चीन से टक्कर लेकर इस शख्स ने खड़ा किया भारत का सबसे बड़ा सोलर कारोबार, हासिल कर रहे हैं 2 हज़ार करोड़ रुपये का राजस्व

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"साल 1989 में हितेश दोशी ने 5 हज़ार रुपये की पूंजी उधार लेकर एक थर्मल उपकरण व्यवसाय शुरू किया था। तब उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह चीन से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच भारत के सबसे बड़े सोलर पीवी मॉड्यूल निर्माण व्यवसाय- ‘वारी एनर्जी’ के निर्माण की दिशा में अपनी यात्रा शुरू करने वाले हैं।"

जब हितेश दोशी ने 1989 में मुंबई में एक थर्मल उपकरण व्यापार व्यवसाय शुरू किया, तब उस समय वह बस अपनी जीविका अर्जित करना चाह रहे थे। तब 5,000 रुपये की उधार पूंजी के साथ महावीर थर्मो इक्विप को लॉन्च करते हुए हितेश ने तापमान और प्रेशर गेज का कारोबार शुरू किया था।

30 से अधिक वर्षों की इस यात्रा के दौरान हितेश ने अपने व्यवसाय को वारी एनर्जीज में बदल दिया है, जो एक प्रमुख पीवी मॉड्यूल और 2GW क्षमता के साथ पैनल निर्माण फर्म के रूप में अब आगे बढ़ रही है।

योरस्टोरी के साथ एक विशेष साक्षात्कार में उन्होने कहा,

“एमएनआरई के अनुसार, हमारे पास भारत में सौर मॉड्यूल निर्माताओं की सबसे अधिक इंस्टॉलेशन क्षमता है, इसके बाद अदानी, विक्रम, आदि का नंबर है। पिछले साल कोरोना महामारी से प्रभावित बाजार में भी हमने 2,000 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया था। अब, हम दिसंबर 2021 तक अपनी क्षमता बढ़ाकर 5GW कर रहे हैं और अपने राजस्व को तीन गुना करने की उम्मीद कर रहे हैं।“

हितेश और उनकी कंपनी वारी चीनी आयात के प्रभुत्व वाले बाजार में आगे बढ़ रहे हैं और उनकी यह यात्रा अब सौर पीवी मॉड्यूल और पैनल के स्थानीय भारतीय निर्माण को चैंपियन बनाने की है।

वे कहते हैं,

"अधिकांश मॉड्यूल आयात किए जाते हैं और चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है। पैमाने, सरकारी सहायता, बुनियादी ढांचे, आदि के मामले में उनकी अर्थव्यवस्था को देखते हुए उनके पास फायदे हैं। फिर भी, हमने उन ग्राहकों के साथ संबंधों को बढ़ावा देने के लिए कड़ी मेहनत की है, जिन्होंने एक भारतीय ब्रांड में अपना विश्वास रखा है और जो हमारे द्वारा दी जाने वाली ग्राहक सेवा में विश्वास करते हैं।"

ऐसे रहे व्यापार के शुरुआती साल

एक उद्यमी के रूप में हितेश के शुरुआती दिन थोड़े कठिन ही थे। उस समय तामपान और प्रेशर गेज के निर्माण को लेकर की बाजार में कोई विश्वसनीयता नहीं थी और ऐसे में ग्राहकों को साथ जोड़ना भी उतना ही मुश्किल था।

वे कहते हैं,

“इस तरह के उत्पादों का उपयोग उद्योगों के बॉयलरों में किया जाता था और कोई भी एक नए उत्पाद पर भरोसा नहीं करना चाहता था जो संभावित रूप से उच्च जोखिम वाली घटना या दुर्घटना का कारण बन सकता था। यदि गेज सटीक रीडिंग नहीं दिखाते हैं, तो इससे बॉयलर फट सकता है और मानव जीवन, पूंजी, रसायनों के बैच और कच्चे माल आदि के मामले में संपत्ति की बड़ी क्षति हो सकती है।”

बाजार में प्रवेश की बाधाओं के रूप में गेज के लिए ‘प्रमाणन और अप्रूवल की लंबी लिस्ट’ जैसी चुनौतियां भी उनके सामने खड़ी थीं।

हितेश को अपने मैनुफेक्चुरिंग व्यवसाय में विश्वसनीयता लाने और चुनौतियों का समाधान करने में सात साल से अधिक का समय लग गया। इस दौरान उन्होने ड्वायर इंस्ट्रूमेंट्स (यूएसए), केलर (स्विट्जरलैंड) और अन्य अंतरराष्ट्रीय निर्माताओं के साथ रणनीतिक गठजोड़ करने का काम किया।

लेकिन सोलर ही क्यों?

2007 तक हितेश का व्यवसाय अमेरिका और कनाडा को सामान निर्यात कर रहा था और इस बीच कंपनी थर्मल उपकरण बाजार में सफलता देख रही थी। हालाँकि, हितेश इस दौरान नए व्यावसायिक अवसरों की तलाश में थे और यह तब हुआ जब उन्होने व्यवसाय के तौर पर सौर ऊर्जा को अपनाया।

वे कहते हैं,

“मुझे व्यवसाय को और आगे बढ़ाने की भूख थी। जर्मनी की यात्रा के दौरान, मैं एक सौर प्रदर्शनी में गया और वहाँ जाकर मानो मंत्रमुग्ध हो गया। मैंने वहां के लोगों से यह समझने के लिए बात की कि सौर ऊर्जा कैसे काम करती है और इसने मुझे आश्वस्त किया कि ना सिर्फ व्यापार के विस्तार के लिए बल्कि भारत के सोलर मैनुफेक्चुरिंग क्षेत्र के विकास के लिए अगला बड़ा कदम होगा।”

2007 में, वारी एनर्जी का जन्म सूरत में 30MW की एक मॉड्यूल निर्माण सुविधा के साथ हुआ था। 2010 तक, हितेश ने थर्मल उपकरण कंपनी वारी इंस्ट्रूमेंट्स को स्विस ब्रांड बाउमर को बेच दिया था। इसी के साथ उसी वर्ष उन्होंने वारी एनर्जी के मॉड्यूल निर्माण सुविधा का विस्तार 250MW तक कर दिया।

ऐसा है बिजनेस मॉडल

सौर ऊर्जा की ओर रुख करने के बाद से वारी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। चीन के प्रभुत्व वाले बाजार में काम करने के बावजूद, इस व्यवसाय ने अपनी क्षमता को लगातार बढ़ाते हुए अब 2GW कर दिया है।

हितेश कहते हैं,

“मेक इन इंडिया और आत्मानिर्भर भारत जैसी पहलों के साथ हमने सौर पीवी मॉड्यूल के अपने स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा दिया है। यह बाजार अत्यधिक प्रतिस्पर्धी है और हमेशा की तरह, हम अन्य कंपनियों की योजनाओं, सरकारी नीतियों और उभरती टेक्नालजी के साथ आगे बढ़ रहे हैं।”

वह कहते हैं कि हालांकि अधिकांश कच्चे माल भारत में उपलब्ध हैं, लेकिन आपूर्तिकर्ता वारी की आवश्यकताओं पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

हितेश कहते हैं,

"उदाहरण के लिए हमें बहुत सारे ग्लास की आवश्यकता होती है और भारत में हमारे पास केवल एक कंपनी ‘बोरोसिल’ है, जो हमारे लिए आवश्यक ग्लास बनाती है। बोरोसिल अन्य सौर ब्रांडों को भी आपूर्ति करती है और हम ज्यादातर अपनी आवश्यकताओं का लगभग 25 प्रतिशत ही उनसे प्राप्त कर पाते हैं। इस प्रकार, हम बाकी वस्तुओं को आयात करने के लिए मजबूर हैं।”

एक बार बन जाने के बाद सोलर पीवी मॉड्यूल और पैनल ग्राहकों को बेचे जाते हैं, इनमें स्कूल, कॉलेज, अस्पताल आदि शामिल हैं, जो रूफटॉप सोलर स्थापित करना चाहते हैं। साथ ही ऐसे उद्यम भी इनके ग्राहक हैं जो सोलर प्लांट और पार्क स्थापित करना चाहते हैं और बिजली राज्य को बेचते हैं।

हितेश के अनुसार,

“एक सोलर पार्क में 1MW लगभग 3,500 पैनलों के बराबर होता है। हमने अब तक सौर पार्कों में 4GW स्थापित किया है, जिसकी मात्रा लगभग 14 मिलियन पैनल है।”

वह कहते हैं कि कंपनी सीधे B2C ग्राहकों को नहीं बेंचती है, इसके लिए वारी ने 350 से अधिक फ्रैंचाइज़ी आउटलेट्स का एक नेटवर्क स्थापित किया है जो घरों के लिए रूफटॉप सोलर की उपभोक्ता आवश्यकताओं को पूरा करता है।

हितेश कहते हैं,

“हमारे ग्राहक भारतीय कंपनी के साथ काम करने में अधिक सहज महसूस करते हैं। B2B ग्राहकों के लिए उन चीनी कंपनियों से निपटना मुश्किल हो सकता है, जो अंग्रेजी नहीं समझती हैं या उनकी आवश्यकताओं को नहीं जानती हैं। ये कारक ग्राहकों को वारी पर अधिक विश्वास दिलाते हैं।”

कोरोना प्रभाव और भविष्य की योजनाएँ

सौर उद्योग में मैनुफेक्चुरिंग और इंस्टॉलेशन श्रम प्रधान हो सकती है। बीते साल COVID-19 महामारी के कारण अपने गृहनगर लौटने वाले श्रमिकों के चलते व्यवसाय ने व्यवधान का सामना किया था। हालांकि हितेश ने समय बर्बाद नहीं होने दिया और इस धीमी रफ्तार के दौरान भी अमेरिकी बाजार में निर्यात शुरू करते हुए नए आपूर्ति चैनलों की पहचान की।

वे कहते हैं,

“सोलर पैनल और संयंत्र वास्तव में पारंपरिक, गैर-नवीकरणीय संयंत्रों की तुलना में जल्दी स्थापित किए जा सकते हैं। हालांकि बड़ी संख्या में हमारे वर्कर घर चले गए। भले ही हमने पैनलों का निर्माण किया हो, हमारे पास उन्हें स्थापित करने के लिए हमारे पास कार्यबल नहीं था। पिछला साल हमारा सबसे कठिन साल रहा है।”

अब जबकि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बाद कार्यबल पूरी तरह वापस आना बाकी है, ऐसे में हितेश ने नए आपूर्तिकर्ताओं और नई तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करने में समय बिताया है। इस वर्ष, कंपनी फिर से लगभग 2,000 करोड़ रुपये के कारोबार को देख रही है, जहां 15 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।

चूंकि भारत सरकार का लक्ष्य 2022 तक 114 गीगावॉट सौर क्षमता हासिल करना है, इससे सौर क्षेत्र में वापसी हो रही है। वारी की योजना न केवल अपनी कुल क्षमता को 5GW तक बढ़ाने और अपने राजस्व को तिगुना करने की है, बल्कि सेलर सेल, लिथियम बैटरी, सौर-सक्षम कृषि पंप और इनवर्टर के निर्माण की ओर भी अपना ध्यान बढ़ाने की भी है।

Edited by Ranjana Tripathi

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