेस, अक्षरों और पंक्तियों के बीच की जगह आदि को अपने हिसाब से तय कर सकते हैं। आनंद बताते हैं कि यह ख़ास डिसलेक्सिया फ़्रेंडली मोड दो साल पहले ओसवल्ड लैब्स द्वारा विकसित किया गया और उसे अगस्त्य नाम के वेब ऐक्सेसबिलिटी प्रोडक्ट में इस्तेमाल किया गया। यह फ़ीचर ऑगमेंट 11 वाय में एक्सक्लूसिव तौर पर इस्तेमाल किया गया है और यह अन्य किसी स्मार्टफ़ोन ऐप पर नहीं उपलब्ध है।


भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए टीम ने बताया कि उनका प्रयास है कि डिसलेक्सिक बच्चों को ध्यान में रखते हुए ऐप में और कुछ ख़ास फ़ीचर्स भी जोड़े जाएं। आनंद ने जानकारी दी कि रियल टाइम ट्रांसलेशन और टेक्स्ट टू स्पीच प्लेबैक मोड के फ़ीचर्स भी जोड़े जाने के बारे में प्रयास किए जा रहे हैं।


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