नवजात शिशुओं को बचाने से लेकर कई सारी समस्याओं को हल कर रहे ये स्टार्टअप्स

By Sindhu Kashyaap
February 25, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:31:24 GMT+0000
नवजात शिशुओं को बचाने से लेकर कई सारी समस्याओं को हल कर रहे ये स्टार्टअप्स
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नारायण मूर्ति

सैंडबॉक्स हुबली दक्षिण भारत में स्टार्टअप्स और उद्यमिता का पर्याय बना हुआ है। यह देशपांडे फाउंडेशन सैंडबॉक्स स्टार्टअप का एक हिस्सा है। सिलिकॉन वैली के उद्यमी गुरुराज 'देश' देशपांडे द्वारा स्थापित, सैंडबॉक्स का आइडिया उन क्षेत्रों में सोल्यूशन्स और इनोवेशन्स लाना है, जहां उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है। सैंडबॉक्स हुबली की एक विजिट आपको यह महसूस कराने के लिए काफी है कि स्टार्टअप्स और इनोवेशन अब केवल बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे मेट्रो शहरों में तक ही सीमित नहीं हैं। वर्कस्पेस, कॉन्फ्रेंस रूम, मेकर्स लैब, मेंटर्स, और इनवेस्टर्स से भरे इस इनक्यूबेटर का उद्देश्य ऐसे स्टार्टअप्स का पोषण करना है जो सेमी-अर्बन और ग्रामीण भारत में रहने वाले लोगों के जीवन में बदलाव लाता हो। कॉलेज के छात्रों से लेकर दिग्गज तक, यहां के उद्यमी रोजमर्रा की समस्याओं को हल करने के लिए काम कर रहे हैं। उनके सोल्यूशन्स में शिशुओं के जीवन को बचाने के लिए पोर्टेबल मशीनें, सुनने के उपकरण और फार्म-टू-फोर्क स्टार्टअप शामिल हैं।


YourStory ने सैंडबॉक्स में चल रहे कुछ सबसे दिलचस्प स्टार्टअप को करीब से जाना है। 


लाइफट्रॉन इनोवेशन इक्विप्मेंट्स (Lifetron Innov Equipments)


नवजात शिशुओं में पीलिया के इलाज के लिए पोर्टेबल डिवाइस 


यह नवजात शिशुओं में पीलिया के इलाज के लिए पोर्टेबल डिवाइस है। लाइफट्रॉन इनोवेशन इक्विप्मेंट्स, यह हुबली के सैंडबॉक्स स्टार्टअप्स में ही तैयार हुआ है। इन्होंने नवजात शिशुओं में पीलिया के इलाज के लिए एक पोर्टेबल, किफायती डिवाइस का निर्माण किया है। इसमें उन लाखों युवा जीवन को बचाने की क्षमता है जो इलाज की कमी के कारण हर साल दुखद रूप से खो जाते हैं। प्रैक्टिसिंग एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. किरण कंठी द्वारा स्थापित लाइफट्रॉन को 2016 में स्थापित किया गया था। इसने एक कम लागत वाली, पोर्टेबल, बेडसाइड नवजात फोटोथेरेपी यूनिट का निर्माण किया है, जिसका उपयोग किसी भी तरह के ग्रामीण या रिमोट कंट्रोल सेटअप में किया जा सकता है। पिछले मार्च में, लाइफट्रॉन इक्विप्मेंट्स का उद्घाटन NITI Aayog के सीईओ अमिताभ कांत ने किया था।


नैनोपिक्स-आईएसएस (nanoPix-ISS)


इमेज प्रोसेसिंग के जरिए काजू पीसने वाली मशीनें बनाना


आईआईएससी के पूर्व छात्र और मद्रास विश्वविद्यालय से एमबीए स्नातक शशि शेखर कृष व सुचित्रा बी द्वारा स्थापित, नैनोपीक्स-आईएसएस को 2013 में लॉन्च किया गया था। इस स्टार्टअप को उद्योग स्वचालन में लाने के लिए इमेज प्रोसेसिंग का उपयोग करने के आइडिया के साथ स्थापित किया गया था। यह कृषि, जैव प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और स्पोर्ट्स जैसे उद्योगों के लिए इमेज प्रोसेसिंग और नियंत्रण प्रणाली के आधार पर विभिन्न समाधान प्रदान करता है। इसकी पहली मशीन काजू उद्योग के लिए बनाई गई थी। शशि शेखर कृषि के क्षेत्र में कुछ करना चाहते थे। अपने शोध के दौरान, उन्होंने देखा कि पूरे भारत, ब्राजील, वियतनाम और 16 अन्य देशों में 1.8 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक कच्चे काजू के बीज का उत्पादन किया जाता है। हालांकि इनका उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है, लेकिन इन्हें मैनुअल छँटाई के साथ-साथ विजुअल इन्स्पेक्शन की आवश्यकता होती है, जो एक चुनौतीपूर्ण होता है। इसे हल करने के लिए, टीम ने नैनोसॉर्टर डेवलप किया, मशीन जो ऑटोमैटिक काजू से निपटने और निरीक्षण के लिए इमेज प्रोसेसिंग का उपयोग करती है। वर्तमान में यह पेटेंट-पेंडिंग टेक्नोलॉजी, मशीन काजू को आकार और रंग के आधार पर क्रमबद्ध करने में मदद करती है, और नट्स में स्पिलिट्स व सिकुड़न का भी पता लगा सकती है। टीम ने पहले से ही 40 से अधिक पेटेंट दायर किए हैं, और 2017 तक, भारत में 300 से अधिक मशीनों की बिक्री की थी।


फ्रेशबॉक्सएक्स सर्विस (Freshboxx Services)

फ्रेशबॉक्स की टीम

HORECA इंडस्ट्री के लिए सीधे खेतों की ताजा उपज डिलीवर करना


रोहन कुलकर्णी द्वारा 2015 में स्थापित, फ्रेशबॉक्स वेंचर्स हुबली स्थित एक ऑनलाइन फार्म-टू-फार्क स्टार्टअप है। फंड जुटाने के अलावा, इस स्टार्टअप ने योरमजेस्टी (UrMajesty) नाम के एक और स्टार्टअप का अपने साथ अधिग्रहण किया है। UrMajesty हुब्ली-आधारित लॉजिस्टिक स्टार्टअप है। हालांकि इस बात का खुलासा नहीं किया गया है कि ये स्टार्टअप उन्होंने कितने में अधिग्रहीत किया है। चाणक्य इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए करने वाले रोहन ने विभिन्न बीमा कंपनियों और ब्रोकरेज उद्योग में काम किया है। उनका आखिरी कार्यकाल एमसीएक्स स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड में था।


उन्होंने महसूस किया कि ज्यादातर टीयर I और II शहरों में लोगों को आमतौर पर अच्छी क्वालिटी और केमिकल-मुक्त फलों और सब्जियों तक पहुंचने में मुश्किल होती है। दूसरी ओर, किसान अपनी उपज को ग्राहकों तक शीघ्रता से नहीं पहुंचा पा रहे हैं। फ्रेशबॉक्स सप्ताह के अंत से लेकर शुक्रवार तक ग्राहकों से ऑर्डर लेता है और फिर उन्हें किसानों को फॉरवर्ड करता है। शनिवार की सुबह, स्टार्टअप के वाहन किसानों से फल और सब्जियां इकट्ठा करते हैं। एक बार जब उत्पादन फ्रेशबॉक्स के परिसर में पहुंच जाते हैं, तो उसके कर्मचारी उपज को तौलने, धोने, छांटने और काटने का काम करते हैं और सब्जियों और फलों को प्रोसेस कर देते हैं। फ्रेशबॉक्स वेंचर्स फलों और सब्जियों से हानिकारक रसायनों और कीटनाशकों को हटाने के लिए ओजोन तकनीक का उपयोग करता है।


माइक्रोचिप पेमेंट (Microchip Payments)


बिना इंटरनेट के करें पेमेंट


2016 में फरहान फिराक और नौमान द्वारा स्थापित, माइक्रोचिप पेमेंट्स भी DPIIT पंजीकृत स्टार्टअप है। इन दोनों को माइक्रोचिप पैमेंट का आइडिया नोटबंदी के तुरंत बाद आया था। टीम ने मोबाइल-आधारित पेमेंट एप्लिकेशन और पॉइंट-ऑफ-सेल डिवाइस का निर्माण किया है, जिससे यूजर्स इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी पेमेंट कर सकते हैं। ग्रामीण व मध्य पूर्व और उत्तर पूर्व (MENA region) के ऐसे क्षेत्रों को टार्गेट करने के लिए जहां इंटरनेट की पहुंच कम है, माइक्रोचिप पेमेंट्स को मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT), DCB बैंक और अन्य से काफी सराहना मिली है।


निर्नाल (Nirnal)

सभी के लिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना


निर्नाल के संस्थापक निरंजन कारगी को एक बार स्कूल के मैदान में फुटबॉल खेलते समय अपने इस स्टार्टअप का आइडिया आया। एक ब्रेक के दौरान, उन्होंने देखा कि कई बच्चे खेल के मैदान में नल से असुरक्षित पानी पी और भर रहे थे। AITM कॉलेज बेलगाम के पूर्व छात्र निरंजन देखा कि इन बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की तत्काल आवश्यकता है। अपने शोध के दौरान, उन्हें पाया कि पानी को फिल्टर करना उतना महंगा भी नहीं हैं, जिसके बाद उन्होंने वॉटर फिल्टर बनाने का फैसला किया जो पोर्टेबल और सस्ता था। उन्होंने पहले प्रोटोटाइप के निर्माण के लिए आसानी से हो जाने वाला सुलभ मैटेरियल का उपयोग किया। वे इससे एक छोटे से फिल्टर में डेवलप करने में कामयाब हुए जिसे किसी भी प्लास्टिक फिल्टर में फिट किया जा सकता है। फिल्टर की लागत - अभी भी प्रोटोटाइप स्टेज में - 30 रुपये ही है।


नॉटिलस हियरिंग (Nautilus Hearing)


हियरिंग टेस्ट्स को सरल, पोर्टेबल और सस्ता बनाना


ऑडियोलॉजिस्ट टी उदयरागा किरण और रेम्या उदय द्वारा स्थापित, नॉटिलस हियरिंग को 2018 में हियरिंग हेल्थकेयर को सभी के लिए सस्ता और सुलभ बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। संस्थापकों ने एक बूथलेस पोर्टेबल ऑडियोमीटर भी डेवलप किया है जो ऑडियोलॉजिस्ट को आसानी से कान के टेस्ट करने में मदद करता है। यह एक टेली-ऑडियोलॉजी मॉडल भी देता है, जो रोगियों को दूर से उनकी सुनवाई का निर्धारण करने में मदद करता है। फिलहाल ये प्रोडक्ट अभी क्लीनिकल ट्रायल स्टेज में है।


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