17 जून: मुमताज की मौत, RBI का फैसला, अरब ने रचा इतिहास
17 जून का इतिहास कई महत्वपूर्ण घटनाओं से भरा है — मुमताज महल की मौत के बाद शुरू हुई ताजमहल की कहानी, RBI द्वारा बेस रेट प्रणाली की शुरुआत और पहले अरब मुस्लिम अंतरिक्ष यात्री का मिशन. जानिए आज के दिन से जुड़ी रोचक और ऐतिहासिक जानकारियां.
हर तारीख इतिहास में कुछ न कुछ खास लेकर आती है और 17 जून (17 June Ka Itihas) भी इससे अलग नहीं है. इस दिन विश्व और भारत में कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं, जिन्होंने राजनीतिक, सामाजिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक परिवेश को गहराई से प्रभावित किया.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 17 जून के दिन (17 June History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए, जानते हैं कि 17 जून को इतिहास में क्या-क्या घटित हुआ और क्यों यह तारीख आज भी याद रखी जाती है —
भारत और विश्व के इतिहास में 17 जून की प्रमुख घटनाएं
1631 — मुमताज महल का निधन
17 जून 1631 को मुग़ल सम्राट शाहजहां (Shah Jahan) की प्रिय पत्नी मुमताज महल (Mumtaz Mahal) का निधन हुआ था. वह अपने 14वें बच्चे को जन्म देते समय बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) में चल बसी. मुमताज, जिनका असली नाम अर्जुमंद बानू बेगम था, शाहजहां की सबसे चहेती बेगम थीं और उनके दिल के बेहद करीब थीं. उनकी मृत्यु ने शाहजहां को गहरे शोक में डाल दिया और इसी दर्द से जन्म लिया एक अद्भुत स्मारक — ताजमहल (Taj Mahal). मुमताज की मृत्यु के बाद उनका पार्थिव शरीर पहले बुरहानपुर में दफनाया गया, फिर कुछ समय बाद उसे आगरा लाकर यमुना नदी के किनारे दोबारा सुपुर्द-ए-खाक किया गया. यहीं पर शाहजहां ने उनकी याद में एक भव्य मकबरे का निर्माण करवाया, जो आज दुनिया भर में प्रेम का प्रतीक माना जाता है. ताजमहल, जो 1632 में बनना शुरू हुआ और करीब 22 साल में बनकर तैयार हुआ, आज भी स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है और यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी है.
1775 — बंकर हिल की लड़ाई
17 जून 1775 को अमेरिका की स्वतंत्रता की लड़ाई के शुरुआती दौर में बंकर हिल की लड़ाई (Battle of Bunker Hill) लड़ी गई थी. यह लड़ाई मैसाचुसेट्स के चार्ल्सटाउन क्षेत्र में ब्रीड्स हिल पर लड़ी गई, हालांकि इसे पारंपरिक रूप से "बंकर हिल" की लड़ाई कहा जाता है. अमेरिकी उपनिवेशवादियों और ब्रिटिश सेना के बीच हुई इस लड़ाई में उपनिवेशवादियों ने बहादुरी से ब्रिटिश हमलों का सामना किया, हालांकि अंत में उन्हें पीछे हटना पड़ा. हालांकि यह लड़ाई सैन्य रूप से ब्रिटिशों की जीत थी, लेकिन इसमें उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा — 1,000 से अधिक सैनिक हताहत हुए. वहीं, अमेरिकी सेनाएं संसाधनों की कमी के बावजूद संगठित रूप में लड़ीं और यह दिखाया कि वे शक्तिशाली ब्रिटिश सेना का मुकाबला कर सकती हैं. यह लड़ाई अमेरिकी क्रांति (American Revolution) के लिए एक प्रेरणादायक क्षण बन गई और इससे उपनिवेशियों का मनोबल काफी बढ़ा.
1885 — अमेरिका पहुंची Statue of Liberty
17 जून 1885 को फ्रांस से भेजी गई Statue of Liberty (स्वतंत्रता की प्रतिमा) अमेरिका के न्यूयॉर्क हार्बर पहुंची. यह प्रतिमा फ्रांस की जनता की ओर से अमेरिका को दोस्ती और स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में उपहार में दी गई थी. इसे अटलांटिक महासागर पार कर 350 हिस्सों में अलग-अलग कर के 214 लकड़ी के क्रेट्स में पैक किया गया था. यह विशाल मूर्ति तांबे और लोहे से बनी थी, जिसे प्रसिद्ध फ्रेंच मूर्तिकार फ्रेडरिक ऑगस्टे बार्थोल्डी (Frederic-Auguste Bartholdi) ने डिज़ाइन किया था और इसके धातु ढांचे को अलेक्जेंडर गुस्ताव एफिल (Alexandre-Gustave Eiffel) (एफिल टॉवर के डिज़ाइनर) ने तैयार किया था. अमेरिका पहुंचने के बाद इसे न्यूयॉर्क के लिबर्टी द्वीप (तब बेडलोज़ आइलैंड) पर दोबारा जोड़ा गया. इस प्रतिमा का अनावरण और उद्घाटन 28 अक्टूबर 1886 को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति ग्रोवर क्लीवलैंड (Grover Cleveland) ने किया. "Statue of Liberty" धीरे-धीरे लोकतंत्र, आज़ादी और उम्मीद का वैश्विक प्रतीक बन गई, जो आज भी दुनिया भर के पर्यटकों और प्रवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.
1985 — पहले अरब और मुस्लिम अंतरिक्ष यात्री बने सुल्तान बिन सलमान अल सऊद
17 जून 1985 को सऊदी अरब के राजकुमार सुल्तान बिन सलमान अल सऊद (Saudi Arabia’s Prince Sultan bin Salman Al Saud) ने इतिहास रचते हुए अंतरिक्ष में जाने वाले पहले अरब, पहले मुस्लिम, और पहले राजघराने के सदस्य बनने का गौरव प्राप्त किया. वे नासा (NASA) के स्पेस शटल डिस्कवरी (NASA Mission STS 51-G) में बतौर पेलोड स्पेशलिस्ट सवार हुए थे. यह मिशन अमेरिका के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च हुआ और इसका उद्देश्य उपग्रह प्रक्षेपण और वैज्ञानिक प्रयोग करना था. इस मिशन की कुल अवधि 7 दिन, 1 घंटा, 38 मिनट और 52 सैकंड रही और इसका समापन 24 जून 1985 को एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस, कैलिफ़ोर्निया में लैंडिंग के साथ हुआ. उस समय सुल्तान की उम्र महज 28 वर्ष थी, जिससे वे अंतरिक्ष में जाने वाले सबसे युवा लोगों में से एक भी बने. उनका यह मिशन न केवल तकनीकी उपलब्धि थी, बल्कि इसने इस्लामी और अरब दुनिया के लिए वैज्ञानिक प्रेरणा का मार्ग भी प्रशस्त किया.
2010 — भारतीय रिज़र्व बैंक ने बेस रेट प्रणाली को दी मंजूरी
17 जून 2010 को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश में बेस रेट प्रणाली को लागू करने की घोषणा की. इसका उद्देश्य बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज दरों को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना था. यह प्रणाली 1 जुलाई 2010 से सभी बैंकों के लिए लागू की गई. इससे पहले बैंकों द्वारा ब्याज दरें तय करने में बहुत हद तक उनकी अपनी मर्जी और प्राथमिकताएं चलती थीं, जिससे उपभोक्ताओं को नुकसान होता था. बेस रेट प्रणाली के तहत बैंक किसी भी ग्राहक को दिए जाने वाले ऋण पर इससे कम ब्याज दर नहीं लगा सकते थे (कुछ अपवादों को छोड़कर). इससे ब्याज दरों में भेदभाव की संभावना कम हुई और ऋण बाजार में उचित प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई. यह भारत के बैंकिंग सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, जो बाद में MCLR और फिर External Benchmark System जैसे अन्य सुधारों का आधार बना.
17 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1887 — कैलाश नाथ काटजू, प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ तथा मध्य प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री
1903 — ज्योति प्रसाद अग्रवाल, असम के प्रसिद्ध नाटककार, गीतकार, कवि, लेखक और फिल्म निर्माता
1942 — भगत सिंह कोश्यारी, उत्तराखंड के दूसरे मुख्यमंत्री
1970 — निशिकांत कामत, हिंदी सिनेमा के मशहूर निर्देशक और अभिनेता
1973 — लिएंडर पेस, भारत के सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी
1981 — अमृता राव, हिंदी फिल्मों की अभिनेत्री
17 जून को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1631 — मुमताज महल, मुग़ल सम्राट शाहजहां की पत्नी
1674 — जीजाबाई, शाहजी भोंसले की पत्नी तथा छत्रपति शिवाजी की माता
1862 — लॉर्ड कैनिंग, भारत के प्रथम वायसराय
1895 — गोपाल गणेश आगरकर, प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता
1928 — गोपबंधु दास, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी तथा उड़ीसा के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता
17 जून को क्यों याद रखा जाए?
सूखा व मरूस्थलीकरण नियंत्रण दिवस (World Day to Combat Desertification and Drought): यह दिवस हर साल 17 जून को मनाया जाता है. इस दिवस की शुरुआत 1995 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गई थी, ताकि दुनिया भर में भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण और जल संकट जैसे मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाई जा सके. इस दिन का उद्देश्य लोगों, सरकारों और संगठनों को भूमि के सतत उपयोग, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित करना है. जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों के कारण तेजी से बढ़ रहे सूखा और भूमि क्षरण को रोकना आज की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौतियों में से एक है. इस वर्ष इसकी थीम है: "Restore the land. Unlock the оpportunities".
आज का रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं (Did you know) कि 17 जून 1985 को डिस्कवरी चैनल (Discovery Channel) ने पहली बार प्रसारण शुरू किया था. यह चैनल दुनिया भर में विज्ञान, प्रकृति, इतिहास और एडवेंचर से जुड़ी ज्ञानवर्धक और रोमांचक जानकारियां देने के लिए जाना जाता है. आज यह दुनिया के सबसे लोकप्रिय नॉन-फिक्शन चैनलों में से एक है.
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