त्रिपुरा में सेल्फ-हेल्प वुमन ग्रुप ने बनाए बांस से इको-फ्रेंडली 'दीये', सीएम बिप्लब कुमार देब ने लॉन्च किए प्रोडक्ट

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने हाल ही में बीते 6 नवंबर को एक स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह द्वारा बनाए गई बांस की मोमबत्तियां, दिये, जैविक गुड़ और जाम आदि प्रोडक्ट्स का शुभारंभ किया।
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दिवाली का त्यौहार बेहद करीब है। इस वर्ष रोशनी का ये त्योहार थोड़ा अलग होगा क्योंकि हम अभी भी कोरोनावायरस महामारी से जूझ रहे हैं। इस बीच, हर तरफ घरों को साफ करने और सजाने की तैयारियां जोरों पर हैं।

इस बार, कई कलाकारों और स्थानीय लोगों ने इस प्रकार पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) प्रोडक्ट बनाए हैं जो निश्चित रूप से त्योहारी सीजन में सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं।

वर्तमान सरकार द्वारा शुरू की गई पहल सभी लोकल प्रोडक्ट्स का समर्थन करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए है, जिससे उन्हें आयातित वस्तुओं पर निर्भर होने के बजाय बढ़ने में मदद मिलती है।

त्रिपुरा में एक स्वंय-सहायता महिला समूह (सेल्फ-हेल्प वुमन ग्रुप) ने इस बार बाँस के दीये बनाएं हैं। ये दीये और मोमबत्तियाँ अलग-अलग कीमतों पर बाजार में उपलब्ध हैं। पूरी तरह से बांस से बने, ये प्रोडक्ट्स पर्यावरण के अनुकूल हैं और वर्तमान में इनकी काफी मांग भी हैं।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने हाल ही में बीते 6 नवंबर को सिपाहीजाला जिले के एक स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह द्वारा बनाई गई बांस की मोमबत्तियों, जैविक गुड़ और जाम का शुभारंभ किया। एक साधारण कार्यक्रम में प्रोडक्ट्स को लॉन्च करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रोडक्ट इस बात के सबूत हैं कि पीएम मोदी के स्थानीय व्यापार को बढ़ाने के आह्वान की बात भारत के सबसे छोटे गाँवों तक पहुँची है।

दिवाली से पहले हुए इस समारोह में स्वयं सहायता समूह के सदस्य और सिपाहीजाला की जिला मजिस्ट्रेट विश्वश्री बी की उपस्थिति भी देखी गई।

समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो संबोधन 'मन की बात' में बांस से बने प्रोडक्ट्स और 'वोकल फोर लोकल' पर जोर दिया है और महिला एसएचजी की यह पहल साबित करती है कि पीएम की यह अवधारणा त्रिपुरा के दूरदराज के गांवों तक भी पहुंच गई है।"

रिपब्लिक वर्ल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस स्वयं-सहायता महिला समुह के काम की तारीफ करते हुए सीएम देब ने कहा कि यह पूरी तरह से नई अवधारणा थी। स्वयं सहायता समूह की महिला ने मोमबत्तियों के अलावा जैविक गुड़ और अनानास जाम का भी प्रोडक्शन किया। स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे उत्पादों का उपयोग करके मीठे उत्पादों के उत्पादन के विचार की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि वे न केवल अच्छे प्रोडक्ट्स बना सकते हैं बल्कि स्थानीय किसानों को भी लाभान्वित कर सकते हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, सीएम बिप्लब कुमार देब ने 'लोकल' प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने के बारे में बात करते हुए, यह भी कहा कि बांस के पौधे बड़े हुए और दूसरों की तुलना में तेजी से परिपक्व हुए। बांस में विशेष रूप से लघु उद्योगों में रोजगार और आय पैदा करने की क्षमता है और राज्य सरकार इस क्षेत्र पर जोर दे रही है

सेल्फ-हेल्प ग्रुप (SHG) की एक सदस्य दीपाली पॉल ने एएनआई को बताया, "जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), ब्लॉक डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर (बीडीओ) और अन्य समन्वयक हमारे पास ऑफर लेकर आए थे, तब तक हम बांस की मोमबत्तियों की अवधारणा के बारे में बिलकुल भी नहीं जानते थे। लेकिन हमारे अब इन प्रोडक्ट्स की भारी मांग देखने को मिल रही है। हमने विभिन्न मूल्य श्रेणियों के लिए 'दीये' और मोमबत्तियाँ बनाईं है।"

त्रिपुरा में, अधिकांश SHG महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे हैं और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में SHG आंदोलन के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देकर उन्हें सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।