11 सैनिकों ने निभाया पिता का फर्ज, शहीद दोस्त की बेटी की शादी में दिया 6 लाख का कन्यादान
उत्तर प्रदेश के बागपत के काठा गांव में शहीद सैनिक हरेंद्र सिंह की बेटी की शादी में 11 सैनिक पिता बनकर पहुंचे. उन्होंने शादी की हर रस्म निभाई और करीब 6 लाख रुपये का कन्यादान किया. सैनिकों की हथेलियों पर चलकर दुल्हन स्टेज तक पहुंची. यह दृश्य फौजी भाईचारे की भावुक मिसाल बन गया.
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के काठा गांव में हुई एक शादी ने फौजी भाईचारे की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं. इस शादी में दुल्हन के पिता मौजूद नहीं थे. लेकिन उनके साथी सैनिक परिवार बनकर खड़े हो गए और उन्होंने वही जिम्मेदारी निभाई जो आमतौर पर एक पिता निभाता है.
काठा गांव के रहने वाले हवलदार हरेंद्र सिंह साल 2001 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे. वे 21 जाट रेजिमेंट में तैनात थे. साल 2020 में अरुणाचल प्रदेश में एक सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया था. इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. पत्नी अमृता देवी को तीन बच्चों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी.
समय बीतता गया, लेकिन हरेंद्र के साथ ड्यूटी करने वाले उनके साथी सैनिकों ने परिवार का साथ नहीं छोड़ा. जब बेटी प्राची की शादी तय हुई तो इन सैनिकों ने फैसला किया कि वे अपने दोस्त की बेटी की शादी में पिता की भूमिका निभाएंगे. इसके लिए उन्होंने सेना से छुट्टी ली और अलग अलग राज्यों से बागपत के काठा गांव पहुंच गए.
शादी के दिन सुबह से ही सैनिक पूरे आयोजन में जुट गए. उन्होंने बारात के स्वागत से लेकर मंडप की हर रस्म तक जिम्मेदारी संभाली. मंडप में दुल्हन के साथ खड़े होकर उन्होंने यह महसूस नहीं होने दिया कि उसके पिता इस दुनिया में नहीं हैं.
इस शादी में रिटायर्ड कैप्टन राजेश गुलिया, कैप्टन यशपाल सिंह, सूबेदार धर्मवीर सिंह, सूबेदार रामरतन, सूबेदार धर्मेंद्र, हवलदार किरनपाल समेत कई सैनिक शामिल हुए. दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा से भी कई जवान खास तौर पर इस शादी में पहुंचे. करीब 10 से 12 सैनिकों ने पूरे समारोह में सक्रिय भूमिका निभाई.
सैनिकों ने मिलकर दुल्हन प्राची के कन्यादान के लिए करीब साढ़े छह लाख रुपये की राशि भी दी. इस कदम ने गांव के लोगों को भावुक कर दिया. यह सिर्फ आर्थिक मदद नहीं थी बल्कि अपने साथी के परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाने का प्रतीक भी था.
शादी के दौरान सबसे भावुक पल तब आया जब सैनिकों ने दुल्हन को स्टेज तक पहुंचाया. सभी सैनिक जमीन पर बैठ गए और अपने हाथ आगे कर दिए. दुल्हन प्राची ने उन्हीं हाथों को सहारा बनाकर आगे कदम बढ़ाए और स्टेज तक पहुंची. यह दृश्य ऐसा लग रहा था जैसे पिता की जगह पूरी फौज बेटी के कदमों को सहारा दे रही हो. वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं.
प्राची परिवार की सबसे बड़ी बेटी है. उसने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर ली है और बैंकिंग सेक्टर की प्रारंभिक परीक्षा भी पास कर चुकी है. उसकी मुख्य परीक्षा अभी बाकी है. दूल्हा शुभम नोएडा में एचडीएफसी बैंक में सहायक शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं.
परिवार में प्राची का बड़ा भाई हर्षित भी सेना में शामिल हो चुका है. वह साल 2025 में अग्निवीर भर्ती के तहत सेना में भर्ती हुआ और इस समय सिक्किम में तैनात है. छोटा भाई अक्षित फिलहाल बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स की पढ़ाई कर रहा है.
जब विदाई का समय आया तो माहौल बेहद भावुक हो गया. बेटी की डोली उठी तो वहां मौजूद सैनिक भी खुद को रोक नहीं पाए. उनकी आंखों में भी आंसू थे. गांव के लोगों ने पहली बार इतनी करीब से देखा कि फौज में बनने वाले रिश्ते सिर्फ ड्यूटी तक सीमित नहीं रहते. ये रिश्ते जिंदगी भर निभाए जाते हैं.
बागपत की यह शादी आज सोशल मीडिया और आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बनी हुई है. यह घटना बताती है कि भारतीय सेना का भाईचारा सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं होता. सैनिक अपने साथियों के परिवार को भी अपना परिवार मानते हैं और हर मुश्किल में साथ खड़े रहते हैं.
यह कहानी इंसानियत, दोस्ती और फौजी भाईचारे की एक ऐसी मिसाल है जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा.




