3 जुलाई: स्टॉक मार्केट से शारापोवा की जीत तक — आज का इतिहास
3 जुलाई का दिन इतिहास में कई अहम घटनाओं का गवाह रहा है—दुनिया का पहला स्टॉक इंडेक्स, गेटीसबर्ग युद्ध की समाप्ति, शारापोवा की ऐतिहासिक जीत और भारत में विद्यासागर सेतु का निर्माण. जानिए क्या है इस दिन की ऐतिहासिक खासियत. पढ़िए आज का रोचक तथ्य.
हर दिन अपने साथ इतिहास के कई अनमोल पन्ने लेकर आता है. 3 जुलाई (3 July Ka Itihas) का दिन भी विश्व और भारत के इतिहास में कई अहम घटनाओं, महान व्यक्तित्वों के जन्म और दुखद विदाई का साक्षी रहा है.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 3 जुलाई के दिन (3 July History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए जानते हैं 3 जुलाई को इतिहास में क्या-क्या खास हुआ —
भारत और विश्व के इतिहास में 3 जुलाई की प्रमुख घटनाएं
1819 — अमेरिका में पहला चार्टर्ड सेविंग्स बैंक खुला
3 जुलाई 1819 को न्यूयॉर्क सिटी में ‘The Bank for Savings’ नाम से अमेरिका का पहला चार्टर्ड सेविंग्स बैंक शुरू हुआ. इसका उद्देश्य आम नागरिकों, विशेष रूप से मजदूर वर्ग और छोटे कर्मचारियों को बचत की ओर प्रोत्साहित करना था. हालांकि अमेरिका का पहला सेविंग्स बैंक 1816 में बोस्टन में खोला गया था, लेकिन न्यूयॉर्क के लिए यह एक ऐतिहासिक शुरुआत थी, जिसने बाद में देश में वित्तीय समावेशन की दिशा को मजबूत किया.
1863 — अमेरिका में समाप्त हुई सबसे रक्तरंजित लड़ाई 'गेटीसबर्ग'
3 जुलाई 1863 को अमेरिकी गृहयुद्ध (American Civil War) की सबसे निर्णायक और रक्तरंजित लड़ाई — गेटीसबर्ग की लड़ाई (Battle of Gettysburg) — समाप्त हुई. यह लड़ाई 1 से 3 जुलाई 1863 तक पेंसिल्वेनिया (Pennsylvania) राज्य के गेटीसबर्ग कस्बे में लड़ी गई थी, जिसमें यूनियन (उत्तरी राज्य) की सेनाओं ने जनरल रॉबर्ट ई. ली (Robert E. Lee) की अगुवाई वाली कॉन्फेडरेट (दक्षिणी राज्य) सेना को पराजित किया. इस लड़ाई में लगभग 51,000 सैनिक मारे गए या घायल हुए, जिससे यह अमेरिका के इतिहास की सबसे घातक लड़ाइयों में शामिल हो गई. गेटीसबर्ग की जीत ने न केवल संघ की स्थिति मजबूत की, बल्कि दासप्रथा के अंत और अमेरिका के एकीकृत भविष्य की नींव भी रखी. यह युद्ध अमेरिका के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट माना जाता है.
1884 — दुनिया का पहला स्टॉक इंडेक्स प्रकाशित हुआ
3 जुलाई 1884 को दुनिया का पहला स्टॉक इंडेक्स प्रकाशित हुआ, जिसे चार्ल्स डाउ (Charles Dow) ने तैयार किया था. यह इंडेक्स 'Customers’ Afternoon Letter' नामक वित्तीय बुलेटिन में छपा और बाद में इसे 'Dow Jones Transportation Average' कहा गया. इसमें कुल 11 कंपनियां थीं, जिनमें से 9 रेलरोड कंपनियां थीं. यह इंडेक्स शेयर बाजार के प्रदर्शन को मापने के लिए पहली बार इस्तेमाल हुआ और यहीं से आधुनिक फाइनेंशियल इंडेक्स की अवधारणा की शुरुआत मानी जाती है.
1979 — कोलकाता में दूसरे हावड़ा ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू
3 जुलाई 1979 को कोलकाता (Kolkata) में हुगली नदी (Hooghly River) पर दूसरे हावड़ा ब्रिज (Second Hooghly Bridge) यानी 'विद्यासागर सेतु' (Vidyasagar Setu) के निर्माण कार्य की शुरुआत हुई. यह भारत का पहला और उस समय का सबसे लंबा केबल-स्टे ब्रिज था, जिसे कोलकाता और हावड़ा (Howrah) के बीच यातायात को सुगम बनाने के लिए तैयार किया गया. करीब 13 वर्षों में बनकर तैयार हुआ यह पुल 22 अक्टूबर 1992 को जनता के लिए खोला गया. इसका नाम महान समाज सुधारक पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर (Pandit Ishwar Chandra Vidyasagar) के सम्मान में रखा गया था.
2004 — विम्बलडन जीतने वाली पहली रूसी बनीं मारिया शारापोवा
3 जुलाई 2004 को, रूस की मारिया शारापोवा (Maria Sharapova) ने विम्बलडन (Wimbledon) महिला एकल खिताब जीतकर इतिहास रच दिया. उन्होंने फाइनल में दो बार की चैंपियन सेरेना विलियम्स (Serena Williams) को सीधे सेटों में 6–1, 6–4 से हराया. मात्र 17 वर्ष की उम्र में यह खिताब जीतकर शारापोवा न सिर्फ विम्बलडन जीतने वाली सबसे युवा गैर-अमेरिकी खिलाड़ी बनीं, बल्कि ऐसा करने वाली पहली रूसी महिला टेनिस खिलाड़ी भी बनीं. यह जीत उनकी करिश्माई खेल शैली और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गई, जिसने उन्हें विश्व टेनिस में एक सुपरस्टार के रूप में स्थापित कर दिया. यह मुकाबला 3 जुलाई 2004 को लंदन के ऑल इंग्लैंड क्लब में खेला गया था.
3 जुलाई को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1886 — रामचंद्र दत्तात्रेय रानाडे, संस्कृत के विद्वान एवं दर्शनशास्त्री
1892 — हबीब उर रहमान लुधियानवी, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी
1897 — हंसा मेहता, भारत की प्रसिद्ध समाजसेवी, स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद
1941 — अदूर गोपालकृष्णन, मलयालम सिनेमा के प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता
1962 — टॉम क्रूज, मशहूर हॉलीवुड एक्टर
3 जुलाई को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1948 — ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान एमवीसी, भारत-पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए भारतीय सेना के सर्वोच्च रैंकिंग अधिकारी
1982 — केदार पांडे, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ तथा बिहार के मुख्यमंत्री
1996 — राजकुमार, हिन्दी फ़िल्मों के मशहूर अभिनेता
1999 — मनोज कुमार पांडेय, परमवीर चक्र सम्मानित भारतीय सैनिक
2020 — सरोज ख़ान, प्रसिद्ध भारतीय कोरियोग्राफर
3 जुलाई को क्यों याद रखा जाए?
अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस (International Plastic Bag Free Day): हर साल 3 जुलाई को मनाया जाता है. इसकी शुरुआत 2009 में की गई थी, जिसका उद्देश्य लोगों को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक बैग के पर्यावरण पर पड़ने वाले खतरनाक प्रभावों के बारे में जागरूक करना है. ये प्लास्टिक बैग न केवल मिट्टी और जल को प्रदूषित करते हैं, बल्कि जलीय जीवों और पशु-पक्षियों के जीवन के लिए भी घातक साबित होते हैं. इस दिन लोग पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कपड़े, जूट या कागज से बने बैग के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करते हैं और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने का संदेश देते हैं.
आज का रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं (Did you know) कि आज ही के दिन 3 जुलाई 1767 को नॉर्वे का सबसे पुराना समाचार पत्र "Adresseavisen" पहली बार प्रकाशित हुआ था. यह अख़बार आज भी छप रहा है और वर्तमान में Polaris Media Group के अंतर्गत संचालित होता है. यह दुनिया के सबसे पुराने प्रकाशित होने वाले अख़बारों में से एक माना जाता है.
संपादक की कलम से: अगर आप ऐसे ही इतिहास के अनसुने पन्नों में रुचि रखते हैं, तो जुड़े रहिए हमारे साथ हर दिन की ऐतिहासिक झलकियों के लिए.




