ग्लेशियर पार कर कोरोना के दौरान हिमालय के गांवों में पहुंचाई मेडिकल मदद, गांवों तक पहुंचने का नहीं था कोई रास्ता

By शोभित शील
June 21, 2021, Updated on : Wed Jun 23 2021 05:34:48 GMT+0000
ग्लेशियर पार कर कोरोना के दौरान हिमालय के गांवों में पहुंचाई मेडिकल मदद, गांवों तक पहुंचने का नहीं था कोई रास्ता
उत्तराखंड की रुंग कल्याण संस्था के सदस्यों ने दूसरी लहर के दौरान ऐसे ही रिमोट क्षेत्रों में बसे लोगों की जान बचाने का संकल्प लिया और अपनी पूरी क्षमता के साथ मैदान में उतर पड़े।
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"मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस टीम ने करीब 43 गांवों तक अपनी मदद पहुंचाने का काम किया है। मीडिया से बात करते हुए संस्था के सदस्यों ने बताया है कि मेडिकल किट पहुंचने के बाद अब ग्रामीणों के चेहरे पर एक राहत और खुशी का मिला जुला भाव देखने को मिला है।"

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फोटो साभार : सोशल मीडिया

कोरोना महामारी की दूसरी लहर पहली लहर से कहीं अधिक खतरनाक साबित हुई है। अप्रैल और मई के महीने में देश के लगभग सभी हिस्सों से कोरोना वायरस लगातार बढ़ते मामलों के साथ ही मृत्यु दर में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। इस दौरान कोरोना वायरस संक्रमण हिमालय क्षेत्र में बसे गांवों तक भी पहुँचने का डर सबके भीतर था, क्योंकि भारत के अन्य हिस्सों से उलट इन रिमोट इलाकों के लिए कनेक्टिविटी न होने के चलते यह संकट और भी अधिक बड़ा था।


इस बीच उत्तराखंड की रुंग कल्याण संस्था के सदस्यों ने दूसरी लहर के दौरान ऐसे ही रिमोट क्षेत्रों में बसे लोगों की जान बचाने का संकल्प लिया और अपनी पूरी क्षमता के साथ मैदान में उतर पड़े।

तैयार की खास मेडिकल किट

संस्था के बैनर तले करीब 43 समुदायों के लिए एक मेडिकल किट को तैयार किया गया, जिसमें कुछ जरूरी दवाएं, मास्क, सैनेटाइजर, पीपीई किट, ऑक्सीमीटर, थर्मल स्कैनर और थर्मोमीटर जैसे उपकरण आदि रखे गए थे।


न्यूज़ प्लेटफॉर्म द क्विंट के अनुसार हल्द्वानी से इन किटों को तैयार करके फिर हिमालय क्षेत्र में स्थित गांवों की ओर रवाना कर दिया गया। इस काम में लगे हुए वॉलांटियरों का कहना है कि उन्होने जिन गांवों में ये राहत सामग्री पहुंचाने का काम किया है वहाँ दूरसंचार और पक्की सड़क तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

पार किए दुर्गम रास्ते

बारिश के दौरान इन गांवों को जोड़ने वाली कच्ची सड़कें भी दुर्गम रास्ते में तब्दील हो जाती हैं, जिन पर चलना उस दौरान जान पर खेलने के बराबर हो जाता है। आलम यह था कि इन गांवों तक यह मेडिकल सप्लाई पहुंचाने के लिए इन वॉलांटियरों को पैदल ही आगे बढ़ना पड़ा।


इस दौरान इन वॉलांटियरों ने ग्लेशियर भी पार किए, जो उनके लिए काफी अधिक थका देने वाला एक पड़ाव था। आगे बढ़ने के लिए इन वॉलांटियरों के लिए यह ग्लेशियर पार करना अपनी जान हथेली पर रखने जैसा था।

गांवों तक पहुंची मदद

रास्तों की तमाम कठिनाइयों को पार करते हुए वॉलांटियरों की यह टीम उन रिमोट गांवों में पहुंची और वहाँ स्थानीय लोगों के बीच मेडिकल किट बांटने का काम किया।


मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस टीम ने करीब 43 गांवों तक अपनी मदद पहुंचाने का काम किया है। मीडिया से बात करते हुए संस्था के सदस्यों ने बताया है कि मेडिकल किट पहुंचने के बाद अब ग्रामीणों के चेहरे पर एक राहत और खुशी का मिला जुला भाव देखने को मिला है।


रुंग कल्याण संस्था ने भारत के साथ नेपाल स्थित हिमालय क्षेत्र के रिमोट इलाकों में रह रहे लोगों को मेडिकल किट उपलब्ध कराने का भी काम किया है।

अब पहुंचाएंगे खाद्य सामग्री

मालूम हो कि कठिन रास्तों को पार करते हुए टीम के सदस्य अपने कंधों पर यह समान लेकर चल रहे थे। अब वॉलांटियरों की यह टीम इन रिमोट गांवों में खाद्य सामग्री डिलीवर करने की भी योजना पर काम कर रही है, जिसके लिए वह अब सड़कों के खुलने का इंतज़ार करेंगे।


संस्था ने इन गांवों रह रहे लोगों से अनुरोध किया है कि इस दौरान किसी भी तरह की इमरजेंसी सामने आने पर वे संस्था की स्थानीय इकाई पर संपर्क करें जिससे उन तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जा सके।


Edited by Ranjana Tripathi

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