क्या 2030 तक 2 अरब लोगों को झुग्गी-झोपड़ियों से निकालने में सफल होगी दुनिया?

By yourstory हिन्दी
January 17, 2023, Updated on : Mon Jan 30 2023 13:58:11 GMT+0000
क्या 2030 तक 2 अरब लोगों को झुग्गी-झोपड़ियों से निकालने में सफल होगी दुनिया?
दुनियाभर में समानता को लागू करने के लिए उन्हें साफ, सुरक्षित और सुविधाओं से युक्त जगह मुहैया कराना एक बड़ी चुनौती है. इसलिए साल 2030 तक इस आबादी को 2 अरब तक पहुंचने से रोकने के लिए एक बड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है.
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क्या आपको पता है कि आज भी 1 अरब से अधिक लोग झुग्गी-झोपड़ियों में रहने के लिए मजबूर हैं. जबकि कई ऐसे देश भी हैं जहां की 90 फीसदी आबादी झुग्गी-झोपड़ियों में रहती है.


दुनियाभर में समानता को लागू करने के लिए उन्हें साफ, सुरक्षित और सुविधाओं से युक्त जगह मुहैया कराना एक बड़ी चुनौती है. इसलिए साल 2030 तक इस आबादी को 2 अरब तक पहुंचने से रोकने के लिए एक बड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है.


इसी तरह, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की 99 फीसदी शहरी आबादी प्रदूषित हवा में सांस लेने के लिए मजबूर है.


वहीं, शहरी आबादी बढ़ने के साथ ही शहरी ठोस कचरा पहाड़ की तरह बढ़ता जा रहा है. दुनियाभर में 82 फीसदी शहरी कचरे को इकट्ठा किया जाता है जबकि 55 फीसदी को शहर में कहीं मैनेज किया जाता है.


इन्हीं सभी समस्याओं को खत्म करने पर पर फोकस करता है सतत विकास लक्ष्य (SDG) के 17 लक्ष्यों में से 11वां लक्ष्य.


दरअसल, सतत विकास लक्ष्य (SDG) बेहतर स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन और सबके लिए शांति और समृद्ध जीवन सुनिश्चित करने के लिए सभी से कार्रवाई का आह्वान करता है. वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे एक सार्वभौमिक आह्वान के रूप में अपनाया गया था. 17 सतत विकास लक्ष्य और 169 उद्देश्य सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा के अंग हैं.


17 एसडीजी मानते हैं कि एक क्षेत्र में कार्रवाई से दूसरे क्षेत्र में परिणाम प्रभावित होंगे, और यह कि विकास को अवश्य ही प्रभावित होना चाहिए. सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिरता को संतुलित करें. एक प्रणालीगत सोच दृष्टिकोण वैश्विक स्थिरता के लिए आधार है.


SDG के 17 लक्ष्यों में 11वां सतत विकास लक्ष्य (SDG-11 या वैश्विक लक्ष्य-11) शहरों और मानव बस्तियों को समावेशी, सुरक्षित, लचीला और टिकाऊ बनाने से संबंधित है. सतत विकास लक्ष्य-11 को वैश्विक स्तर पर 10 लक्ष्यों और 14 संकेतकों में विभाजित किया गया है.


1. पर्याप्त, सुरक्षित और किफायती आवास और बुनियादी सेवाएं और मलिन बस्तियों को बेहतर बनाना.

2. सुरक्षित, सस्ती, सुलभ और टिकाऊ ट्रांसपोर्ट सिस्टम.

3. सभी देशों में समावेशी और टिकाऊ शहरीकरण और भागीदारी को बढ़ाना और सहभागी, एकीकृत और टिकाऊ मानव बंदोबस्त योजना और प्रबंधन की क्षमता करना.

4. दुनिया की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत की रक्षा और सुरक्षा के प्रयासों को मजबूत करना.

5. मौतों की संख्या और आपदाओं से प्रभावित लोगों की संख्या को कम करना और आपदाओं के कारण होने वाले वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के सापेक्ष प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान को कम करना.

6. शहरों के प्रतिकूल प्रति व्यक्ति पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना, जिसमें वायु गुणवत्ता और नगरपालिका और अन्य अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना शामिल है.

7. सुरक्षित, समावेशी और सुलभ, हरित और सार्वजनिक स्थानों तक सार्वभौमिक पहुंच प्रदान करें.

8. राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विकास योजना को मजबूत करके शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच सकारात्मक आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संबंधों का समर्थन करना.

9. आपदा जोखिम न्यूनीकरण 2015-2030 के लिए सेंदाई फ्रेमवर्क के अनुरूप समावेशन, संसाधन दक्षता, शमन और जलवायु परिवर्तन के लिए अनुकूलन, आपदाओं के प्रति लचीलापन और विकास और कार्यान्वयन की दिशा में एकीकृत नीतियों और योजनाओं को अपनाने और लागू करने वाले शहरों और मानव बस्तियों की संख्या में वृद्धि सभी स्तरों पर समग्र आपदा जोखिम प्रबंधन.

10. कम से कम विकसित देशों को वित्तीय और तकनीकी सहायता सहित, स्थानीय सामग्रियों का उपयोग करके स्थायी और लचीले भवनों के निर्माण में सहायता करना.


बता दें कि, दुनिया की आधी आबादी यानि करीब 3.9 अरब लोग शहरों में रहते हैं जबकि साल 2030 तक यह संख्या 5 अरब तक पहुंचने का अनुमान है. यह इसलिए भयावह है क्योंकि दुनियाभर के शहर पृथ्वी की केवल 3 प्रतिशत भूमि पर कब्जा करते हैं, फिर भी 60-80 प्रतिशत ऊर्जा खपत और 75 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं.


बढ़ते शहरीकरण के लिए भोजन, ऊर्जा और पानी जैसे बुनियादी संसाधनों तक अधिक और बेहतर पहुंच की आवश्यकता है. इसके अलावा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबिलिटी और सूचना जैसी बुनियादी सेवाओं की आवश्यकता है. हालांकि, ये आवश्यकताएं विश्व स्तर पर पूरी नहीं हुई हैं, जो भविष्य की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए शहरों की व्यवहार्यता और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियों का कारण बनती हैं.

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Edited by Vishal Jaiswal