25 मई: गांधी जी ने रखी साबरमती आश्रम की नींव, चांद की दौड़ और भारत ने बदला संविधान!
25 मई का इतिहास: महात्मा गांधी द्वारा साबरमती आश्रम की स्थापना, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, कैनेडी का चांद पर मानव भेजने का ऐलान, अफ्रीकी संघ का गठन, Star Wars की रिलीज़ और नेत्रहीन पर्वतारोही की एवरेस्ट विजय जैसी प्रमुख घटनाओं की जानकारी.
हर दिन अपने साथ इतिहास की कई सुनहरी यादें और घटनाएं लेकर आता है, जिन्होंने दुनिया को किसी न किसी रूप में आकार दिया है. 25 मई का दिन (25 May Ka Itihas) भी कुछ ऐसी ही ऐतिहासिक घटनाओं, महान उपलब्धियों और प्रेरक प्रसंगों से भरा हुआ है. (25 May History)
आज ही के दिन महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम की स्थापना की थी, जो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना. भारत के न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने संविधान संशोधन पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया. वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने आज ही के दिन चांद पर इंसान को भेजने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की, जिसने ‘स्पेस रेस’ को नई गति दी.
25 मई को अफ्रीकी एकजुटता के प्रतीक 'अफ्रीकी संघ' का गठन हुआ, तो वहीं हॉलीवुड की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में से एक ‘Star Wars: A New Hope’ ने इसी दिन बड़े पर्दे पर धमाकेदार एंट्री की. इस तारीख को दुनिया ने एक नेत्रहीन पर्वतारोही एरिक वाइहेनमेयर की अद्वितीय एवरेस्ट विजय की प्रेरक कहानी भी देखी.
इसके अलावा, आज ही के दिन जन्म लेने और दुनिया को अलविदा कहने वाली कई महान हस्तियों ने इतिहास के पन्नों में अपनी छाप छोड़ी. आइए, नजर डालते हैं 25 मई से जुड़ी उन प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं और व्यक्तित्वों पर, जिन्होंने समय की दिशा को प्रभावित किया.
भारत और विश्व के इतिहास में 25 मई की 6 प्रमुख घटनाएं
1. गांधी जी ने साबरमती आश्रम की स्थापना की – 1915
महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने 25 मई 1915 को अहमदाबाद, गुजरात में साबरमती आश्रम (Sabarmati Ashram) की स्थापना की थी. इसे पहले कोचराब आश्रम के नाम से जाना जाता था, क्योंकि इसकी शुरुआत कोचराब इलाके में हुई थी. बाद में 17 जून 1917 को यह आश्रम साबरमती नदी के किनारे स्थानांतरित हुआ, जहाँ यह “साबरमती आश्रम” के नाम से प्रसिद्ध हुआ.
आश्रम की स्थापना का उद्देश्य सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह और आत्मनिर्भरता जैसे गांधीवादी मूल्यों का पालन करते हुए एक प्रयोगात्मक जीवन जीना था. साबरमती आश्रम को “हरिजन आश्रम” भी कहा गया. यहीं से गांधी जी ने कई प्रमुख आंदोलनों की रूपरेखा तैयार की, जिनमें नमक सत्याग्रह (दांडी यात्रा) भी शामिल है, जिसकी शुरुआत 12 मार्च 1930 को इसी आश्रम से हुई थी.
यह आश्रम गांधी जी का निवास स्थान भी रहा और यहीं से उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के अनेक पहलुओं का संचालन किया. आश्रम में एक संग्रहालय भी है जिसमें गांधी जी के जीवन, दर्शन और कार्यों से संबंधित दुर्लभ दस्तावेज़ और वस्तुएं रखी गई हैं.
2. सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला – 1955
भारत के सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने 25 मई 1955 को शंखरी प्रसाद बनाम भारत संघ मामले में यह फैसला सुनाया कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है. यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र के कानूनी ढांचे में मील का पत्थर साबित हुआ. शंकरी प्रसाद बनाम भारत संघ (1951) यह मामला पहले संशोधन अधिनियम, 1951 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने से संबंधित था, जिसने संपत्ति के अधिकार को कम करके भूमि सुधारों को सुविधाजनक बनाया था.
सुप्रीम कोर्ट ने पहले संशोधन अधिनियम को बरकरार रखा और कहा कि संसद के पास संविधान में संशोधन करने की शक्ति है, जिसमें मौलिक अधिकारों में भी संशोधन शामिल है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार अनुच्छेद 368 के तहत दिया गया है. इस फैसले ने बाद के महत्वपूर्ण मामलों, जैसे कि गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य (1967) और केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) को भी प्रभावित किया.
3. अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी का ऐतिहासिक भाषण – 1961
25 मई 1961 को अमेरिका के 35वें राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी (John F. Kennedy) ने कांग्रेस में भाषण देते हुए ऐलान किया कि अमेरिका इस दशक के अंत (1970 तक) तक इंसान को चांद पर भेजेगा. भाषण में राष्ट्रपति केनेडी ने चांद पर जाने की तैयारियों की न सिर्फ घोषणा बल्कि, उन्होंने अमेरिकी अंतरिक्ष अभियान (United States Space Mission) की शुरुआत के लिए सरकारी बजट में से 170 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने की मांग की. उनका कहना था कि इस राशि को अंतरिक्ष यान बनाने और चांद पर जाने वाले अमेरिकी एस्ट्रॉनॉट को तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.
इस घोषणा ने ‘स्पेस रेस’ को नई दिशा दी और अंततः 1969 में नील आर्मस्ट्रॉन्ग (Neil Armstrong) ने चांद पर कदम रखकर इस सपने को साकार किया.
4. अफ़्रीकी देशों की एकजुटता के लिए 'अफ़्रीकी संघ' का गठन – 1963
अफ़्रीका के इतिहास में पहली बार 25 मई 1963 को 32 अफ़्रीकी देशों ने मिलकर एक संगठन बनाया. इस संगठन का मक़सद था अफ़्रीकी देशों को एकजुट करना. इथियोपिया में हुए एक अफ़्रीकी सम्मेलन में तय हुआ कि अफ़्रीका के कुछ भागों में चल रहे विदेशी शासन के ख़िलाफ़ सभी देश एकजुट हो कर अपनी आवाज़ उठाएंगे. इस संगठन के संविधान में लिखा गया कि सभी अध्यक्ष सदस्य देशों के नागरिकों की ज़िंदगी में सुधार लाएंगे और उनकी संप्रभुता के लिए हर लड़ाई लड़ेंगे.
5. हॉलीवुड फिल्म 'Star Wars: A New Hope' रिलीज़ हुई – 1977
25 मई 1977 को जॉर्ज लुकास (George Lucas) की फिल्म "Star Wars: A New Hope" रिलीज़ हुई. यह फिल्म उस समय के लिए sci-fi सिनेमा में एक बड़ी क्रांति थी. इसने न केवल हॉलीवुड के ब्लॉकबस्टर मॉडल को नया आकार दिया, बल्कि वैश्विक पॉप संस्कृति को भी गहराई से प्रभावित किया. इस फिल्म ने स्पेशल इफेक्ट्स, साउंड डिज़ाइन और सिनेमाई कहानी कहने की शैली में एक नई मिसाल कायम की. हालांकि, भारत में यह फिल्म 1 जुलाई 1978 को रिलीज़ हुई थी.
"A New Hope" असल में Star Wars सीरीज़ की पहली फिल्म थी, लेकिन कहानी के लिहाज़ से यह एपिसोड IV है. इस फिल्म ने दर्शकों को ल्यूक स्काईवॉकर, प्रिंसेस लिया, हान सोलो, डार्थ वेडर, और ओबी-वान केनोबी जैसे आइकॉनिक किरदारों से परिचित कराया. फिल्म की सफलता इतनी जबरदस्त थी कि इसने एक मल्टी-बिलियन डॉलर की फ्रेंचाइज़ को जन्म दिया, जिसमें कई सीक्वल, प्रीक्वल, टीवी शो, एनिमेटेड सीरीज़, उपन्यास, कॉमिक्स और विडियो गेम्स शामिल हैं.
इस दिन को अब कई देशों में ‘गीक प्राइड डे’ (Geek Pride Day) के रूप में भी मनाया जाता है.
6. एरिक वाइहेनमेयर माउंट एवरेस्ट फतह कर रचा इतिहास – 2001
अमेरिकी पर्वतारोही एरिक वाइहेनमेयर (Erik Weihenmayer) 25 मई 2001 को माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने वाले पहले नेत्रहीन व्यक्ति बन गए. उनका यह अद्वितीय और साहसिक कारनामा पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बना. वे जन्म से दृष्टिहीन नहीं थे. 13 वर्ष की उम्र में रेटिनोसिस पिगमेंटोसा (Retinoschisis) नामक रोग के कारण उनकी आंखों की रौशनी चली गई.
एरिक की यह चढ़ाई "Touch the Top of the World" नामक उनकी आत्मकथा और बाद में बनी डॉक्यूमेंट्री में भी दर्ज है. वे केवल एवरेस्ट ही नहीं, बल्कि दुनिया की सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों — जिन्हें Seven Summits कहा जाता है — को फतह करने वाले पहले और अब तक के कुछ ही दृष्टिहीन पर्वतारोहियों में से एक हैं. उन्होंने यह मुकाम 2008 में पूरा किया.
25 मई को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति
1803 – राल्फ वॉल्डो एमर्सन, प्रसिद्ध अमेरिकी कवि, निबंधकार और विचारक
1831 – दाग़ देहलवी (नवाब मिर्जा खाँ 'दाग़'), प्रसिद्ध उर्दू शायर
1878 – बिल रॉबिन्सन, मशहूर अफ्रीकी-अमेरिकी डांसर और अभिनेता
1886 – रास बिहारी बोस, प्रख्यात वकील, शिक्षाविद और आज़ाद हिंद फौज के संस्थापक
25 मई को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1978 – बीरेन मित्रा, भारतीय राजनीतिज्ञ तथा उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री
1998 – लक्ष्मीकांत, हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकार (संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल में से एक)
2005 – सुनील दत्त, हिन्दी फ़िल्म अभिनेता एवं राजनीतिज्ञ
2012 – भगवत रावत, प्रसिद्ध कवि एवं निबंधकार
2020 – बलबीर सिंह, भारत के प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी
25 मई को क्यों याद रखा जाए?
25 मई 2009 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों द्वारा किए गए हमले में सीआरपीएफ के कई जवान शहीद हो गए. यह घटना नक्सलवाद की समस्या और आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर गई.



