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भारत विश्व की 'सर्कुलर इकोनॉमी' में प्रमुख योगदानकर्ता बनने के लिए तैयार है: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि "अपशिष्ट (कचरा) आने वाले समय की संपदा है" और यह प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के वैश्विक पर्यावरणीय कार्रवाई के केंद्र में भारत की परिकल्पना के अनुरूप है.

भारत विश्व की 'सर्कुलर इकोनॉमी' में प्रमुख योगदानकर्ता बनने के लिए तैयार है: डॉ. जितेंद्र सिंह

Wednesday April 19, 2023 , 5 min Read

केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत विश्व की "सर्कुलर इकोनॉमी" में एक प्रमुख योगदानकर्ता बनने के लिए तैयार है.

नई दिल्ली में "वन वीक-वन लैब" कार्यक्रम के तहत वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद – भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (CSIR IIP) के सूक्ष्म लघु एवं माध्यम उद्यम सम्मेलन (MSME Meet) और समग्र (पैन) CSIR- सहयोग को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में अब तक अप्रयुक्त अपशिष्ट की एक ऐसी बड़ी मात्रा है जो संपदा में परिवर्तित करने के लिए उपलब्ध है और जिसका पहले उपयोग नहीं किया जा सका था क्योंकि तब न तो ऐसी तकनीक उपलब्ध थी, न ही इसे हमारी सामाजिक संस्कृति के हिस्से के रूप में लाया गया था. लेकिन टेक्नोलॉजी विकास की बढ़ती गति और अधिक से अधिक सामाजिक जागरूकता के साथ, यह अर्थव्यवस्था का एक समृद्ध स्रोत बन जाएगा जो भारत के लिए विशिष्ट होगा. उन्होंने कहा कि इसके अलावा, यह भारत को अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर बढ़त देगा.

मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि "अपशिष्ट (कचरा) आने वाले समय की संपदा है" और यह प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के वैश्विक पर्यावरणीय कार्रवाई के केंद्र में भारत की परिकल्पना के अनुरूप है.

मंत्री ने उल्लेख किया कि CSIR IIP देहरादून देश की एकमात्र प्रयोगशाला है जो संपदा के स्थान पर अपशिष्ट का प्रयोग कर रही है. उन्होंने कहा कि यह अगली पीढ़ी के लिए काम करने वाला संस्थान है. उन्होंने कहा कि अपशिष्ट से संपदा (वेस्ट टू वेल्थ) की अवधारणा अपेक्षाकृत नई है और आप इसके पथप्रदर्शक हैं. मंत्री ने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की प्रयोगशालाओं से सूक्ष्म लघु एवं माध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र और उद्योग जगत के साथ समन्वयन से काम करने का आग्रह किया ताकि निरंतर विकास के लिए व्यापक एकीकरण के हिस्से के रूप में काम किया जा सके.

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद – भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (CSIR IIP) देहरादून के निदेशक डॉ. अंजन रे ने कहा कि CSIR IIP के लिए दिपक्षीय कार्यक्षेत्र (मैंडेट) निर्धारित हैं : (क) भारत को अपने आयातित ईंधन के बोझ को कम करने में सहायता करना, और (ख) ऊर्जा को बढ़ाने के लिए साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, विकास और क्षेत्र परिनियोजन की पहुंच और सामर्थ्य का उपयोग करके हमारे ऊर्जा उपयोग के डीकार्बनाइजेशन में राष्ट्र की सहायता करना.

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "वन वीक-वन लैब – OWOL)“ कार्यक्रम को CSIR प्रयोगशालाओं के बीच साझेदारी को मजबूत करने का एक अवसर होना चाहिए क्योंकि प्रत्येक प्रयोगशाला के पास विशिष्ट जनादेश है और भोजन से लेकर ईंधन, औषधियों, पर्यावरण, चमड़ा, जीनोमिक्स, भूविज्ञान और एवं सामग्री जैसे कई अन्य विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता है. इसके अलावा, OWOL CSIR प्रयोगशालाओं को उनके काम का गहन विश्लेषण और सराहना करने और समाज की बेहतरी के लिए इसका उपयोग करने में सक्षम बनाता है.

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत 2070 तक शुद्ध शून्य ग्रीन हाउस गैस (जीरो जीएचजी) उत्सर्जन प्राप्त करते हुए बढ़ती जनसंख्या के लिए विश्वसनीय, सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने और ठोस ध्यान देने की आवश्यकता होगी. भारत का ऊर्जा उत्पादन जीवाश्म ईंधन (59.8 प्रतिशत ) पर निर्भर करता है, जिसमें कोयले का योगदान लगभग 51 प्रतिशत है, हालांकि नवीकरणीय ऊर्जा भी प्रभावशाली 38.5 प्रतिशत तक बढ़ गई है. इसलिए अभी भी ऊर्जा क्षेत्र को और अधिक कार्बन मुक्त (डीकार्बनाइज) करने की आवश्यकता है, जिसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा के साथ जीवाश्म ईंधन को बदलने, पुराने बिजली संयंत्रों से जीवाश्म कार्बन डाईऑक्साइड (सीओ 2) उत्सर्जन को कम करने और कार्बन पृथक्करण के माध्यम से अपरिहार्य कार्बन उत्सर्जन को हटाने की आवश्यकता होगी. यहीं पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी को प्रमुख भूमिका निभानी है.

मंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौरान राष्ट्र की सेवा करने में उल्लेखनीय अनुकूलनशीलता और लचीलेपन के लिए CSIR IIP के प्रयासों की सराहना करते हुए अपने सम्बोधन का समापन किया. उन्होंने सभी CSIR प्रयोगशालाओं से आग्रह किया कि वे इस "एक सप्ताह-एक प्रयोगशाला" कार्यक्रम का उपयोग निरंतर और प्रेरक प्रयासों में संलग्न होने के अवसर के रूप में करें ताकि सभी हितधारकों की भागीदारी को स्थायी रूप से विकसित किया जा सके.

एमएसएमई की बैठक और उसके साथ CSIR IIP का समग्र (पैन) CSIR सहयोग इस पहुंच को उसके सम्मानित एमएसएमई भागीदारों के प्रयासों को प्रदर्शित करेगा, जो न केवल इसकी टेक्नोलॉजी के कार्यान्वयन में सहायक रहे हैं, बल्कि उन्हें भारत की विकास गाथा का एक अभिन्न अंग माना जाता है. यह आयोजन CSIR IIP के एमएसएमई भागीदारों के लिए उपयुक्त फीडबैक देने और अन्य प्रेरित एमएसएमई सहयोगियों के साथ भाईचारे की भावना विकसित का एक उपयुक्त अवसर होगा. CSIR IIP की मेडिकल ऑक्सीजन टेक्नोलॉजी, बायोगैस शोधन टेक्नोलॉजी, उन्नत पीएनजी बर्नर और उन्नत गुड़ भट्टी इस विचार-विमर्श के मुख्य आकर्षण होंगे.

पैन-CSIR सहयोग का यह प्रदर्शन CSIR IIP के आंतरिक - CSIR सहयोगी अनुसंधान को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा. CSIR IIP के वैज्ञानिकों और CSIR की अन्य प्रयोगशालाओं के उनके सहयोगियों की संयुक्त प्रस्तुतियां हाल की उन गतिविधियों और उपलब्धियों को उजागर करेंगी जो राष्ट्रीय नेतृत्व के आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना से जुड़ी हैं.

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Edited by रविकांत पारीक