खोजी महिलाएं : मारग्रेट ई. नाइट ने अपने आविष्‍कार का क्रेडिट पाने के लिए लड़ी कानूनी लड़ाई

मर्द कहते थे कि औरतें इंजीनियर नहीं हो सकतीं और फिर उसने सदी की सबसे आधुनिक मशीन बनाई.

खोजी महिलाएं : मारग्रेट ई. नाइट ने अपने आविष्‍कार का क्रेडिट पाने के लिए लड़ी कानूनी लड़ाई

Friday February 17, 2023,

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लिन क्‍वेजॉन का एक उपन्‍यास है- “मैटी एंड हर मशीन.”

1868 की बात है. अमेरिका में एक पेपर बैग बनाने वाली फैक्‍ट्री में एक लड़की काम करती थी. उस फैक्‍ट्री में सारी लड़कियां ही काम किया करती थीं. फिर सिविल वॉर छिड़ गया. वॉर खत्‍म हुआ तो सारे मर्द युद्धभूमि से लौटकर घर को आने लगे. पेपर बैग्‍स की मांग बहुत बढ़ गई. फैक्‍ट्री के मालिक ने ढेर सारे लड़कों को भी काम पर रख लिया.

फिर एक दिन मैटी को पता चला कि इन सारे पुरुषों को उसी काम का तीन गुना पारिश्रमिक दिया जा रहा है. मैटी ने आपत्ति जताई तो फैक्‍ट्री के मालिक ने कहा- “वो मर्द हैं. उनकी मशीनों की समझ औरतों से बेहतर है. वो मशीनों के काम में औरतों से ज्‍यादा अच्‍छे होते हैं.”

ये बात मैटी को चुभ गई. मैटी ने फैक्‍ट्री मालिक के सामने एक शर्त रखी. अगर उसने एक ऐसी मशीन बना दी, जो पूरी तरह ऑटोमैटिक होगी और ज्‍यादा स्‍पीड के साथ पेपर बैग बनाएगी तो मालिक को सारी लड़कियों को लड़कों के बराबर सैलरी देनी होगी. और अगर वो फेल हो गई तो नौकरी छोड़ देगी.

उसके बाद जो हुआ, वो इतिहास है.

यह मैटी कोई और नहीं, मारग्रेट ई. नाइट थी. 32 साल की उम्र में उसने फुल्‍ली ऑटोमैटिक पेपर बैग मशीन बनाई. अमेरिका ही नहीं, दुनिया के इतिहास में वो ऐसा करने वाली पहली महिला थी.

‘मैटी एंड हर मशीन’ मारग्रेट ई. नाइट के जीवन पर लिखा गया बायोग्राफिकल नॉवेल है.

12 साल की उम्र में कॉटन मिल में मजदूरी

मारग्रेट का जन्‍म 14 फरवरी, 1838 को अमेरिका के यॉर्क में हुआ था. मां-बाबा प्‍यार से बच्‍ची को मैटी कहकर बुलाते थे. नन्‍ही मैटी को कारपेंटरी का बड़ा शौक था. छोटी सी उम्र में भी वह गुडि़यों से नहीं, बल्कि लकड़ी के सामान बनाने वाले औजारों से खेलती थी. खिलौनों के नाम पर उसे चाहिए होता था लकड़ी का एक टुकड़ा और एक चाकू.

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मैटी बहुत छोटी थी, जब उसके पिता की मृत्‍यु हो गई. रोजगार की तलाश में विधवा मां, मैटी और उसके दो भाईयों को लेकर मैनचेस्‍टर चली आई. मैनचेस्‍टर में कॉटन की मिलें थीं, जहां आसानी से रोजगार मिल जाता था. स्‍कूली शिक्षा के नाम पर मैटी मुश्किल से आठवीं पास कर पाई. 12 साल की उम्र में वह अपनी मां और भाइयों के साथ कॉटन मिल में काम करने लगी.

मारग्रेट का पहला आविष्‍कार- एक सेफ्टी डिवाइस

मिल में काम करने के दौरान एक दुर्घटना हुई. एक मजदूर का हाथ मशीन में फंस गया और वह बुरी तरह घायल हो गया. फिर मैटी ने उस मशीन के लिए एक सेफ्टी डिवाइस बनाई. वो डिवाइस काफी कारगर थी. उसे मिल की हर मशीन में लगा दिया गया. बाद में बाकी कपड़ा मिलों ने भी सेफ्टी डिवाइस के बतौर उसका इस्‍तेमाल किया. मैटी ने कभी उस डिवाइस को पेटेंट नहीं कराया. उसे बनाने का क्रेडिट भी उसे बहुत बाद में मिला, जब देश भर में उसकी ख्‍याति फैल गई थी.

पुरुषों को महिलाओं से तीन गुना ज्‍यादा पारिश्रमिक 

1867 में मारग्रेट मैचाचुसेट्स के स्प्रिंगफील्‍ड चली गई और वहां उसे कोलंबिया पेपर फैक्‍ट्री में काम करने लगी. वहां उस फैक्‍ट्री में मशीन जो पेपर बैग बनाती थी, उसका बॉटम या निचला हिस्‍सा नुकीला था. उसका कोई बेस नहीं था और वह इतना कमजोर था कि थोड़े भी भारी सामान का बोझ नहीं उठा पाता था. जो फ्लैट बॉटम वाले पेपर बैग थे, उन्‍हें हाथ से बनाया जाता था और वह काफी महंगे होते थे.

ऐसे पेपर बैग इंग्‍लैंड में 1840 से बन रहे थे, लेकिन मजे की बात थी कि वो सब हाथ से बनाए जाते थे. ऐसी किसी मशीन का आविष्‍कार तब तक नहीं हुआ था, जो पूरी तरह ऑटोमैटिक हो और जिसकी मदद से फ्लैट बॉटम वाले मजबूत क्‍वालिटी के पेपर बैग्‍स का निर्माण किया जा सके.

तभी वह घटना हुई, जिसके बाद मारग्रेट ने कोलंबिया पेपर फैक्‍ट्री के मालिक को चुनौती दे डाली कि या तो वो एक बेहतर क्‍वालिटी का ऑटोमैटिक मशीन बनाएगी या फिर नौकरी छोड़ देगी.

1965 में अमेरिका में सिविल वॉर खत्‍म हुआ. अब तक तो मर्द युद्ध के मैदान में जुटे हुए थे, वे सब एक-एक कर लौट रहे थे. कोलंबिया पेपर फैक्‍ट्री, जहां अब तक सारी औरतें ही काम करती थीं, वहां भी पुरुषों की एंट्री होने लगी.

एक दिन जब मारग्रेट को पता चला कि इन पुरुष कर्मचारियों को महिलाओं से 3 गुना ज्‍यादा वेतन दिया जा रहा था तो यह बात मारग्रेट को बहुत अपमानजनक लगी. उस फैक्‍ट्री में महिलाएं सालों से बहुत मामूली वेतन पर काम कर रही थीं. वो अपने छोटे-छोटे बच्‍चों को छोड़कर काम पर आतीं, फैक्‍ट्री से लौटकर घर के काम करतीं. प्रेग्‍नेंसी और पीरियड के दौरान भी काम करतीं. कई बार तो बच्‍चे की डिलिवरी के दो दिन बाद ही काम पर लौट आती थीं.

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हर लिहाल से औरतों का श्रम पुरुषों से कहीं ज्‍यादा था और यहां इन पुरुषों को एक जैसे काम का तीन गुना पैसा दिया जा रहा था. सिर्फ इसलिए क्‍योंकि वे मर्द थे और कंपनी के मालिकान, जो खुद भी मर्द ही थे, उनका मानना था कि मशीनों के मामले में पुरुषों की बुद्धिमत्‍ता और कौशल महिलाओं से ज्‍यादा होता है. पुरुष नैचुरली ही मशीन एक्‍सपर्ट होते थे.

पेपर बैग मशीन बनाने का संकल्‍प

मारग्रेट को ये बात चुभ गई और उसने तय कर लिया कि वह इस पूर्वाग्रह को गलत साबित करेगी. 1868 में मारग्रेट ने एक मशीन बनाई, जो बहुत बड़े पैमाने पर फ्लैट बॉटम वाले पेपर बैग्‍स का निर्माण कर सकती थी. इस मशीन ने पेपर बैग्‍स की क्‍वालिटी बेहतर बनाने से लेकर उसकी स्‍पीड भी बढ़ा दी थी.

इसके बाद भी मारग्रेट की आगे ही राह आसान नहीं थी. मारग्रेट की शुरुआती मशीन का प्रोटोटाइप लकड़ी का बना था. अब उसे ठीक वैसी ही मशीन लोहे का इस्‍तेमाल करके बनानी थी. लेकिन उससे पहले ही चार्ल्‍स एनन नाम के एक आदमी ने मारग्रेट की मशीन की डिजाइन चुरा ली और उसे पेटेंट भी करा लिया.

लंबी कानूनी लड़ाई

बाद में जब मारग्रेट अपनी मशीन को पेटेंट कराने गई तो पता चला कि यह डिजाइन तो पहले से पेटेंट हो रखी है. मारग्रेट ने कोर्ट में चार्ल्‍स एनन के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इस दौरान अखबारों में इस विषय पर जमकर बहस और लेखबाजी हुई, जिसमें उसे दौर के कुछ अहंकारी पुरुषों ने यह साबित करने की कोशिश की कि बिना किसी एजूकेशन और डिग्री के एक औरत ऐसी मशीन बना ही नहीं सकती. औरतों में वैसे भी इंजीनियरिंग का स्किल होता ही नहीं.

मारग्रेट ने इस मुकदमे में अपनी जीवन भर की कमाई खर्च कर दी. इतना ही नहीं, उसे दोस्‍तों से कर्ज भी लेना पड़ा. 16 दिन तक चले मुकदमे में रोज 100 डॉलर खर्च होता था. 1870 का 100 डॉलर मतलब आज का 2,283 डॉलर.

लेकिन अंत में जीत मारग्रेट की हुई. 1971 में उसे मशील का पेटेंट मिल गया और अपने समय की सबसे मॉडर्न पेपर बैग बनाने वाली मशीन के आविष्‍कारक के तौर पर मारग्रेट ई. नाइट का नाम इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया.

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