ननद-भाभी ने 1 लाख रु से शुरू किया ज्वेलरी बिजनेस, अब है करोड़ों की कमाई — Attrangi Designs की कहानी
ननद-भाभी सलोनी शाह और विदुषी जैन ने सिर्फ 1 लाख रु से Attrangi Designs की शुरुआत की. घर से शुरू हुआ यह आर्टिफिशियल ज्वेलरी बिजनेस आज करोड़ों के कारोबार तक पहुंच चुका है. जानिए कैसे दोनों महिलाओं ने बिना फंडिंग अपना ब्रांड खड़ा किया.
भारत में ज्वेलरी सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रही है. यह लोगों की पसंद, पहचान और मौके का हिस्सा बन चुकी है. खासकर महिलाओं के लिए ज्वेलरी फैशन का अहम हिस्सा है. लेकिन लंबे समय तक अच्छी डिजाइन वाली आर्टिफिशियल ज्वेलरी का बाजार बिखरा हुआ था. कहीं क्वालिटी की दिक्कत थी, तो कहीं डिजाइन की कमी. इसी खाली जगह को पहचानकर दो महिलाओं ने एक छोटा सा कदम उठाया, जो आगे चलकर बड़ा कारोबार बन गया.
यह कहानी है सलोनी शाह और विदुषी जैन की. दोनों अलग शहरों में पली बढ़ीं. एक मुंबई से थीं और दूसरी सूरत से. लेकिन दोनों के भीतर कुछ अपना बनाने की ख्वाहिश थी.
सलोनी के भाई से विदुषी की शादी ने इस पारिवारिक रिश्ते को एक बिजनेस आइडिया में बदल दिया. दोनों को ज्वेलरी और डिजाइनिंग का शौक था और इस तरह 2017 में Attrangi Designs की शुरुआत हुई. आज यह ब्रांड ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह अपनी पहचान बना चुका है.
हाल ही में YourStory से बात करते हुए सलोनी शाह और विदुषी जैन कहती हैं, “जब हम ज्वेलरी और डिजाइन के लिए अपने साझा जुनून के जरिए जुड़े, तो बिजनेस शुरू करने का फैसला बिल्कुल स्वाभाविक लगा. यह सफर सिर्फ एक कंपनी शुरू करने का नहीं था, बल्कि अपने शौक को ऐसी चीज में बदलने का था, जो हर दिन दूसरी महिलाओं की जिंदगी को छू सके.”
डिजाइन और बिजनेस की साझा सोच
सलोनी शाह का बचपन मुंबई में बीता. घर में डिजाइन और क्राफ्ट को लेकर माहौल था. इसी वजह से उनकी दिलचस्पी धीरे-धीरे ज्वेलरी की तरफ बढ़ी. उन्होंने कॉमर्स की पढ़ाई के बाद Gemological Institute of America से ज्वेलरी डिजाइन सीखी.
वहीं विदुषी जैन सूरत में बड़ी हुईं. सूरत का कारोबारी माहौल और फैशन इंडस्ट्री का असर बचपन से उनके आसपास था. उन्होंने FLAME University से मार्केटिंग और एडवरटाइजिंग की पढ़ाई की और बाद में BookMyShow में काम किया.
दोनों की सोच अलग थी, लेकिन एक दूसरे को पूरा करती थी. सलोनी डिजाइन समझती थीं और विदुषी ब्रांड और ग्राहकों की पसंद. यही वजह रही कि Attrangi Designs की शुरुआत सिर्फ एक शौक बनकर नहीं रह गई.
सलोनी बताती हैं, “हम दोनों अलग बैकग्राउंड से आए थे. लेकिन ज्वेलरी और डिजाइन को लेकर सोच एक जैसी थी. शुरुआत में हमने इसे बिजनेस की तरह नहीं देखा था. हमें बस ऐसा कुछ बनाना था जो महिलाओं के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन सके. धीरे-धीरे समझ आया कि बाजार में एक बड़ी कमी है और वहीं से Attrangi की असली शुरुआत हुई.”

घर से शुरू हुआ काम, प्रदर्शनियों से मिले पहले ग्राहक
जब Attrangi Designs शुरू हुआ तब निवेश बहुत छोटा था. करीब ₹1 लाख की रकम से दोनों ने काम शुरू किया. यह पैसा उनकी अपनी बचत और परिवार से मिले छोटे सहयोग से आया था. उस समय कोई बड़ा ऑफिस नहीं था. काम घर से ही चलता था. शुरुआती दिनों में दोनों शहर शहर जाकर प्रदर्शनियों में हिस्सा लेती थीं और ग्राहकों से सीधे मिलती थीं.
उन्हें जल्द समझ आ गया कि भारत में गोल्ड और डायमंड ज्वेलरी के बड़े ब्रांड मौजूद हैं, लेकिन इमिटेशन ज्वेलरी का बाजार अब भी बिखरा हुआ है. महिलाएं अच्छी डिजाइन चाहती थीं, लेकिन हर बार महंगी ज्वेलरी खरीदना संभव नहीं था. इसी जरूरत ने Attrangi Designs को दिशा दी.
विदुषी कहती हैं, “हमने शुरुआत से ही खर्चों को बहुत कंट्रोल में रखा. हर ऑर्डर और हर डिजाइन पर ध्यान दिया. हमें पता था कि अगर बिजनेस को लंबा चलाना है तो मुनाफे और खर्च दोनों को समझना पड़ेगा. शायद यही वजह है कि हमने बिना किसी बाहरी फंडिंग के लगातार ग्रोथ हासिल की.”
ऑनलाइन से बदली कारोबार की रफ्तार
शुरुआती कुछ सालों तक कारोबार धीरे-धीरे बढ़ता रहा. फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म ने Attrangi Designs की रफ्तार बदल दी. बेहतर प्रोडक्ट फोटोग्राफी, सोशल मीडिया मार्केटिंग और वेबसाइट पर फोकस करने से ऑनलाइन ऑर्डर बढ़ने लगे. आज कंपनी के करीब 75 प्रतिशत ग्राहक ऑनलाइन आते हैं.
ऑफलाइन विस्तार भी धीरे धीरे हुआ. 2022 में मुंबई में पहला फ्लैगशिप स्टोर खुला. इसके बाद सूरत और चेन्नई में भी स्टोर शुरू हुए. कंपनी ने 2023 में खुद को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में बदला. आज Attrangi Designs की टीम में करीब 40 लोग काम करते हैं.
सलोनी शाह कहती हैं, “हमारे लिए सबसे अहम बात यह थी कि ग्राहक हम पर भरोसा करें. हमने सिर्फ डिजाइन बेचने की कोशिश नहीं की. हम चाहते थे कि ग्राहक को लगे कि वह सही कीमत पर अच्छी क्वालिटी खरीद रही है. ऑनलाइन दुनिया में भरोसा बनाना आसान नहीं होता, लेकिन लगातार काम करने से चीजें बदलती गईं.”

Attrangi Designs की टीम
बढ़ते कारोबार के साथ आईं नई चुनौतियां
जैसे-जैसे कारोबार बढ़ा, चुनौतियां भी बढ़ीं. सबसे बड़ी चुनौती डिजिटल मार्केटिंग रही. ऑनलाइन विज्ञापन लगातार महंगे होते गए. ग्राहकों तक पहुंचने की लागत बढ़ने लगी. इसके अलावा ज्वेलरी बिजनेस में हजारों डिजाइन और अलग अलग स्टॉक संभालना भी मुश्किल काम था.
कंपनी ने धीरे-धीरे सिस्टम मजबूत किए. किस डिजाइन की मांग ज्यादा है और कौन सा प्रोडक्ट कम चल रहा है, इसकी निगरानी शुरू हुई. इससे इन्वेंट्री संभालना आसान हुआ. आज Attrangi Designs का बड़ा हिस्सा अपने प्लेटफॉर्म से बिक्री करता है. केवल छोटा हिस्सा मार्केटप्लेस से आता है.
विदुषी जैन कहती हैं, “ज्वेलरी बिजनेस बाहर से जितना आसान दिखता है, अंदर से उतना ही जटिल होता है. हर डिजाइन का अलग रिस्क होता है. डिजिटल मार्केटिंग भी हर कुछ महीने में बदल जाती है. लेकिन हमने हर चुनौती को सीखने की तरह लिया. धीरे धीरे समझ आया कि लगातार सुधार ही असली ताकत है.”
अब दिल्ली, बेंगलुरु और दुबई तक विस्तार की योजना
आज Attrangi Designs करोड़ों के कारोबार तक पहुंच चुका है. वित्त वर्ष 2021 में जहां कंपनी का रेवेन्यू करीब ₹1.8 करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2024 तक यह बढ़कर ₹18 करोड़ तक पहुंच गया. कंपनी को उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष में यह आंकड़ा करीब ₹25 करोड़ तक पहुंच सकता है.
अब कंपनी की नजर नए शहरों और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर है. दिल्ली और बेंगलुरु में स्टोर खोलने की तैयारी चल रही है. दुबई में भी कंपनी को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. वहां अभी पॉप अप इवेंट किए जाते हैं और भविष्य में स्थायी स्टोर खोलने की योजना है.
सलोनी शाह और विदुषी जैन कहती हैं, “हमने हमेशा धीरे और संतुलित तरीके से आगे बढ़ने की कोशिश की है. हमारे लिए सिर्फ बड़ा बनना जरूरी नहीं है. हम ऐसा ब्रांड बनाना चाहते हैं जिस पर महिलाएं भरोसा करें. आने वाले समय में हमारा फोकस नए शहरों, बेहतर डिजाइन और मजबूत ग्राहक अनुभव पर रहेगा.”
Attrangi Designs की कहानी बताती है कि हर बड़ा कारोबार भारी निवेश से नहीं बनता. कई बार सही समझ, धैर्य और लगातार मेहनत छोटी शुरुआत को भी बड़ी पहचान दिला देती है. दो महिलाओं का एक छोटा सा प्रयोग आज हजारों ग्राहकों तक पहुंच चुका है. यही इस सफर की सबसे बड़ी कामयाबी है.



