हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग को डिजिटल टूल अपनाने में मदद कर रहा है ग्रामीण कारीगरों के लिए बना यह B2B मार्केटप्लेस

नोएडा स्थित Lal10 ग्रामीण MSMEs के लिए एक ऑनलाइन थोक बाजार है। ब्रांड ने जारा, अनीता डोंगरे, टोस्ट, विल्स लाइफस्टाइल, फैबइंडिया, फोर सीजन्स और तनेरा जैसे ब्रांडों के साथ बुनकरों और कारीगरों को जोड़ा है।
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IBEF के अनुसार, भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक है और यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 4.3 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार देता है।

यह इंडस्ट्री एक महत्वपूर्ण रेवेन्यू उत्पन्न करने वाली इंडस्ट्री है, जिसमें वित्त वर्ष 2020 में 319.02 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ है।

कई अन्य क्षेत्रों की तरह, COVID-19 महामारी की चपेट में आने से हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र में भारी गिरावट आई। ढेर सारे स्टॉक और कोई ऑफलाइन मार्केटप्लेस उपलब्ध नहीं होने से परेशान, बुनकरों और कारीगरों ने महसूस किया कि डिजिटल होना ही आगे बढ़ने का एकमात्र तरीका है।

इसके अलावा, इस अत्यधिक खंडित और असंगठित उद्योग ने Okhai, GoCoop, iTokri, Amazon Karigar, The India Craft House, AuthIndia आदि सहित कई B2C और B2B खिलाड़ियों के इस स्पेस में आने से अपने गियर बदलते हुए देखा है।

नोएडा स्थित Lal10 भी ऐसी ही एक कंपनी है। 2017 में मानित गोहिल, संचित गोविल और एल्बिन जोस द्वारा स्थापित, Lal10 भारत में ग्रामीण सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए एक ऑनलाइन थोक बाजार है। परिधान, हैंडबैग से लेकर लैंपशेड तक, इसकी कुल 30,000 स्टॉक-कीपिंग इकाइयाँ (SKU) हैं।

Lal10 नाम को 'लालटेन' के रूप में उच्चारित किया जाता है। यह नाम कंपनी के मिशन "कारीगरों के जीवन में रौशनी लाने" से लिया गया है।

मार्च 2020 में, Lal10 ने यूटा (Utah) से सोरेनसन इम्पैक्ट और कुछ एंजेल निवेशकों से एक सीड राउंड जुटाया। ब्रांड ने जारा, अनीता डोंगरे, टोस्ट, विल्स लाइफस्टाइल, फैबइंडिया, फोर सीजन्स और तनेरा सहित कई ब्राडों के साथ बुनकरों और कारीगरों को जोड़ा है।

YourStory के साथ बातचीत में, मनीत ने सेक्टर को डिजिटल बनाने और व्यवस्थित करने में कंपनी के प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने इस बारे में भी खुलकर बात की कि कैसे COVID-19 ने संगठन के भीतर बदलाव लाए हैं।

YourStory (YS): कंपनी का गठन कैसे हुआ?

मनीत गोहिल (MG): मेरे दादा एक सूक्ष्म-उद्यमी थे, जिनकी अपनी इकाई थी, उनके अधीन कुछ कारीगर काम करते थे। जब मैं उनकी गर्मी की छुट्टियों के दौरान उनसे मिलने जाता था, तो मैंने उन्हें देखा और उद्योग से प्रभावित हुआ।

2015 में एमबीए पूरा करने के बाद, मैंने ई-कॉमर्स और तकनीक को समझने के लिए फ्लिपकार्ट में कुछ समय के लिए काम किया। Lal10 हमेशा मेरे दिमाग में रहता था; मैं सही मौके की तलाश में था।

इसलिए मैंने अपनी फुल टाइम जॉब करते हुए इस कॉन्सेप्ट पर काम करना शुरू कर दिया। मैंने 2017 में खुद को पूरी तरह से व्यवसाय में डुबो दिया, और मेरे पूर्व सहयोगी संचित गोविल और एक मित्र एल्बिन जोस सह-संस्थापक के रूप में मेरे साथ जुड़ गए।

YS: Lal10 का लक्ष्य क्या हल करना है?

MG: मेरे दादाजी के सामने मुख्य चुनौतियों में से एक बाजार तक पहुंच थी। यह उद्योग पूंजी प्रधान है, जिससे कारीगरों के लिए अपनी इन्वेंट्री को बहुत लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।

2017 में, हमने पूरे भारत की यात्रा की, और 6000 से अधिक कारीगरों से मिलने के बाद, हमने महसूस किया कि यह एक आम दुविधा है।

लाल10 एक बी2बी प्लेटफॉर्म है जो एक ग्रामीण कारीगर और एक शहरी ग्राहक के बीच की खाई को पाटता है।

YS: आपने कारीगरों को खुद से जोड़ने के लिए कैसे मनाया? आपने उन्हें कैसे शिक्षित किया क्योंकि आपका फॉर्मैट पूरी तरह से टेक्नोलॉजी पर आधारित है?

MG: हम उन सूक्ष्म उद्यमियों के साथ काम करते हैं जिनके साथ कई अन्य कारीगर काम करते हैं। हम इन सूक्ष्म उद्यमियों को प्रशिक्षित करते हैं, जो बदले में, कारीगरों को ऐप का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

यह बहुत उपयोगी है क्योंकि लोग एक बाहरी व्यक्ति से ज्यादा स्थानीय लोगों पर भरोसा करते हैं।

सब कुछ घर में डेवलप किया गया है। हमने एप्लिकेशन पर काम करने के लिए UI/UX विशेषज्ञों को काम पर रखा है। एक कारीगर को बस ऐप पर अपना प्रोफाइल बनाना होता है और अपने स्टॉक को अपलोड करना होता है। जब उन्हें कोई खरीदार मिल जाता है, तो लेनदेन ऑनलाइन होता है। हम कमीशन के रूप में एक प्रतिशत चार्ज करते हैं, और बाकी कारीगर की जेब में चला जाता है।

आज, हम पूरे मंडल में लगभग 1,500 कारीगरों के साथ काम कर रहे हैं। हमने अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व सहित 19 देशों में 400 से अधिक खुदरा विक्रेताओं को सेवा प्रदान की है।

YS: कैसे COVID-19 ने इस इंडस्ट्री को डिजिटल अपनाने में तेजी लाई है?

MG: पूर्व-महामारी युग में, कारीगर प्रदर्शनियों, व्यापार शो आदि पर बहुत अधिक निर्भर थे, जो अब सभी लगभग बंद हो गए हैं।

हमने यह भी देखा कि कई कारीगर, जिन्हें कुछ तकनीकी ज्ञान था, ने अपने उत्पादों को बेचने के लिए इंस्टाग्राम पर पेज बनाए। हालांकि, B2B संरचना में, उन्हें यह नहीं पता था कि अपने पेज पर कर्षण कैसे लाया जाए, या खरीदारों को अपने पेज पर कैसे लाया जाए।

यहीं पर हम आए। हमारे पास ओडिशा, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, आदि के कई बुनकर थे, लेकिन COVID-19 महामारी के बाद, हमारी पहुंच का विस्तार हुआ। हमने महामारी के दौरान 600 MSMEs को ऑनबोर्ड किया।

हमने पिछले 15-18 महीनों में कश्मीर, बिहार और वाराणसी बेल्ट से कारीगरों को जोड़ा है। हम पिछले तीन महीनों से मासिक 80 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, हम अगली तिमाही में 2,000 और एमएसएमई को जोड़ने की प्रक्रिया में हैं, जिसका श्रेय डिजिटल अपनाने में तेजी को जाता है।

YS: अगले 12-18 महीनों के लिए आपकी क्या योजनाएं हैं?

MG: हम आने वाले समय में निर्यात बाजार में प्रवेश करना चाहते हैं क्योंकि हमने अपने प्लेटफॉर्म पर आने वाले वैश्विक खरीदारों की संख्या में भारी वृद्धि देखी है।

हम अमेरिका और कुछ यूरोपीय बाजारों में एक गोदाम शुरू करने की योजना बना रहे हैं। हम अपने प्लेटफॉर्म को इनोवेट करने पर भी काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, हम इमेज प्रोसेसिंग पहलू में सुधार कर रहे हैं और अधिक स्थानीय भाषा उपकरण प्रदान कर रहे हैं।

इसके अलावा, हम थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे दक्षिण एशियाई देशों में अपनी बाजार पहुंच का विस्तार करने की भी योजना बना रहे हैं।


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Edited by रंजना त्रिपाठी