वीकली रिकैप: पढ़ें इस हफ्ते की टॉप स्टोरीज़!

By रविकांत पारीक
December 05, 2021, Updated on : Sun Dec 05 2021 06:08:30 GMT+0000
वीकली रिकैप: पढ़ें इस हफ्ते की टॉप स्टोरीज़!
यहाँ आप इस हफ्ते प्रकाशित हुई कुछ बेहतरीन स्टोरीज़ को संक्षेप में पढ़ सकते हैं।
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इस हफ्ते हमने कई प्रेरक और रोचक कहानियाँ प्रकाशित की हैं, उनमें से कुछ को हम यहाँ आपके सामने संक्षेप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिनके साथ दिये गए लिंक पर क्लिक कर आप उन्हें विस्तार से भी पढ़ सकते हैं।

पिता से पैसे लेकर बहनों ने खड़ी कर दी 121 करोड़ रुपये के रेवेन्यू वाली कंपनी

मुंबई स्थित पेटिसरी Theobroma का लक्ष्य आने वाले वर्ष में अपने 121 करोड़ रुपये के रेवेन्यू को दोगुना करना है। यहाँ हम आपको बता रहे हैं कि 2004 में लॉन्च होने के बाद से ब्रांड कैसे विकसित हुआ है।

Theobroma

Theobroma की फाउंडर्स

कैनाज़ मेसमान हरचंद्राई ने 2004 में अपनी बहन टीना मेसमैन वायक्स के साथ, Theobromaकी स्थापना की, एक ऐसा ब्रांड जिसने अब एक तरह का पंथ का दर्जा हासिल कर लिया है।


2004 में इसकी शुरुआत के बाद से बहनों ने अपने पिता से 1 करोड़ रुपये की पूंजी उधार ली थी, इस बीच Theobroma ने खुद को एक प्रमुख खाद्य और पेय गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। अब मुंबई, दिल्ली, एनसीआर, हैदराबाद और पुणे में इसके 78 आउटलेट हो गए हैं।


Theobroma ने वित्त वर्ष 2011 में 121 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया और इस साल इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।

कैनाज़ कहती हैं, "मेरे पिता की एक शर्त थी कि हम पैसे वापस न करें, लेकिन इसे एक ऐसे उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करें जिस पर उन्होंने विश्वास किया और समर्थन किया।"


कैनाज़ कहती हैं, “हम इस यात्रा पर निकल पड़े, केवल वही बनाने के लिए सहमत हुए जो हमें खुद खाना पसंद था। हमने इसे अच्छी तरह से बनाने और इसे सरल रखने का वादा किया था। हमारा व्यवसाय विकसित हुआ है, हालांकि हमने इसकी मैपिंग नहीं की थी।”


शुरुआती दिनों को याद करते हुए कैनाज़ कहती हैं कि पेस्ट्री कैसे बनाई जाती थी और उन्हें वास्तव में कैसे खाया जाना चाहिए, इस बारे में बहुत कम समझ थी। वह बताती हैं कि जो चीज उन्हें आगे बढ़ाती रही वह थी उत्पादों के लिए उनका प्यार और भारतीय बाजार में सही उत्पाद लाना।

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी छोड़ उगाने लगे ऑर्गेनिक सब्जियाँ

तिरुपति के निवासी संदीप कन्नन सब्जियाँ उगाने के लिए जिस हाइड्रोपोनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं उसमें मिट्टी की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

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एक ओर जहां स्नातक की पढ़ाई खत्म करने के बाद संदीप के अन्य दोस्त सरकारी नौकरी की तलाश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की तरह रुख कर रहे थे तभी संदीप ने तय कर लिया था कि वे अपने भविष्य के लिए कुछ अलग और नया करेंगे। आज संदीप हाइड्रोपोनिक तकनीक के जरिये से खेती के जरिये ऑर्गेनिक सब्जियाँ उगा कर लाखों की कमाई भी कर रहे हैं।


संदीप ने अपनी स्नातक की पढ़ाई साल 2020 में पूरी की थी और इसके बाद वे भी सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी करने जा रहे थे, हालांकि तभी संदीप ने अपनी कृषि पृष्ठभूमि से जुड़ते हुए कुछ अलग करने की ठानी और इस दिशा में कदम आगे बढ़ा दिये।


कोरोना काल के दौरान घर पर बैठे हुए संदीप ने पॉली-हाउस कृषि के बारे में अध्ययन करना शुरू किया और तभी उन्हें हाइड्रोपोनिक तकनीक के बारे में पता चला। संदीप को समझ आया कि इस तकनीक का इस्तेमाल अभी उनके क्षेत्र में कम हो रहा है जबकि ऑर्गेनिक सब्जियाँ उगाने वाले किसानों के लिए यह काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।


खेती के पारंपरिक तरीकों में जहां रसायन-युक्त कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है वहीं इस तकनीक में पानी के जरिये ही पौधों तक जरूरी पोशक तत्व पहुंचाए जाते हैं। संदीप ने सबसे पहले अपने घर की छत पर इस तकनीक के जरिये कम मात्रा में पत्तेदार सब्जियाँ उगानी शुरू कीं, हालांकि इस दौरान संदीप इसे बड़े स्तर पर भी आजमाना चाहते थे।


आज अपने फार्म के जरिये संदीप तरह-तरह की हरी ऑर्गेनिक सब्जियाँ उगा रहे हैं जिसमें लेट्युस, पालक और ब्रोकली आदि शामिल हैं।

हालांकि इसके बाज़ार को लेकर शुरुआत में संदीप के मन में थोड़ी सी चिंता थी लेकिन उन्होंने जल्द ही सुपर मार्केट आदि में अपने फार्म की सब्जियों की सप्लाई शुरू कर दी और आज संदीप हर महीने करीब 50 हज़ार से अधिक की सब्जियाँ बेच पा रहे हैं। इसी के साथ संदीप का अनुमान है कि आने वाले कुछ महीनों में ही उनकी सब्जियों का निर्यात हर महीने 2 लाख रुपये तक पहुँच जाएगा।

स्टोरीटेलिंग से एडटेक स्टार्टअप तक: अनुराधा वेंकटचलम की कहानी

चेन्नई में स्थित, एडटेक स्टार्टअप Learner Circle बच्चों को तीन महीने के लिए 699 रुपये से 12,000 रुपये तक के लाइव, स्किल-बेस्ड लर्निंग कोर्स प्रदान करता है।

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1 मई, 2020 को, अनुराधा वेंकटचलम ने तीन बच्चों की कहानियों को चुना था - We are going on a bear huntPickle Mania, और Stick Man - और COVID-19 के बीच जूम कॉल पर 23 बच्चों के साथ एक संवादात्मक कहानी सत्र का आयोजन किया। जबकि बच्चे अपना अधिकांश समय ऑनलाइन बिता रहे थे, 40 वर्षीय अनुराधा यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि इसका अर्थपूर्ण उपयोग किया जाए - और इसे अच्छी-पुरानी कहानी कहने से बेहतर तरीका क्या हो सकता है। आखिरकार, कहानी सुनाना अनुराधा की विशेषता थी, सिंगापुर में Society of Children's Books Writers and Illustrators (SCBWI) के हिस्से के रूप में एक सक्रिय कहानीकार रही, और कुछ बच्चों की किताबें खुद लिखीं।


विभिन्न कौशल और पाठ्येतर गतिविधियों पर कई सत्रों के बाद, पहल ने सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ आकर्षित कीं, और बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण समय सुनिश्चित करने की खोज के रूप में शुरू हुई अनुराधा ने उद्यमिता की ओर अग्रसर किया। अपने पति शंकर गोमथिनायगम और सहयोगी अरुण के नायर के साथ, उन्होंने चेन्नई स्थित Learner Circleकी सह-स्थापना की।


वह YourStory से बात करते हुए कहती है, “डॉक्टर, नर्स, शिक्षक और हर कोई अपना काम कर रहा था जब दुनिया एक घातक वायरस का सामना कर रही थी। हम डिजिटल मार्केटिंग पेशेवरों के रूप में अपने कौशल और जुनून का लाभ उठाना चाहते हैं ताकि छात्रों को विशेषज्ञों और हमारे योग और फिटनेस प्रशिक्षकों जैसे अन्य लोगों को संभावित ग्राहकों से जोड़ा जा सके।”


प्रारंभ में, अनुराधा ने एक मामूली शुल्क लगाया था ताकि लोग कहानी कहने और कार्यशालाओं को महत्व दें। अब 70 से अधिक शिक्षकों के साथ, स्टार्टअप भरतनाट्यम, ड्राइंग, वैदिक गणित, लेखन, संगीत वाद्ययंत्र और भाषाओं पर भी कौशल-आधारित और लाइव कक्षाओं की एक विस्तृत सीरीज़ प्रदान करता है।

फोर्ब्स की खास सूची में जगह बनाने वाली मतिल्दा कुल्लू

फोर्ब्स इंडिया ने हाल ही में साल 2021 के लिए वुमेन पावर लिस्ट जारी की है जिसमें उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले की आशा वर्कर मतिल्दा को जगह मिली है।

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उस दिन भी 45 वर्षीय आशा वर्कर मतिल्दा कुल्लू अपनी रोज़ की ड्यूटी में ही व्यस्त थीं और उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थीं कि उनके नाम को प्रतिष्ठित मैगजीन फोर्ब्स ने अपनी एक खास सूची में जगह दी है। फोर्ब्स इंडिया ने हाल ही में साल 2021 के लिए वुमेन पावर लिस्ट जारी की है जिसमें उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले की आशा वर्कर मतिल्दा को जगह मिली है।


2005 से सुंदरगढ़ जिले के बड़गांव ब्लॉक के तहत गर्गडबहल और आसपास के गांवों के लिए एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता और परामर्शदाता की भूमिका निभाते हुए मतिल्दा कोरोना महामारी के कठिन समय के दौरान लोगों की जान बचाने के लिए लगातार सेवारत रही हैं।


एक आशा कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए मतिल्दा ने गर्गड़बहल गांव के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस स्थानीय नायक को अब उनके उल्लेखनीय काम के लिए के लिए देश ही नहीं विदेश में भी प्रशंसा मिल रही है।


फोर्ब्स इंडिया वीमेन पावर 2021 की सूची में उन्हें तीसरे स्थान पर सूचीबद्ध करते हुए फोर्ब्स ने लिखा कि कि ‘इस आशा कार्यकर्ता ने बड़ागांव तहसील में 964 लोगों की देखभाल के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। मतिल्दा गांव की कोविड योद्धा हैं। मालूम हो कि मतिल्दा को बतौर आशा वर्कर काम करते हुए हर महीने 4,500 रुपये की तंख्वाह मिलती है, हालांकि इस कम तंख्वाह के बावजूद स्वास्थ्य क्षेत्र में उन्होंने अथाह काम किया है।


मतिल्दा के समर्पण और उनकी इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उन्हें ट्वीट कर बधाई देते हुए लिखा, “मैं सुंदरगढ़ जिले की बड़गांव तहसील की आशा कार्यकर्ता मटिल्डा कुल्लू को फोर्ब्स इंडिया डब्ल्यू-पावर 2021 सूची में नामित होने पर बधाई देता हूं। वे हजारों समर्पित कोविड योद्धाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं जो कीमती जीवन को बचाने के लिए सबसे आगे खड़े हैं।”

क्षेत्रीय भाषाओं में कोडिंग सीखने में मदद कर रहा है यह स्टार्टअप

2015 में शुरू हुए Tinkerly ने अब तक पूरे भारत, मध्य पूर्व और उत्तरी अमेरिका में डेढ़ लाख से अधिक छात्रों को पढ़ाया है और अब इस साल तेजी से विस्तार करने की योजना बना रहा है।

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जयपुर स्थित Tinkerlyअब छोटे शहरों के छात्रों को उनकी पसंदीदा भाषा में ऑनलाइन कोडिंग पाठ्यक्रम प्रदान करके इस समस्या को हल करने के लिए तैयार है। इससे पहले यह स्टार्टअप बच्चों को बेहतर तकनीक सीखने में मदद करने के लिए काम कर रहा था।


Tinkerly के को-फाउंडर और सीईओ शरद बंसल बताते हैं, "बात यह है कि वर्तमान में बाजार में सभी कोडिंग कोर्स केवल अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध हैं।"


जयपुर स्थित स्टार्टअप की शुरुआत 2015 में IIT-दिल्ली और XLRI के पूर्व छात्र शरद बंसल, ओपी गोदारा, कपिल आर्य और विवेक पाठक ने की थी, जो स्कूल को प्रायोगिक शिक्षा के लिए पोर्टेबल सबजेक्ट-लर्निंग मॉडल प्रदान करते थे।


यह धीरे-धीरे Tinkerly नामक अपनी खुद की इनोवेशन लैब में चला गया, जहां इसने एआई, रोबोटिक्स और फिजिकल किट के साथ कोडिंग सिखाना शुरू किया और अब यह महामारी के दौरान शुरू की गई अपनी बी2सी ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से गैर-अंग्रेजी भाषी छात्रों तक अपनी पहुंच का विस्तार कर रहा है।


शरद का कहना है कि यह उन्नत एआई-संचालित ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद तकनीक के साथ गुजराती और विदेशी भाषाओं के साथ ही अधिक भारतीय भाषाओं को जोड़ रहा है। 28 लोगों की टीम के साथ कंपनी का लक्ष्य दुनिया भर में बच्चों को स्थानीय भाषा में शिक्षा प्रदान करना है।


अब तक Tinkerly ने पूरे भारत, मध्य पूर्व और उत्तरी अमेरिका में 150,000 से अधिक छात्रों को पढ़ाया है, और इस वर्ष तेजी से विस्तार करना चाहता है।