गोल्डमैन सैक्स की नौकरी छोड़ इडली क्यों बेंचने लगा यह इंवेस्टमेंट बैंकर

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दुनिया की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित इन्वेस्टमेंट फर्म गोल्डमैन सैक्स में नौकरी पाना हर इंवेस्टमेंट बैंकर का सपना होता है और अगर आपसे कोई कहे कि महज इडली बेचने के लिए एक शख्स ने गोल्डमैन सैक्स में अपनी नौकरी छोड़ दी, तो आपको भी आश्चर्य होगा। हालांकि ठीक ऐसा ही हुआ है और बेंगलुरु के एक शख्स ने इडली बेचने के खातिर अपनी इस शानदार नौकरी को छोड़ दिया था।

ये शख्स हैं 29 वर्षीय कृष्णन महादेवन जिन्होने ‘अय्यर इडली’ में फुल टाइम काम करने के लिए अपनी इनवेस्टमेंट बैंकर की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था और आज बेंगलुरु के विज्ञान नगर में अपना इडली का बिजनेस संचालित कर रहे हैं।

इडली नर्म रहे इसका पूरा ख्याल रखा जाता है और ठंड के मौसम में इडली की फ़र्मेंटेशन प्रोसेस में आठ से दस घंटे लगते हैं, जबकि गर्मी के दिनों में यह समय लगभग आधा हो जाता है।

महामारी के बीच छोड़ी नौकरी

अय्यर इडली नाम से इडली का यह बिजनेस दरअसल उनके पिता महादेवन ने साल 2001 में स्थापित किया था और देश की आईटी कैपिटल कहलाए जाने वाले बेंगलुरु शहर में तब से यह इडली की दुकान का संचालन हो रहा है। कृष्णन काफी समय से गोल्डमैन सैक्स में काम कर रहे थे, लेकिन साथ ही पिता के देहांत के बाद वे अपने इस इडली के व्यवसाय में अपनी माँ की भी मदद कर रहे थे।

मीडिया से बात करते हुए कृष्णन ने बताया है कि वे दिन में 15-16 घंटे काम कर रहे थे, इसी के साथ वे अपनी इस दुकान पर भी चार घंटे का समय देते थे और यह उनके लिए काफी परेशानी भरा था। इसी लिए कोरोना महामारी के बीच उन्होंने पारिवारिक व्यवसाय को संभालने के लिए साल 2020 में नौकरी छोड़ने का फैसला किया और तब से उन्होने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

माँ को मनाने में लगे दो साल

साल 2009 में जब कृष्णन के पिता महादेवन का निधन हुआ तो दुकान चलाने की जिम्मेदारी उन पर और उनकी मां उमा पर आ गई थी। उन्होने मीडिया को बताया है कि वे सुबह दुकान पर काम करते थे और फिर कॉलेज जाते थे।

कृष्णन के लिए यह तब भी जारी रहा जब उन्होंने नौकरी कर ली। वे एक साल के लिए एक सहायक प्रोफेसर के तौर पर में पढ़ा रहे थे और फिर टाइम इंक में उनकी नौकरी लग गई। उसके बाद उन्होने चार साल तक गोल्डमैन सैक्स में काम किया। काम के भारी बोझ को देखते हुए उन्होने इस्तीफा देने का फैसला किया क्योंकि उन्हें यह एहसास हो गया था कि एक समय पर दो काम करना शारीरिक और मानसिक तौर पर काफी परेशानी भरा हो सकता है।

कृष्णन के अनुसार उन्हें अपनी माँ को कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ इडली बेचने के लिए मनाने में लगभग दो साल लग गए। आज अपनी इडली में वे क्वालिटी का पूरा ख्याल रखते हैं, ताकि उनके ग्राहकों को हमेशा नरम और स्वादिष्ट इडली मिल सकें।

आगे बढ़ा रहे हैं पिता की विरासत

इडली नर्म रहे इसका पूरा ख्याल रखा जाता है और ठंड के मौसम में इडली की फ़र्मेंटेशन प्रोसेस में आठ से दस घंटे लगते हैं, जबकि गर्मी के दिनों में यह समय लगभग आधा हो जाता है। बैटर तैयार करने के लिए कृष्णन हर हफ्ते लगभग 250 किलो चावल और 120 किलो उड़द दाल का इस्तेमाल करते हैं।

समय बीतने के साथ ही कृष्णन ने धीरे-धीरे अपनी माँ को आराम दिया और सारे कामकाज का जिम्मा अपने ऊपर ले लिया। अब वे और उनकी सात की लोगों की टीम उनके पिता द्वारा स्थापित की गई इस विरासत को आगे ले जाना जारी रखे हुए है।

आलम यह है कि दुकान खुली होने के समय हर वक़्त ग्राहकों की लंबी कतार स्वादिष्ट इडली खाने के लिए खड़ी मिलती है। कृष्णन के अनुसार, आमतौर पर लगभग 400 लोग उसके स्टोर पर आते हैं और वीकेंड में यह संख्या लगभग दोगुनी हो जाती है।

भविष्य को देखते हुए कृष्णन बेंगलुरु के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ देश भर में छोटे स्टोर स्थापित करना चाहते है जहाँ वे सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण भोजन ग्राहकों को उपलब्ध करा सके। कृष्णन के अनुसार, उन्हें दुनिया के कई बड़े शहरों से फ्रैंचाइज़ के ऑफर मिले हैं, लेकिन वे फिलहाल उस दिशा में नहीं जाना चाह रहे हैं।

Edited by Ranjana Tripathi

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