वीकली रिकैप: पढ़ें इस हफ्ते की टॉप स्टोरीज़!

By रविकांत पारीक
June 20, 2021, Updated on : Sun Jun 20 2021 04:02:20 GMT+0000
वीकली रिकैप: पढ़ें इस हफ्ते की टॉप स्टोरीज़!
यहाँ आप इस हफ्ते प्रकाशित हुई कुछ बेहतरीन स्टोरीज़ को संक्षेप में पढ़ सकते हैं।
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इस हफ्ते हमने कई प्रेरक और रोचक कहानियाँ प्रकाशित की हैं, उनमें से कुछ को हम यहाँ आपके सामने संक्षेप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिनके साथ दिये गए लिंक पर क्लिक कर आप उन्हें विस्तार से भी पढ़ सकते हैं।

डॉ. केके अग्रवाल की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं उनकी बेटी नैना अग्रवाल

नैना अग्रवाल एक प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ और चिकित्सक डॉक्टर केके अग्रवाल की बेटी हैं। डॉ. केके अग्रवाल ने महामारी के दौरान अपने ज्ञानवर्धक वीडियो से लाखों लोगों को उम्मीद दी थी। उन्होंने हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया की भी स्थापना की, जो जरूरतमंदों के लिए कई स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम चलाता है।

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जब इस साल मई में कोविड-19 के कारण हृदय रोग विशेषज्ञ, चिकित्सक और पद्म श्री पुरस्कार विजेता डॉक्टर केके अग्रवाल का निधन हो गया, तो हजारों लोगों ने उनके जाने पर शोक व्यक्त किया। जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सेवा और सहायता प्रदान करने वाले एक गैर सरकारी संगठन हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के संस्थापक के रूप में डॉ. अग्रवाल ने अपने जीवनकाल में लाखों लोगों के जीवन को संवारा था।


अपने आखिरी वीडियो में, डॉ. अग्रवाल ने कहा था, “पिक्चर बाकी है। शो मस्ट गो ऑन।" उनकी मृत्यु चिकित्सा बिरादरी और आम लोगों दोनों के लिए एक बड़ी क्षति है, लेकिन उनकी बेटी नैना अग्रवाल ने YourStory के साथ बातचीत में कहा कि उनके पिता की विरासत, आशा का संदेश और स्वास्थ्य सेवा के लिए उनका समर्पण जारी रहेगा।


वह कहती हैं, "उनका जाना केवल हमारे परिवार के लिए क्षति नहीं है, उन्होंने इतने वर्षों में इतने लोगों को प्रभावित किया है कि यह देश, हर परिवार और घर जिन्हें उन्होंने उम्मीद दी, उनके लिए भी एक बड़ी क्षति है।"


नैना कुछ वर्षों से एचसीएफआई के कम्युनिकेशन साइड में शामिल हैं, विभिन्न कार्यक्रमों पर काम कर रही हैं।


नैना ने एचसीएफआई की विभिन्न गतिविधियों को रेखांकित किया और बताया कि इसने लोगों को कैसे प्रभावित किया है।


वह कहती हैं, “हम COVID-19 परामर्श की आवश्यकता वाले किसी भी व्यक्ति के लिए एक निःशुल्क ओपीडी चला रहे हैं। झारखंड या पटना में बैठा कोई भी व्यक्ति इस तक पहुंच सकता है। मेरे पिता का पूरा दर्शन महामारी के डर को खत्म करना था। उन्होंने लागत प्रभावी उपचार विधियों पर भी सलाह दी।"

1500 से अधिक लोगों की जिंदगियां बचाने वाले यूपी पुलिस के कांस्टेबल आशीष कुमार मिश्रा

कांस्टेबल आशीष मिश्रा कहते हैं, "मेरे द्वारा चलाई जा रही मुहिम 'पुलिस मित्र' एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ पुलिस और पब्लिक दोनों एक साथ मिलकर लोगों की जान की रक्षा करते हैं।"

रक्तदान के लिये 'पुलिस मित्र' मुहिम की शुरूआत करने वाले यूपी पुलिस के कांस्टेबल आशीष कुमार मिश्रा (फोटो साभार: आशीष कुमार मिश्रा)

रक्तदान के लिये 'पुलिस मित्र' मुहिम की शुरूआत करने वाले यूपी पुलिस के कांस्टेबल आशीष कुमार मिश्रा (फोटो साभार: आशीष कुमार मिश्रा)

यूपी पुलिस के कांस्टेबल आशीष कुमार मिश्रा द्वारा ब्लड डोनेशन के लिये चलाई जा रही मुहिम 'पुलिस मित्र' की अब देशभर में सराहना हो रही है। वे 'पुलिस मित्र' के जरिये रक्तदान से अब तक 1500 से अधिक लोगों की जिंदगियां बचाने में कामयाब रहे हैं। आशीष मिश्रा वर्तमान में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महानिरीक्षक कार्यालय (आईजी ऑफिस) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


कांस्टेबल आशीष मिश्रा ने कहा, “जब एक जवान पर जनता का भरोसा होता है तो यह सबसे संतोषजनक बात होती है।”


इस मुहिम की शुरूआत करने के पीछे उनका उद्देश्य है जरूरतमंदों को समय पर रक्त उपलब्ध करवाना। उनकी इस नेक पहल के साथ राज्य के पुलिस विभाग के आला अधिकारी जुड़े हुए हैं और समय-समय पर रक्तदान भी करते हैं।


आशीष मिश्रा ने रक्तदान के लिये 'पुलिस मित्र' नाम से एक पहल शुरू की। हालांकि शुरू में यह जरूरतमंद लोगों के साथ संभावित रक्तदाताओं को जोड़ने के लिए एक छोटे से व्हाट्सएप ग्रुप के रूप में शुरू हुई। लेकिन, आज, पुलिस मित्र के पास यूपी के आठ क्षेत्रों में 1000 से अधिक सदस्य हैं - और समय-समय पर रक्तदान के माध्यम से 1500 से अधिक लोगों की जान बचाई है।

200 से अधिक बेघरों के लिए घर बनाने वाली केरल की ये रिटायर्ड प्रोफेसर

60 वर्षीय एमएस सुनील ज़ूलॉजी प्रोफेसर रह चुकी हैं। केरल के पथनमथिट्टा की रहने वाली एमएस सुनील गरीबों के उत्थान को लेकर अपने लगातार काम के जरिये अब क्षेत्र में गरीब तबके लिए एक आशा की किरण बन चुकी हैं।

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एमएस सुनील जिस विश्वविद्यालय में पढ़ाती थीं वहाँ उनका एक छात्र तब तंगहाली के चलते एक जर्जर घर में रह रहा था, जो उस छात्र के लिए काफी खतरनाक भी साबित हो सकता था। इसी दौरान एमएस सुनील ने एक पहल के जरिये करीब 60 हज़ार रुपये इकट्ठे करते हुए अपने उस छात्र के लिए घर के निर्माण का सराहनीय काम किया। बस यहीं से एमएस सुनील के मन में इस पहल को और बड़े स्तर पर आगे ले जाने का विचार आया।


करीब बीते 15 सालों में एमएस सुनील ने राज्य के पाँच जिलों में अब तक 200 से अधिक घरों के निर्माण में मदद की है, जिन्हे बाद में गरीब तबके के जरूरतमन्द लोगों को सौंप दिया गया है। एमएस सुनील के अनुसार इन घरों के निर्माण के लिए तमाम धनी लोग अपनी इच्छानुसार दान देते रहते हैं जिसके चलते इन जरूरतमंद लोगों के लिए घरों का निर्माण लगातार जारी रहता है।


एमएस सुनील आज शिक्षा को लेकर भी तमाम प्रयास कर रही हैं।


आज लोग एमएस सुनील को गरीबों के लिए काम करने वाले मसीहा की तरह पहचानते हैं। अपने इन सराहनीय प्रयासों के लिए उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के हाथों नारी शक्ति पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

250 करोड़ रुपये के प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करता है इस आंत्रप्रेन्योर का ऑर्गेनिक ब्रांड

2017 में स्थापित, Naturevibe Botanicals ने अमेरिका और यूरोप से अपना व्यवसाय संचालन शुरू किया और फिर 2019 में भारतीय बाजार में प्रवेश किया। महामारी के दौरान, कंपनी ने हेल्थ फूड की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए D2C मार्ग अपनाया।

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मुंबई के रहने वाले ऋषभ चोखानी का पारिवारिक व्यवसाय फार्मास्यूटिकल्स में था। इससे ऋषभ के लिए वेलनेस और उससे संबंधित उद्योगों का अध्ययन करना आसान हो गया। उन्होंने ऑर्गेनिक फूड इंडस्ट्री में एक बड़ा अवसर महसूस किया, और उसी तर्ज पर अपना व्यवसाय स्थापित करने का फैसला किया।


YourStory से बातचीत में वे कहते हैं, “भारत में, उस समय, जैविक उत्पादों का बाजार बढ़ रहा था, लेकिन अमेरिका में, इसका पहले से ही बहुत बड़ा क्रेज था। हालांकि किसी भी प्रोडक्ट में इस्तेमाल किए जाने वाले अधिकांश प्राकृतिक अवयवों की जड़ें भारत में हैं, लेकिन विदेशी बाजार में बहुत कम भारतीय आपूर्तिकर्ता थे। यही वह स्थान है जिसमें मैं टैप करना चाहता था।"


जब उन्होंने ब्रांड लॉन्च किया, तो ऋषभ ने अमेरिकी बाजार को सप्लाई करना शुरू किया, और जल्द ही यूरोप में इसका विस्तार किया। इन विदेशी बाजारों में काम करने और उद्योग की जानकारी हासिल करने के बाद, ऋषभ ने 2019 में भारतीय बाजार में कदम रखा।


आज, ऋषभ का दावा है, कंपनी 250 करोड़ रुपये के भारतीय वनस्पति (Indian botanicals) का निर्यात कर रही है, और वित्त वर्ष 20-21 में 140 करोड़ रुपये का कारोबार किया है, जिसमें वैश्विक ग्राहक प्रतिधारण दर 40 प्रतिशत है।

एक्स्ट्रा करिकुलर एजुकेशन में आगे बढ़ रहा बेंगलुरू का एडटेक स्टार्टअप Spark Studio

Spark Studio का उद्देश्य छात्रों के रचनात्मक कौशल को सुधारने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए गैर-शैक्षणिक शिक्षण में क्वालिटी कोर्स प्रदान करना है।

(L-R): कौस्तुभ खाड़े, नमिता गोयल, अनुश्री गोयनका

(L-R): कौस्तुभ खाड़े, नमिता गोयल, अनुश्री गोयनका

बेंगलुरू स्थित स्टार्टअप Spark Studio को एक्स्ट्रा करिकुलर एजुकेशन के बंटे हुए बाजार से निपटने के लिए शुरू किया गया था। यह स्विगी में बिजनेस स्ट्रेटजी के पूर्व असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट अनुश्री गोयनका के दिमाग की उपज है, जो मानती हैं कि गैर-शैक्षणिक हितों को पाने की कोशिश करने से स्थायी प्रभाव पैदा किया जा सकता है।


वह YourStory को बताती हैं, "महामारी ने बाधाओं को तोड़ा और दिखाया कि बच्चे ऑनलाइन सीखने और टेक्नोलॉजी से निपटने में सक्षम हैं। हालांकि स्पोर्ट्स जैसी कुछ चीजें हैं जो ऑनलाइन स्थानांतरित नहीं हो सकती हैं, लेकिन अन्य एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज हैं जो अधिक संज्ञानात्मक हैं, ऑनलाइन माध्यम से बहुत प्रभावी हैं।"


दरअसल, उनका मानना है कि इन स्किल्स और रुचियों को प्रोत्‍साहित करना से प्रोडक्ट डिजाइनिंग और विज्ञापन जैसी विभिन्न रचनात्मक पेशेवर भूमिकाओं को आकार देने में एक लंबा रास्ता तय किया जा सकता है। छह से 15 वर्ष की आयु के बच्चों को टारगेट करते हुए, यह स्टार्टअप म्यूजिक, स्पीच और डिबेट, और विजुअल आर्ट जैसी तीन कैटेगरीज में कोर्स ऑफर करता है।