ये मंदी की सुस्ती नहीं श्रीमान, आम लोगों के लिए खरीदारी का सबसे बेहतर मौका

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"मंदी..मंदी...मंदी...रट लगाने जैसी ऊंची-ऊंची बातों के बीच, एक सवाल चौंका रहा है कि, क्या सरकार को देश की अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थितियां पता नहीं हैं या वह पूरी तरह बेखबर है! ऐसा कत्तई नहीं है। तो सच क्या है, एक ताज़ा अध्ययन में इस सवाल पर कई तरह की उम्मीद जगाने वाली बातें सामने आई हैं।" 


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सांकेतिक फोटो (Shutterstock)


खुशखबरी है कि आर्थिक सुस्ती के बावजूद ज्यादातर हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी, गोदरेज ग्रुप, एक्सिस बैंक, फ्यूचर ग्रुप, होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया, मारुति सुजुकी, आरपीजी ग्रुप, बिगबास्केट, ग्रोफर्स, प्यूमा, पैनासोनिक और डिक्सन टेक्नॉलजीज जैसी बड़ी कंपनियां अपने कर्मचरियों को इस बार त्योहारों पर दिये जाने वाले बोनस में कटौती अथवा देर करने के मूड में नहीं हैं। इससे कंज्यूमर गुड्स कंपनियां और रिटेलर खुश हैं। दिग्गज कंपनियां हर साल की तरह इस साल भी कर्मचारियों को फेस्टिव सीजन के लिए स्पेशल बोनस या सेल्स इनसेंटिव दे रही हैं। सितंबर-अक्टूबर के लिए एग्जिक्यूटिव्स और मैनेजरों को बोनस का भुगतान भी किया जा रहा है। कारखानों और शॉप फ्लोर्स पर काम करने वालों को भी वैधानिक बोनस मिलेगा, जो उनके बेसिक पे का हिस्सा है।


आर्थिक सुस्ती पर समझदार लोग भले चिंता जता रहे हो, सिक्के को पलट कर देखिए तो आम उपभोक्ताओं के लिए यही खरीदारी करने का बेहतरीन अवसर है। कार, ट्रक, हल्के कॉमर्शियल वाहन, एल्यूमीनियम उत्पाद, वित्तीय निवेश, बिजली के उपकरण, रिल्टी, एफएमसीजी, साबुन, रिटेल, बिस्कुट, उर्वरक, धातु, स्टील और रिफायनरी जैसे कई सेक्टर इन दिनों सुस्ती की गिरफ्त में हैं। आर्थिक सुस्ती या मंदी से कंपनियों, उत्पादकों या सेवा प्रदाताओं को भले नुकसान हो रहा हो, उपभोक्ताओं तो फायदा ही फायदा है क्योंकि ऐसे समय में उन चीजों को सस्ते भाव पर खरीदा जा सकता है, जिन्हें महंगी होने के कारण लोग पहले खरीदने की हसरत पूरी नहीं कर पाते थे। रियल्टी सेक्टर में सुस्ती से फ्लैट व जमीन के भाव काफी गिर जाते हैं। 


ऐसे वक्त में लोग घर या जमीन खरीदने का सपना साकार कर सकते हैं। कार बाजार में सुस्ती के कारण कंपनियां छूट और आकर्षक ऑफर दे रही हैं। माना जा रहा है कि इस कारोबारी साल के अंत तक कारों पर भारी छूट मिल सकती है। हाल में कई कंपनियों ने साबुनों के भाव घटा दिए हैं। कुछ कंपनियों ने बिस्कुट की भी कीमत घटा दी है। फिच ने इस साल स्टील के भाव कम रहने का अनुमान दिया है क्योंकि स्टील उद्योग में सुस्ती का माहौल है। ऐसे में घर बनाने या स्टील से जुड़े अन्य काम कर लेने के अवसर का लाभ उठा सकते हैं। शेयर बाजार में जब सुस्ती आती है, तो अठन्नी के शेयर चवन्नी के रह जाते हैं। ऐसे समय में ढेर सारे अच्छे शेयर खरीद कर लंबे समय के लिए रख सकते हैं। जब बाजार में तेजी आएगी, तो ये शेयर फिर से महंगे हो जाएंगे। आप इन्हें ऊंचे भाव पर बेचकर मालामाल हो सकते हैं।




एशिया के सबसे अमीर बैंकर कोटक महिंद्रा बैंक के चेयरमैन उदय कोटक भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति की तुलना बॉलीवुड फिल्म से करते हुए कहते हैं, अंत सुखद होगा। अभी भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर बहुत चुनौतीपूर्ण लग रही है. लेकिन, यह कभी उतनी खराब नहीं होती, जितनी दिखती है। यह कभी उतनी अच्छी नहीं होती, जितनी दिखती है। बॉलीवुड फिल्म की तरह हम भारत में (ग्रोथ के मामले) में मोहब्बत की कहानी को आगे बढ़ता देख रहे हैं। इस कहानी के बीच में सुस्त ग्रोथ और निवेश को लेकर लोगों में डर जैसे खलनायक भी हैं। इस खलनायक को काबू में करने के लिए भारत को वह काम जारी रखने की जरूरत है जो वह कर रहा है और चीजें धीरे-धीरे सही हो जाएंगी।


इन्‍फोसिस के को-फाउंडर एनआर नारायण मूर्ति कहते हैं-

भारत ने 300 सालों में पहली बार एक ऐसा आर्थिक माहौल बनाया है, जो विश्वास और आशावाद को जन्म देता है। भारत दुनिया का सॉफ्टवेयर विकास केंद्र बन गया है। विदेशी मुद्रा भंडार ने 400 बिलियन डॉलर को पार कर लिया है। इन हालात में देश के निवेशकों का विश्वास आज ऐतिहासिक ऊंचाई पर है।


एक मीडिया हाउस के जुलाई 2019 के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में शामिल 60 प्रतिशत लोगों ने नरेंद्र मोदी की एनडीए सरकार के आर्थिक प्रदर्शन को यूपीए शासन के मुकाबले बेहतर बताया है। सर्वे में शामिल 45 फीसदी लोगों ने कहा है कि नरेंद्र मोदी के 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से आर्थिक स्थिति सुधरी है। सर्वे के ये परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती आने की वास्तविकता से मेल नहीं खाते हैं। यद्यपि आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि भारत में जिस तरह जीडीपी की गणना की गई है उस पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है, कई निजी विशेषज्ञों और सेंट्रल बैंक का अनुमान है कि इस साल भी विकास दर 7 प्रतिशत के सरकारी अनुमान से कम रहने वाली है।


नेशनल इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक फाइनेंस एण्ड पालिसी के प्रोफेसर एन आर भानुमूर्ति कहते हैं,

इस समय सरकार को सड़क, रेलवे, बिजली, ग्रामीण एवं शहरी आवास क्षेत्र की तमाम बड़ी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना होगा ताकि आर्थिक गतिविधियों में तेजी आए। 


योजना आयोग निवर्तमान प्रधान आर्थिक सलाहकार प्रणव सेन कह रहे हैं कि किसानों को सालाना 6,000 रुपये देने की पीएम किसान योजना पर तेजी से अमल होना चाहिए। सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट रिसर्च (सीजीडीआर) के निदेशक डा. कन्हैया सिंह ने कहा है कि विनिर्माण क्षेत्र अच्छा नहीं कर रहा है लेकिन अन्य क्षेत्र अपेक्षाकृत ठीक प्रदर्शन कर रहे हैं, इसको समझने की जरूरत है। भारत जैसे देश में मुद्रास्फीति को लक्षित दायरे में बांधना ठीक नहीं है। 2019-20 की जीडीपी वृद्धि सात प्रतिशत के आसपास रहेगी। आईटीसी लिमिटेड के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर बी सुमंत का कहना है कि आगामी सीजन में उपभोग बढ़ेगा।


गोदरेज अप्लायंसेज के बिजनस हेड कमल नंदी का कहना है, सरकार की ओर से बड़ा राहत पैकेज आने से कन्ज्यूमर्स का सेंटीमेंट मजबूत होगा। मैरिको के एमडी सौगत गुप्ता कहते हैं कि हमें उम्मीद है, सरकारी उपायों से कंजप्शन को दो-तीन महीनों बाद बढ़ावा मिलेगा।




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