बिहार में इकोटूरिज्म को बढ़ावा, राज्य सरकार ने 276 प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए प्राइवेट कंपनियों को दिया न्योता
बिहार सरकार ने PPP मॉडल के तहत 276 इकोटूरिज्म परियोजनाओं में निजी निवेश के लिए रास्ता खोल दिया है. निवेशकों को 30 साल की लीज, Viability Gap Funding और सरकारी सहयोग मिलेगा. जानिए किन परियोजनाओं में निवेश का मौका है और सरकार की पूरी योजना क्या है...
बिहार सरकार ने राज्य में इकोटूरिज्म को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सरकार अब पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल के तहत राज्य के सैकड़ों पर्यटन स्थलों के विकास के लिए निजी निवेशकों को आमंत्रित कर रही है.
इस पहल की शुरुआत हाल ही में पटना में आयोजित Ecotourism Investors Meet 2026 से हुई. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री राम चंद्र प्रसाद ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया. इस दौरान देशभर से आए संभावित निवेशकों ने बिहार में इकोटूरिज्म से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा की.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राम चंद्र प्रसाद ने कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान निवेशकों को आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार हर संभव मदद करेगी. उन्होंने उद्योग जगत से बिहार के विकास में भागीदार बनने की अपील की. उन्होंने कहा कि बिहार तेजी से निवेश के लिए आकर्षक राज्य बनकर उभर रहा है.
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मार्गदर्शन में पर्यटन और इकोटूरिज्म को मजबूत करने की रणनीति के तहत इस निवेशक सम्मेलन का आयोजन किया गया है.
276 इकोटूरिज्म प्रोजेक्ट्स में निवेश का मौका
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद किशोर ने कहा कि विभाग की ओर से जारी Request for Proposal यानी RFP पर निवेशकों से सुझाव मांगे गए हैं. उन्होंने कहा कि सभी सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम RFP तैयार किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि सरकार निवेशकों के लिए अनुकूल नीति तैयार कर रही है, ताकि वे लंबे समय तक बिहार के इकोटूरिज्म क्षेत्र से जुड़े रह सकें.
सरकार ने राज्य में कुल 276 इकोटूरिज्म परियोजनाओं की पहचान की है. इनका विकास Design, Build, Finance, Operate and Transfer यानी DBFOT मॉडल के तहत किया जाएगा. इसके साथ Viability Gap Funding यानी VGF के जरिए आर्थिक सहायता भी दी जाएगी.
इन परियोजनाओं में 29 जलाशयों पर आधारित इकोटूरिज्म प्रोजेक्ट शामिल हैं. इसके अलावा 247 परियोजनाएं तालाबों, झीलों, वेटलैंड और अन्य जल निकायों से जुड़ी हैं.
पहली श्रेणी की परियोजनाओं के लिए प्रति साइट निवेशक का न्यूनतम वार्षिक टर्नओवर 10 करोड़ रुपये होना जरूरी होगा. यदि कोई निवेशक एक से अधिक परियोजनाओं के लिए आवेदन करता है तो यह सीमा अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक जाएगी. दूसरी श्रेणी की परियोजनाओं के लिए प्रति साइट न्यूनतम वार्षिक टर्नओवर 2 करोड़ रुपये रखा गया है. इसकी अधिकतम सीमा 10 करोड़ रुपये होगी.
एडवेंचर और नेचर टूरिज्म पर रहेगा फोकस
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं में एडवेंचर स्पोर्ट्स, वाटर स्पोर्ट्स और प्रकृति आधारित पर्यटन गतिविधियां विकसित की जाएंगी. इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. विभिन्न स्थानों पर इकोटूरिज्म इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए निजी कंपनियों से Expression of Interest यानी EOI पहले ही आमंत्रित किए जा चुके हैं.
विभाग ने भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य में इकोटूरिज्म परियोजना के लिए RFP भी जारी कर दिया है. इसके लिए 28 जुलाई तक बोलियां जमा की जा सकती हैं.
30 साल की लीज और सरकारी मदद का भरोसा
प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरविंदर सिंह ने बताया कि चयनित निजी डेवलपर्स को परियोजना स्थल 30 वर्षों की लीज पर दिए जाएंगे. पात्र परियोजनाओं को Viability Gap Funding के तहत वित्तीय सहायता भी मिलेगी, जिससे उनकी व्यावसायिक व्यवहार्यता बेहतर होगी.
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार पिछले कुछ वर्षों में इकोटूरिज्म के विकास पर 500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी है. उन्होंने करमचट डैम, मुंडेश्वरी, जू सफारी, नेचर सफारी, रोपवे और ककोलत जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
रोजगार बढ़ाने और पर्यटन को नई रफ्तार देने की तैयारी
इस निवेशक सम्मेलन में Bihar Industries Association, Bihar Chamber of Commerce and Industries और Confederation of Indian Industry यानी CII के प्रतिनिधियों के साथ पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे.
सरकार को उम्मीद है कि निजी निवेश बढ़ने से बिहार में इकोटूरिज्म का तेजी से विस्तार होगा. इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य देश के प्रमुख नेचर टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा.



