वीकली रिकैप: पढ़ें इस हफ्ते की टॉप स्टोरीज़!

यहाँ आप इस हफ्ते प्रकाशित हुई कुछ बेहतरीन स्टोरीज़ को संक्षेप में पढ़ सकते हैं।

इस हफ्ते हमने कई प्रेरक और रोचक कहानियाँ प्रकाशित की हैं, उनमें से कुछ को हम यहाँ आपके सामने संक्षेप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिनके साथ दिये गए लिंक पर क्लिक कर आप उन्हें विस्तार से भी पढ़ सकते हैं।

कर्नाटक सरकार में चिकित्सा शिक्षा मंत्री के. सुधाकर का इंटरव्यू

YourStory से बात करते हुए, कर्नाटक के चिकित्सा शिक्षा मंत्री के. सुधाकर ने राज्य में अर्थव्यवस्था, आपातकालीन स्वास्थ्य देखभाल, ऑक्सीजन और जीवन रक्षक दवाओं को खोलने के लिए राज्य की योजना की रूपरेखा तैयार की है।

कर्नाटक सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री के. सुधाकर

कर्नाटक सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री के. सुधाकर

कर्नाटक हमेशा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में आगे रहा है। राज्य पहले दिन से ही कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में स्मार्ट टेक सॉल्यूशंस का लाभ उठा रहा है। कंट्रोल रूम्स, हेल्पलाइन से लेकर बेड की उपलब्धता तक, टेक्नोलॉजी ने महामारी के खिलाफ राज्य के अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


YourStory के साथ एक इंटरव्यू में, कर्नाटक सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री के. सुधाकर ने बताया कि राज्य में COVID-19 की संख्या पर अंकुश लगाते हुए राज्य कैसे अर्थव्यवस्था को खोलने की योजना बना रहा है।


उन्होंने अर्थव्यवस्था को सामान्य स्थिति में लाने के लिए लॉकडाउन के प्रतिबंधों में ढील देने, ऑक्सीजन, रेमेरेमडेसिविर के आवंटन को लेकर भी खुलकर बात की।


उन्होंने बताया, "हमने महामारी प्रबंधन के हर पहलू को सुविधाजनक बनाने और दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई ऐप और पोर्टल डेवलप किए हैं।" 

इंडियन आर्मी की 'सुपर 30' कोचिंग

भारतीय सेना कश्मीर के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से ‘सुपर 30’ कोचिंग संचालित कर रही है।

भारतीय सेना कश्मीर के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से ‘सुपर 30’ कोचिंग संचालित कर रही है।

भारतीय सेना कश्मीर के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से ‘सुपर 30’ कोचिंग संचालित कर रही है।

भारतीय सेना कश्मीर के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से ‘सुपर 30’ कोचिंग संचालित कर रही है। इस ‘सुपर 30’ प्रोग्राम के जरिये गरीब और जरूरतमंद छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है।


भारतीय सेना की ‘सुपर 30’ कोचिंग में दाखिला लेने के लिए छात्र का 12वीं की परीक्षा में कम से कम 60 प्रतिशत अंकों के साथ पास होना अनिवार्य है, जबकि छात्र के माता-पिता की सालाना आय 3.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। इन दोनों शर्तों को पूरा करने वाले छात्र को ‘सुपर 30’ की प्रवेश परीक्षा में भाग लेने का मौका दिया जाता है।


अब ‘सुपर 30’ प्रोग्राम का हिस्सा बनने के लिए छात्र का प्रवेश परीक्षा को पास करना अनिवार्य है। गौरतलब हैं कि इस प्रोग्राम के लिए चयनित होने वाले छात्रों के लिए भारतीय सेना इस प्रोग्राम के दौरान रहने-खाने की भी व्यवस्था करती है। कश्मीरी युवाओं के बेहतर भविष्य को लेकर जारी इस कोशिश में सेना की मदद कानपुर आधारित एक एनजीओ भी कर रहा है।


यह प्रोग्राम 12 महीने का कोर्स है, जहां ये युवा रोजाना छह घंटे के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री, जूलॉजी और बॉटनी जैसे विषयों की पढ़ाई करते हैं।


सेना और कश्मीर के मेधावी युवाओं की मेहनत का नतीजा है कि सुपर 30 प्रोग्राम लगातार सफलता की कहानी लिख रहा है। घाटी में आतंकी गतिविधिओं पर लगाम लगाने के साथ ही सेना द्वारा कश्मीरी युवाओं के भविष्य को उज्जवल बनाने की यह कोशिश वाकई तारीफ के काबिल है।

कॉमेडियन सलोनी गौर का इंटरव्यू

YourStory के साथ खुलकर की गई बातचीत में, यूट्यूबर, कॉमेडियन, कंटेंट क्रिएटर, और इनफ्लुएंसर सलोनी गौर ने हमें बताया कि वह पिछले एक साल से क्या कर रही हैं और क्यों उनका उद्देश्य लगातार ऐसा कंटेंट देने का है जिससे लोग जुड़ा हुआ महसूस करें।

एक साल में, सलोनी के फॉलोअर्स की संख्या ट्विटर पर 282,000 और इंस्टाग्राम पर 550,000 से अधिक हो गई है।

एक साल में, सलोनी के फॉलोअर्स की संख्या ट्विटर पर 282,000 और इंस्टाग्राम पर 550,000 से अधिक हो गई है।

अगर कोई एक ऐसी कॉमेडियन है जो हमें लगातार बिना रुके हंसाती रहती है, तो वह है सलोनी गौर उर्फ कंगना रनौत, नज्मा आपी, डीयू वाली दीदी, आदर्श बहू और ऐसे ढेरों किरदार जो अब हमारी रोजमर्रा की हंसी मजाक का डोज बन गए हैं। 


एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो कॉमेडी के लिहाज से "राजनीति" में रहना चाहती हैं, सलोनी हमारे नेताओं को भी नहीं बख्शती। वह YourStory के साथ बातचीत में बताती हैं, “वे हमेशा मेरे वीडियो के लिए आधार प्रदान करते हैं। मुझे तो बस पंच लाइन ढूंढ़नी होती है।"


एक साल में, सलोनी के फॉलोअर्स की संख्या ट्विटर पर 282,000 और इंस्टाग्राम पर 550,000 से अधिक हो गई है। इस 22 साल की कॉमिक के लिए एक अविश्वसनीय उपलब्धि उनका कैरेक्टर नजमा आपी रहा है, जो एक मोटे पश्चिमी यूपी के लहजे के साथ वर्तमान और हाल फिलहाल में चल रही हर चीज को लेकर आगे बढ़ता है। 


COVID-19 के दौरान, विशेष रूप से दूसरी लहर के दौरान, सलोनी दूसरों की मदद के उनके रिक्वेस्ट को आगे बढ़ा रही हैं। वह कहती हैं कि इनफ्लुएंसर, अपने बड़े फॉलोअर बेस के साथ, अंतर पैदा कर सकते हैं।


वह कहती हैं, "मैं सिर्फ लोगों की रिक्वेस्ट को ट्वीट करती हूं। इसके अलावा, मदद करने के लिए मेरे पास कुछ कॉन्टैक्ट्स हैं। कॉल करना आसान है। और, अगर हम ऐसा भी नहीं कर सकते हैं, तो यह शर्म की बात है।"

बच्चों को टीका लगाने के लिए अपनी डेढ़ साल की बेटी के साथ नदी पार करने वाली झारखंड की नर्स

झारखंड की मंती कुमारी अपनी 1.5 साल की बेटी को पीठ पर बिठाकर छोटे बच्चों का टीकाकरण कराने के लिए हर दिन लगभग 35 किलोमीटर की यात्रा करती हैं, नदियों और कठिन इलाकों को पार करती है।

मंती कुमारी का कहना है कि वह एक साल से अधिक समय से इस दिनचर्या का पालन कर रही हैं।

मंती कुमारी का कहना है कि वह एक साल से अधिक समय से इस दिनचर्या का पालन कर रही हैं।

COVID-19 महामारी ने हमारे जीवन को उल्टा कर दिया है। जहां हम में से कुछ घर से काम करने और घर के कामों को संभालने की चुनौतियों से निपट रहे हैं, वहीं कई अन्य लोगों की नौकरी चली गई है। लेकिन झारखंड में एक संविदा सहायक नर्स दाई, मंती कुमारी के लिए, यह पूरी तरह से एक अलग ही तरह का मामला रहा है।


झारखंड में लातेहार के महुआदानर ब्लॉक में छोटे बच्चों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम आयोजित करने की जिम्मेदारी को देखते हुए, उन्हें न केवल 35 किलोमीटर की यात्रा करनी है, कठिन इलाकों को पार करना है और आठ गांवों को कवर करना है, बल्कि उन्हें अपने कंधे पर डेढ़ साल की बेटी और उपकरण का डिब्बा भी साथ लेकर चलना पड़ता है, जो कि आसान बात नहीं है।


मंती का कहना है कि वह एक साल से अधिक समय से इस दिनचर्या का पालन कर रही हैं।


मंती ने बताया, "चूंकि कुछ गांव जिन्हें मैं कवर करना चाहती हूं, वे बहुत दूर स्थित हैं, नदियों के रास्ते में, इसे पार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हालाँकि ये नदियाँ बहुत गहरी नहीं हैं, फिर भी बरसात के मौसम में धारा के साथ बह जाने की संभावना हमेशा बनी रहती है। कभी-कभी जब पानी का स्तर बढ़ जाता है तो मुझे उस गांव को तब तक छोड़ना पड़ता है जब तक कि पानी कम न हो जाए।"

Google की पूर्व एंप्लाई का कंटेंट मोनेटाइजेशन स्टार्टअप

कविता शेनॉय ने 2014 में आनंद गोपाल, अनिल करात और जितिन जॉर्ज के साथ मिलकर Voiro की स्थापना की थी। रेवेन्यू मैनेजमेंट स्टार्टअप कंटेंट मोनेटाइजेशन के सेक्टर में काम करता है।

कविता शेनॉय, Voiro की को-फाउंडर

कविता शेनॉय, Voiro की को-फाउंडर

बेंगलुरु स्थित यह स्टार्टअप कंटेंट कंपनियों को हाई क्वालिटी वर्क देने में सक्षम बनाता है और उन्हें "सही परिप्रेक्ष्य के महत्व" को समझने में मदद भी करता है। आज बाजार में तेजी से बढ़ते ओटीटी और वीडियो प्लेटफॉर्म के साथ, कई कंटेंट प्लेटफॉर्म को यह समझने की जरूरत है कि रेवेन्यू कैसे उत्पन्न किया जा सकता है।


कविता शेनॉय ने विज्ञापन यानी एडवर्टाइजमेंट की दुनिया में कदम रखने से पहले - एक मिस्ट्री शॉपर, एक प्रोस्थेटिक मेकअप आर्टिस्ट और एक वीडियो एडिटर के रूप में भी काम किया था। हालांकि इन सबके केंद्र में जो एक बात थी वह मीडिया के प्रति उनका जुनून था।


कविता YourStory को बताती है,"पूरी टीम और फर्म को अपने पैरों पर खड़ा करने वाले इस जुनून से अनजान होने से लेकर यहां तक पहुंचने तक, एक उद्यमी के रूप में मेरे लिए यह एक अविश्वसनीय अनुभव रहा है।"


कविता का कहना है कि वोइरो को इंटरनेट पर कंटेंट सैंपलिंग में पहले से ही एडवांटेज था। वह कहती हैं, "जब हमने इस कंपनी की शुरुआत की, तो हमने कंटेंट प्रोड्यूसर्स के पेन प्वाइंट को समझने और पर्दे के पीछे क्या चल रहा है, इसकी गहरी समझ हासिल करने के लिए कंटेंट प्रोड्यूस करना शुरू किया।"


वोइरो पब्लिशर्स और ओटीटी स्पेस में प्रोसेस और विभिन्न बुनियादी ढांचे को स्वचालित करता है और कंपनियों को इंडस्ट्री में अग्रणी ओटीटी प्लेयर्स में फैले डोमेन विशेषज्ञता के साथ, हमेशा बदलते कंटेंट की दुनिया के लिए तैयार होने में मदद करता है।


कविता कहती हैं, "हमारे सभी समाधान कंपनियों और पब्लिशर्स को कंपनी के लक्ष्यों के अनुरूप हाई क्वालिटी वर्क प्रदान करने में सक्षम बनाते हैं, और हमेशा की तरह, RoI वह मंत्र है जिस पर हर व्यवसाय का निर्माण होता है।"