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CA Mukesh Rajput

Writes for MyStory

About the author……. Mukesh Singh Rajput is a C.A. by profession. This is his first and probably the last book. It is so because he refuses to regard himself as a professional writer. Had the thought of motivating others by telling them about his unbelievably hard life not rankled his conscience he probably would have never put his pen on paper to write this book. The tribulations of his life before he became a C.A. can be imagined when we realize that he has completed all his studies after 5th as a private candidate; spent his entire childhood away from home – family working in hotels and shops. But the flame of become something in life kept burning bright in him so picked up the lost threads of studies once again and rested only after he had obtained the professional degree of C.A. in 2010. Presently he is a practicing C.A. in Bhopal. email:capasstherealstory@gmail.com https://www.flickr.com/photos/capass/ facebook page ; ca pass the real story किताब के बारे में............ प्रस्तुत पुस्तक ‘सीए पास द रियल स्टोरी’ लेखक का आत्म-कथानक है, जिसमे उन्होंने अपनी फर्श से अर्श तक पहुचने की उतार – चढ़ावों भरी जीवन – यात्रा का बहुत ही रोचक अंदाज में वर्णन किया है | इस पुस्तक के माध्यम से आप जानेंगे की किस प्रकार माता - पिता के झगड़ो से तंग आकर घर से दूर हुए एक छोटे से बच्चे ने, जिसे अपने आप को जिन्दा रखने के लिए कभी किसी कैंटीन में तो कभी किसी होटल में काम करना पड़ा, केसे उसने इतनी साडी दुस्वरिया झेलते हुए भी कुछ बन्ने की अटूट चाहत और अथक परिश्रम के बल पर अपने सपने को साकार कर दिखया और एक सफल सीए बन गया | इस इमानदार आत्म – कथानक के माध्यम से लेखक ने बताया की बड़ी सफलता पाने के लिए असाधारण प्रतिभा का होना आवश्यक नहीं है, लगन और मेहनत से सबकुछ संभव किया जा सकता है; औसत बुद्धि वाले लोग भी अपने आपको तराशते हुए मनचाहा मुकाम पा सकते है | प्रस्तुत पुस्तक बताती है की असफलताए वास्तव में गलतियों का दोहराव मात्र होती है और इसीलिए उनसे हारकर बैठ जाने की वजाय हमे अपनी गलतियों को जानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए | यह कोई उप्देश्त्मक किताब नहीं है बल्कि यह तो लेखक के जीवन में घटी प्रत्यछ घटनाओ का सच्चा ब्यौरा है जो न केवल हमे परस्थिथियो से हरने की वजाय उनसे झूझने की प्रेरणा देता है, बल्कि वे तरीके भी बताता है जिनके माध्यम से ऐसा किया जा सकता है | कुल मिलकर यह एक प्रैक्टिकल हैण्ड बुक है जो, हौसला भी देती है, सिखाती भी है और मनोरंजन भी करती है | इस बुक के माध्यम से लेखक ने बताया है, मेमोरी को तेज़ केसे किया जा सकता है, पढाई का सही तरीका क्या होता है, परीक्षा में अच्छे अंक केसे लाये, एग्जाम को पास करने के लिए हमे क्या याद रखना चाहिए, पढाई का टाइम टेबल और बहुत सारी स्टडी टेक्निक्स भी दी गयी है, जिन्हें स्टूडेंट्स जानकर एक सफल प्रोफेशनल बन सकते है | यदपि किसी सीए के द्रुआरा इस तरह की ये पहली किताब है...में सभी स्टूडेंट्स को इसे पढने और इसमें बताई गयी तकनीको को पालन करने के लिए कहूँगा, ये किताब पेरेंट्स को भी पढनी चाहिए | लेखक के बारे.......... मुकेश सिंह राजपूत पेशे से सीए है | यह उनकी पहली और संभवत: आखरी किताब है ऐसा इसीलिए क्योकि वे खुद को पेशेवर लेखक नहीं मानते है | अगर अपने अविश्वानिय रूप से संघर्षपूर्ण जीवन दूसरो के लिए प्रेरणा का माध्यम बनाने की चाहत न होतो तो वे कभी भी किताब लिखने के बारे में नहीं सौचते | सीए बनने से पहले का इनका पूरा सफ़र कठिनायो भरा रहा है, पांचवी क्लास के बाद इनकी पूरी पढाई छूट चुकी थी, इनका पूरा बचपन होटल, रेस्टारेंट और ढाबो में काम करते हुए बीता लेकिन मन में कुछ बनने की धुन थी तो पांचवी के बाद छूटी पढाई पुन; शुरु कि सीधे 10-वी कक्षा का प्राइवेट फार्म भरा उसमे भी उन्हें तीन बार लगातार असफलताए मिली, किन्तु वे हार नहीं मने और अंत; उन्होंने चौथी बार में 10-वी कक्षा पास की – और फिर उन्होंने अपना सीए बनने का सफ़र चालू किया, उसमे भी उन्हें IPCC की प्रथम ग्रुप में लगातार 6 वार असफलताए मिली किन्तु वे फिर भी हार नहीं मने और लगातार प्रयास करते हुए वे चार्टर्ड एकाउंटेंट्स बने, वर्तमान में भोपाल म.प्र. में प्रैक्टिस करते है |