पदोन्नति मांगने में संकोच करती हैं 90 फीसदी महिलाएं, हड़प्पा एजुकेशन के सर्वे में हुआ खुलासा

हड़प्पा एजुकेशन (Harappa Education) ने महिला पेशेवरों के प्रति पूर्वाग्रहों और अलग व्यवहार को समझने और महिला लीडर्स व आकांक्षी महिला लीडर्स को सशक्त बनाने में मदद करने के लिए डिजाइन किए गए पाठ्यक्रम के भीतर उनके अद्वितीय दृष्टिकोण को शामिल करने के लिए एक व्यापक सर्वे किया।
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लर्नर-बेस्ड फ्यूचर-सेंट्रिक इंस्टीट्यूशन, हड़प्पा एजुकेशन, ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है कि लीडरशिप में महिलाओं को क्या चाहिए।

संस्था ने महिला पेशेवरों के प्रति पूर्वाग्रहों और अलग व्यवहार को समझने और महिला लीडर्स व आगामी महिला लीडर्स को सशक्त बनाने में मदद करने के लिए डिजाइन किए गए पाठ्यक्रम के भीतर उनके अद्वितीय दृष्टिकोण को शामिल करने के लिए एक व्यापक सर्वे किया।

इसने श्रम आंदोलन को मनाने के लिए 1 मई को अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस पर अपने निष्कर्ष जारी किए। जहां नए सुधारों से कार्यस्थल में महिलाओं की भूमिका में भले ही बदलाव आए हों, लेकिन सर्वे का उद्देश्य लिंग के नजरिए से हमारे कार्यस्थलों के अंतराल को देखना भी है।

500 से अधिक महिलाओं की प्रतिक्रिया वाले सर्वे में, यह पता चला कि 99 फीसदी महिला पेशेवरों का मानना है कि उनके लिए नेटवर्क और गठबंधन बनाना महत्वपूर्ण है, जबकि केवल 47% पेशेवर अपने विकास और नई चीजों को सीखने के लिए सक्रिय रूप से नए अवसरों की तलाश करती हैं।

सर्वे के मुताबिक 90 प्रतिशत महिला उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्हें पदोन्नति की बात करने में संकोच महसूस होता है।

सर्वे में कौशल के बारे में कुछ दिलचस्प अंतर्दृष्टि का भी खुलासा किया गया है जैसा कि महिला पेशेवर को उनके पेशेवर सफर में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। एकत्र आंकड़ों के अनुसार, 72 प्रतिशत के करीब महिलाएं संचार (कम्युनिकेशन) को सर्वोच्च कौशल मानती हैं। उन्हें लगता है कि संचार के कौशल ने उन्हें उनके करियर में आगे बढ़ने में काफी मदद की है। इसके अलावा 65 फीसदी आत्मविश्वास और 41 फीसदी आत्म-जागरूकता को सर्वोच्च कौशल मानती हैं।

हड़प्पा एजुकेशन (Harappa Education) की फाउंडर और सीईओ श्रेयसी सिंह ने कहा, "मैंने हमेशा सीखने और विकास के लिए प्रतिबद्ध महसूस किया है और जो मुझे मिला महिलाओं के लिए उससे बेहतर काम की दुनिया बनाने का दृढ़ संकल्प लिया है। मैं हड़प्पा में अपने सभी सात नए कार्यक्रम की पेशकशों के बारे में बहुत खुश हूं, लेकिन विशेष रूप से महिला नेतृत्व कार्यक्रम के लिए - जिसे 10 में से 10 शिक्षा शास्त्र (pedagogy) के आधार पर, उच्च क्षमता वाली महिला प्रबंधकों की सीखने की यात्रा को बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। 'लीडरशिप में महिलाओं को क्या चाहिए' सर्वे रिसर्च हमें उन महिला पेशेवरों के सामने आने वाली चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने और हमारे महिला नेतृत्व कार्यक्रम का सह-निर्माण करने की अनुमति देता है, जो वर्तमान और आकांक्षी महिला नेताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।"

सर्वे में ऐसे अन्य पक्ष भी हैं जिनसे पता चला कि 85 प्रतिशत महिला पेशेवरों को लगता है कि उनके करियर में कम से कम एक बार, उन्हें 'मुखर' (bossy) या 'हावी' (dominating) होने के तौर माना जाता है, जबकि वे सिर्फ मुखर (assertive) हो रही होती हैं।

साथ ही, सर्वे में 97 प्रतिशत महिलाओं ने माना कि महिला पेशेवरों के लिए अपना खुद का ब्रांड बनाना महत्वपूर्ण है, जबकि 74 प्रतिशत महिलाएं स्वयं को परफेक्‍शनिस्‍ट के तौर पर मानती हैं।

जिन महिलाओं के पास 20 से कम वर्षों का कार्यानुभव है, उनमें से 52 फीसदी को इतने सालों के अनुभव के बाद भी लगता है कि वे मौजूदा पद के लिए अयोग्य अभ्यर्थी हैं। आंकड़े ने 20 से अधिक वर्षों के कॉर्पोरेट अनुभव (37 प्रतिशत) वाली महिलाओं में धीरे-धीरे कमी होते हुए दिखाया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि केवल 21 फीसदी महिलाओं को ही कार्यस्थलों में अपने पुरुष साथियों का समर्थन मिलता है।

कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए दृष्टिकोण उज्ज्वल दिखता है, क्योंकि 87 फीसदी महिलाओं को लगता है कि आगामी तीन वर्ष में महिलाओं के लिए लीडरशिप में काफी अवसर आने वाले हैं।

हड़प्पा शिक्षा के महिला नेतृत्व कार्यक्रम में 15 जरूरी कौशल शामिल हैं जिसमें महिला लीडर्स के लिए संज्ञानात्मक, सामाजिक और व्यवहार कौशल का एक जरूरी संग्रह शामिल है।

सर्वे के निष्कर्षों में इन 15 कौशलों की गूंज दिखी: अन्य महिलाओं का समर्थन करना और सशक्त बनाना, गलत धारणाओं को सीमित करने के लिए सवाल उठाना, लचीला होना, मजबूती के साथ संवाद करना, आत्म जागरूकता बढ़ाना, एक व्यक्तिगत ब्रांड को विकसित करना, साहस को शालीन बनाना, पूर्णतावाद पर काबू पाना, इम्पोस्टर सिंड्रोम से निपटना, दृढ़ता के साथ जुनून को संतुलित करना, गठजोड़ और नेटवर्क का निर्माण करना, पैसे के लिए पूछना, अनुमान लगाने की बजाय तटस्थ भाषा की ओर बढ़ना, विश्वसनीय और प्रामाणिक होना और किसी पर भरोसा करना शामिल है।

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