भगवान की टूटी मूर्तियों को रिसाइकल कर बच्चों के लिए खूबसूरत खिलौने बनाती हैं तृप्ति

तृप्ति अपने प्रोजेक्ट ‘संपूर्णम’ के तहत बीते दो सालों से भगवान की खंडित हो चुकी मूर्तियों और खराब हो चुकी तस्वीरों को इकट्ठा कर उन्हें एक नया रूप दे रही हैं।
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"इस प्रोजेक्ट की शुरुआत तृप्ति ने साल 2019 में की थी, शुरुआत में तृप्ति के कुछ दोस्त उनकी मदद कर रहे थे, इसके बाद इस प्रोजेक्ट के साथ जुड़ने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ने लगी।"

(चित्र साभार: संपूर्णम)

नासिक की तृप्ति गायकवाड़ भगवान की टूटी हुई मूर्तियों को रिसाइकल करने का काम करती हैं। तृप्ति एक वकील होने के साथ ही पेशेवर इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर भी हैं। तृप्ति अपने प्रोजेक्ट ‘संपूर्णम’ के तहत बीते दो सालों से भगवान की खंडित हो चुकी मूर्तियों और खराब हो चुकी तस्वीरों को इकट्ठा कर उन्हें एक नया रूप दे रही हैं।

गौरतलब है कि इन मूर्तियों को रिसाइकल करने से पहले इनकी उत्तर पूजा की जाती है और फिर उन्हें रिसाइकल करने के लिए आगे भेजा जाता है। तृप्ति का मानना है कि भगवान की टूटी मूर्तियों को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति भी पैदा हो जाती है कि इनका क्या करना है, ऐसे में संस्था उनकी मदद करती है। 

2019 में हुई थी शुरुआत

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत तृप्ति ने साल 2019 में की थी, शुरुआत में तृप्ति के कुछ दोस्त उनकी मदद कर रहे थे, इसके बाद इस प्रोजेक्ट के साथ जुड़ने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ने लगी। तृप्ति के अनुसार लोग अभी फिलहाल कलेक्शन में मदद कर रहे हैं, जबकि उत्तर पूजा और रिसाइकल का कमा वह खुद ही देख रही हैं।

मीडिया से बात करते हुए तृप्ति कहती हैं,

“घर की खंडित मूर्ति को अगर हम पेड़ के नीचे या मंदिर के बाहर रखकर आ जाते हैं या नदी में बहा देते हैं, तब भी हमें यह मालूम नहीं होता है कि इसके बाद उन मूर्तियों का क्या होना है। हम कई बार देखते भी हैं कि किस तरह मूर्तियों को गंदगी के साथ रख दिया जाता है। हम अपने भगवनों की मूर्तियों का अपमान ना करें, इस उद्देश्य से ही हमने यह प्रोजेक्ट शुरू किया है।”

वह कहती हैं,

“जो आधुनिकता हम भगवान की मूर्ति बनाने में लेकर आए हैं, वही आधुनिकता हमें भगवान की खंडित हो चुकी मूर्तियों को डिजॉल्व करने में लानी है। संपूर्णम इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।"

बनाए जाते हैं खिलौने

इन खंडित हो चुकी मूर्तियों से मशीन के जरिये प्लास्टर ऑफ पेरिस को अलग कर लिया जाता है और फिर उसका इस्तेमाल छोटे-छोटे खिलौने बनाने में किया जाता है। ये खिलौने बाद में आदिवासी व गरीब समुदाय के बच्चों को खेलने के लिए दे दिये जाते हैं।

इसी प्लास्टर ऑफ पेरिस के साथ सीमेंट मिलाकर इससे पक्षियों के लिए प्लेट का निर्माण भी किया जाता है, जिसे बाद में पक्षियों के लिए दाना चुगने और पानी पीने के बर्तन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

लोग कर रहे हैं मदद

तृप्ति के अनुसार जब उन्हें यह आइडिया आया तब वे कुछ स्थानीय नेताओं व संस्था के पास मदद की उम्मीद लेकर गई थीं, लेकिन वहाँ बात उतनी नहीं बनी। इसके बाद तृप्ति ने अपने प्रोजेक्ट को लेकर एक मैसेज सोशल मीडिया पर शेयर किया और वह मैसेज वायरल हो गया। इसके बाद देश भर से लोग तृप्ति की मदद को आगे आने लगे।

आज संपूर्णम के जरिये जो लोग भी भगवान की खंडित मूर्ति को रिसाइकल करनवाना चाहते हैं, वे जरूरी राशि को दान कर ऐसा कर सकते हैं। इसी के साथ संपूर्णम के इस नेक काम में उनकी मदद के लिए दान भी कर सकते हैं।

Edited by Ranjana Tripathi

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