22 जून: ISRO का कमाल, हिटलर का हमला और सुनीता की धरती पर वापसी
22 जून का इतिहास कई महत्वपूर्ण घटनाओं से भरा है—हुमायूं की वापसी, नेपोलियन की हार, हिटलर का ऑपरेशन बारबरोसा और ISRO की ऐतिहासिक सफलता. जानिए इस दिन से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएं, महान हस्तियों के जन्म और पर्यावरण संरक्षण की खास वजह. पढ़िए आज का रोचक तथ्य.
इतिहास का हर दिन अपने भीतर कई अनसुनी और अनोखी घटनाएं समेटे होता है. 22 जून (22 June Ka Itihas) भी ऐसा ही एक दिन है, जब विश्व और भारत के इतिहास में कई अहम मोड़ आए. इस दिन ने न केवल युद्धों का रुख बदला बल्कि राजनीतिक उथल-पुथल और वैज्ञानिक प्रगति की भी गवाही दी.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 22 जून के दिन (22 June History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए जानें कि 22 जून को इतिहास के पन्नों में क्या-क्या खास हुआ था —
भारत और विश्व के इतिहास में 22 जून की प्रमुख घटनाएं
1555 — हुमायूँ की वापसी: मुग़ल सत्ता की पुनर्स्थापना
22 जून 1555 को मुग़ल सम्राट हुमायूँ (Mughal Emperor Humayun) ने शेर शाह सूरी (Sher Shah Suri) के उत्तराधिकारी सिकंदर शाह सूरी (Sikandar Shah Suri) को हराकर दिल्ली पर पुनः कब्ज़ा कर लिया. 15 वर्षों के वनवास और कठिन संघर्ष के बाद हुमायूँ ने एक बार फिर मुग़ल साम्राज्य (Mughal dynasty) को स्थापित किया. यह घटना न केवल मुग़ल सत्ता की वापसी का प्रतीक थी, बल्कि एक नए युग की शुरुआत भी थी, जिसकी नींव उनके पुत्र अकबर (Akbar) के शासन में और मज़बूत हुई. हुमायूँ की यह जीत भारतीय इतिहास की एक निर्णायक मोड़ साबित हुई.
1815 — नेपोलियन ने दूसरी बार गद्दी छोड़ी
22 जून 1815 को नेपोलियन बोनापार्ट (Napoleon Bonaparte) ने "वाटरलू की लड़ाई" (Battle of Waterloo) में ऐतिहासिक हार के बाद फ्रांस के सम्राट पद से दूसरी बार इस्तीफा दे दिया. यह लड़ाई 18 जून 1815 को बेल्जियम के वाटरलू में ब्रिटिश कमांडर ड्यूक ऑफ वेलिंगटन आर्थर वेलेस्ली (Arthur Wellesley) और प्रुशिया सेना के जनरल गेबहार्ड लेबेरेख्त ब्लूखर (Gebhard Leberecht von Blücher) के नेतृत्व में लड़ी गई थी, जिसमें नेपोलियन की निर्णायक हार हुई. इस पराजय के बाद नेपोलियन को फ्रांसीसी जनमत और सेना का समर्थन नहीं मिला, जिससे विवश होकर उन्होंने सत्ता छोड़ दी. इसके बाद फ्रांस में बॉर्बन वंश (हाउस ऑफ बॉर्बन - House of Bourbon) की पुनर्स्थापना हुई और लुई अठारहवें (Louis XVIII) ने सत्ता संभाली. यह घटना यूरोप में शक्ति संतुलन और राजनीतिक संरचना को बदलने वाली साबित हुई.
1940 — हिटलर के सामने झुका फ्रांस
22 जून 1940 को फ्रांस (France) ने आधिकारिक रूप से नाज़ी जर्मनी (Nazi Germany) के आगे आत्मसमर्पण कर दिया, जो द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) की एक निर्णायक घटना बनी. आत्मसमर्पण की संधि उसी रेल डिब्बे में साइन की गई थी, जिसमें 1918 में जर्मनी ने प्रथम विश्व युद्ध (World War I) में आत्मसमर्पण किया था — यह हिटलर (Adolf Hitler) द्वारा फ्रांस को प्रतीकात्मक रूप से अपमानित करने का तरीका था. इसके बाद फ्रांस का उत्तरी भाग जर्मनी के नियंत्रण में आ गया और दक्षिणी भाग में ‘वीशी फ्रांस’ (Vichy regime) नाम से जर्मन समर्थित सरकार बनी. यह घटना नाज़ी जर्मनी की सैन्य ताकत के शिखर को दर्शाती है और यूरोप में फासीवादी विस्तार के दौर को गति देती है. यह हिटलर की शक्ति के चरम का प्रतीक माना जाता है और यूरोप में युद्ध की दिशा को पूरी तरह बदल देने वाली घटना थी.
1941 — हिटलर ने शुरू किया 'ऑपरेशन बारबरोसा'
22 जून 1941 को नाज़ी जर्मनी ने 'ऑपरेशन बारबरोसा' (Operation Barbarossa) नामक सैन्य अभियान के तहत सोवियत संघ (Soviet Union) पर अचानक हमला किया, जो द्वितीय विश्व युद्ध का सबसे बड़ा और निर्णायक मोर्चा बन गया. इस हमले में जर्मनी ने तीन करोड़ से अधिक सैनिकों, टैंकों और विमानों के साथ सोवियत सीमा को पार किया. हिटलर का उद्देश्य जल्दी जीत हासिल कर मॉस्को, लेनिनग्राद और कीव पर कब्जा करना था, लेकिन सोवियत प्रतिरोध और भीषण सर्दियों के कारण यह योजना विफल हो गई. यह अभियान युद्ध के मोर्चे को पूर्व की ओर ले गया और अंततः जर्मनी की हार की शुरुआत का कारण बना. ऑपरेशन बारबरोसा ने द्वितीय विश्व युद्ध के राजनीतिक और सैन्य समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया.
2016 — ISRO का कमाल: एक साथ 20 सैटेलाइट लॉन्च कर रचा इतिहास
22 जून 2016 को इसरो (ISRO) ने भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए श्रीहरिकोटा (Sriharikota) से पीएसएलवी-सी34 (PSLV-C34) रॉकेट के ज़रिए एक साथ 20 सैटेलाइट लॉन्च किए. इस मिशन का मुख्य उपग्रह भारतीय पृथ्वी अवलोकन उपग्रह कार्टोसैट-2 था, जबकि बाकी 19 सैटेलाइट्स अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और इंडोनेशिया जैसे देशों के थे. इसरो की यह उपलब्धि न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण थी, बल्कि भारत को विश्वस्तरीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी साबित हुई.
22 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1900 — गणेश घोष, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी
1932 — अमरीश पुरी, भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता
1950 — टॉम ऑल्टर, भारतीय सिनेमा के अभिनेता
22 जून को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1932 — जगन्नाथदास 'रत्नाकर', आधुनिक युग के श्रेष्ठ ब्रजभाषा कवि
1994 — एल. वी. प्रसाद, भारतीय सिनेमा के सफल फ़िल्मकार, निर्माता-निर्देशक और अभिनेता
1988 — भदंत आनंद कौसल्यायन, महान स्वतंत्रता सेनानी, बौद्ध भिक्षु और लेखक
2000 — केदारनाथ अग्रवाल, हिंदी साहित्य की प्रगतिशील काव्य-धारा के एक प्रमुख कवि
22 जून को क्यों याद रखा जाए?
विश्व रेनफॉरेस्ट दिवस (World Rainforest Day): हर साल 22 जून को विश्व रेनफॉरेस्ट दिवस (World Rainforest Day) मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 2017 में Rainforest Partnership नामक एक गैर-लाभकारी संगठन द्वारा की गई थी. इस दिन का उद्देश्य दुनियाभर के वर्षावनों की रक्षा, संरक्षण और पुनर्स्थापना के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना है. वर्षावन पृथ्वी के “फेफड़े” कहलाते हैं, क्योंकि वे कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और जलवायु संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. विश्व रेनफॉरेस्ट दिवस हमें याद दिलाता है कि जैव विविधता, पारिस्थितिक संतुलन और मानव जीवन के लिए वर्षावनों का संरक्षण आवश्यक है.
आज का रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं (Did you know) कि 22 जून 2007 को भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) अंतरिक्ष में 195 दिन बिताने के बाद सफलतापूर्वक अपनी टीम के साथ अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से धरती पर लौटी थीं. यह उस समय तक किसी महिला द्वारा अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने का रिकॉर्ड था.
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