सिर्फ़ पैकेट पर नहीं हरेक सिगरेट पर चेतावनी छपेगी अब कनाडा में

सिगरेट की पैकेट पर ग्राफ़िक वार्निंग डालने की शुरुआत भी कनाडा से हुई थी और अब पैकेट के हर सिगरेट पर वार्निंग दिख सकती है.
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तंबाकू के हानिकारक प्रभाव को कम करने की कवायद में कनाडा की सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. पिछले शुक्रवार को कनाडा की एडिक्शन मिनिस्टर कैरोलिन बेनेट ने एक न्यूज़ कांफ्रेंस के दौरान यह ऐलान किया कि हर डब्बे पर सिगरेट पीने के साइड एफेफ्क्ट के अलावा अब सिगरेट बनाने वाली कंपनियों को हर एक सिगरेट पर ‘वार्निंग लेबल’ (warning label) डालनी होगी. पिछले शनिवार से शुरू हुए 75 दिनों का कंसल्टेशन पीरियड समाप्त होने पर यह नियम लागू कर दिया जायेगा.

सिगरेट के पैकेट्स के साइड पर ग्राफ़िक वार्निंग देने का नियम भी पहली बार साल 2000 में कनाडा ने ही बनाया था. कनाडा में हर साल लगभग 40 हज़ार लोग तंबाकू की वजह से मौत का शिकार होते हैं. वहाँ की सरकार साल 2035 तक अपनी तंबाकू इस्तेमाल करने वाली जनसंख्या को 5% तक सीमित करना चाहती है. नए नियम को उसी दिशा में बढ़ते हुए कदम की तरह देखा जा रहा है जिसका स्वागत करते हुए देश के हार्ट एंड स्ट्रोक फाउंडेशन के CEO डग रॉथ ने इसे एक ’साहसिक निर्णय’ करार दिया है 

क्या सिगरेट पीने वालों पर असर पड़ेगा जब हर कश खींचते हुए चेतावनी आँखों को दिखेगी? 

सिगरेट के पैकेट और उसके ऊपर दिए गए ग्राफ़िक वार्निंग्स कितने कारगर होते हैं यह एक बहस का मुद्दा रहा है. पैकेट पर प्रिंटेड वार्निंग्स “शॉक टैक्टिक” के तहत दिए जाते हैं जिनमे कभी हेल्थ अपील कभी इमोशनल अपील की जाती है. कनेडियन कैंसर सोसाइटी के सीनियर पालिसी एनालिस्ट रॉब कनिंघम ने इस नए प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसकी सम्भावना जताई है कि हर सिगरेट पर लिखी हुई हेल्थ वार्निंग लोगों की सोच पर असर डाल सकती है और उन्हें क्विट करने के लिए प्रेरित कर सकता है. क्योंकि डब्बे पर दी गयी वार्निंग नज़र से दूर  रहने के कारण शायद उतनी इफेक्टिव न हो लेकिन हाथ में जलती हुई सिगरेट पर लिखी हुई वार्निंग पीने वाले को हर कश के साथ आपको देखेगी. प्रस्तावित वार्निंग यह है- “हर कश में ज़हर है” (“poison in every puff”).  

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के मुताबिक, दुनिया के 91 देश अपने सिगरेट पैकेट्स पर ग्राफ़िक वार्निंग देते हैं. धीरे-धीरे यूरोपियन यूनियन के सारे 28 देशों ने यह शुरू किया. इसके अलावा इंडिया और न्यूज़ीलैण्ड अपने सिगरेट के पैकेट्स पर वार्निंग देते हैं. 

Image credit: tobaccolabels.ca

क्या है इंडिया में सिगरेट चेतावनी के नियम क़ायदे 

इंडिया में हेल्थ वार्निंग पॉलिसी 2006 में ड्राफ्ट की गयी जो संशोधित होकर 2008 में आई पर उसका क्रियान्वयन 31 मई 2009 से शुरू हुआ. 2011 में मिनिस्ट्री ऑफ़ हेल्थ एंड फॅमिली वेलफेयर (Ministry of Health and Family Welfare) ने 4 ग्राफ़िक वार्निंग देने का प्रावधान बनाया जिसे दिसम्बर 1, 2011 से लागू किया गया. मिनिस्ट्री के द्वारा तय किये गए चार ग्राफ़िक्स में से एक को चुन कर तंबाकू कंपनियां अपने सिगरेट पैकेट्स पर डालती थीं. 

Image credit: tobaccolabels.ca

साल 2012 में आये नए नियम के अनुसार पैकेट की 40% जगह हेल्थ वार्निंग से कवर होनी चाहिए था. 2015 में पैकेट के 85% कवर करने का नियम आया जो अभी तक चल रहा है. इंडिया में सिगरेट के पैकेट पर चित्रित और लिखित वार्निंग देने के कुछ नियम हैं जैसे: ग्राफ़िक वार्निंग फ्रंट और बैक दोनों को 85% कवर करनी चाहिए. 85% में 60% ग्राफ़िक इमेज के लिए होता है और 25% में टेक्स्ट के लिए. वार्निंग टेक्स्ट लाल रंग के बैकग्राउंड पर सफ़ेद  से लिखा होना चाहिए जबकि हेल्पलाइन नंबर ब्लैक बैकग्राउंड पर सफ़ेद से लिखा होना चाहिए.  

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