भारत की थाली में छिपी भूख से कैसे लड़ रहा है Better Nutrition
भारत में कुपोषण की असली वजह क्या है? Better Nutrition की कहानी पढ़िए, जहां फाउंडर प्रतीक रस्तोगी ने बीज और मिट्टी से पोषण सुधारने की शुरुआत की. जानिए कैसे बायोफोर्टिफाइड आटा, चावल और दाल सेहत और खेती दोनों की तस्वीर बदल रहे हैं.
खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति (SOFI, 2025) रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की लगभग 12% आबादी (172 मिलियन लोग) अल्पपोषित है. हालाँकि यह वर्ष 2006 के 243 मिलियन से बेहतर है, फिर भी भारत अभी भी अल्पपोषण के मामले में विश्व स्तर पर 48वें तथा एशिया में सातवें स्थान पर है. देश में, 42.9% लोग स्वस्थ आहार का खर्च नहीं उठा सकते हैं, क्योंकि क्रय शक्ति समता (PPP) के संदर्भ में खाद्य लागत 2.77 अमेरिकी डॉलर (2017) से बढ़कर 4.07 अमेरिकी डॉलर (2024) हो गई है.
भारत में खाने की कमी कभी समस्या नहीं रही. हर घर में रोटी है, चावल है, दाल है. फिर भी देश में खून की कमी, कमजोरी और बच्चों में कुपोषण आम है. यह एक अजीब सा विरोधाभास है. पेट भरा है, लेकिन शरीर अधूरा. इसी सवाल से एक नई सोच ने जन्म लिया. इसी सोच का नाम है Better Nutrition.
YourStory हिंदी से बात करते हुए, Better Nutrition के फाउंडर और CEO प्रतीक रस्तोगी बताते हैं कि उन्होंने खुद खेती, फूड इनोवेशन और किसानों के साथ सालों तक काम किया. खेतों में, गांवों में, और परिवारों के बीच उन्होंने एक बात बार बार देखी. लोग भरपेट खा रहे थे, लेकिन फिर भी आयरन, जिंक और प्रोटीन की कमी से जूझ रहे थे.
प्रतीक कहते हैं, “मुझे समझ आ गया था कि दिक्कत हमारे खाने में नहीं, हमारी फसल में है. अगर बीज और मिट्टी ही कमजोर होंगे, तो थाली कैसे मजबूत होगी.”
यहीं से यह विचार जन्मा कि पोषण की समस्या को बाजार में नहीं, खेत में ठीक करना होगा. यही सोच Better Nutrition की नींव बनी.
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा गेहूं, चावल और दाल खाने वाला देश है. फिर भी कुपोषण की तस्वीर डराने वाली है. वर्षों से समाधान के नाम पर सप्लीमेंट और ऊपर से मिलाए गए पोषक तत्व दिए जाते रहे. लेकिन यह तरीका हर घर तक नहीं पहुंच पाया.
Better Nutrition ने एक अलग रास्ता चुना. उनका मानना है कि लोगों को नया खाना सिखाने की जरूरत नहीं. जरूरत है उसी रोजमर्रा के खाने को ज्यादा ताकतवर बनाने की.
प्रतीक कहते हैं, “हमें डाइट बदलने की नहीं, अनाज को बेहतर बनाने की जरूरत है.”
इसी सोच से TriNutriMax नाम की प्रक्रिया विकसित हुई. यह एक ऐसा तरीका है, जिसमें बीज और मिट्टी के स्तर पर फसल को ज्यादा पोषक बनाया जाता है. आयरन, जिंक, कैल्शियम और प्रोटीन सीधे फसल के भीतर विकसित होते हैं. बिना किसी केमिकल मिलावट के.
Better Nutrition की शुरुआत आसान नहीं थी. कंपनी की नींव 2023 में लखनऊ से रखी गई. प्रतीक ने करीब पचास लाख रुपये का शुरुआती निवेश खुद किया.
यह पैसा विज्ञापन या पैकेजिंग पर नहीं गया. यह पैसा गया खेतों में, रिसर्च में, बीजों के परीक्षण में और किसानों के साथ काम करने में.
प्रतीक बताते हैं, “हमने पहले विज्ञान को साबित किया. ब्रांड बाद में बना.”
कई मौसमों तक खेतों में प्रयोग हुए. सही बीज चुने गए. मिट्टी को समझा गया. इसी दौरान Greenday किसान नेटवर्क की नींव भी पड़ी.
आज Better Nutrition बीस हजार से ज्यादा किसानों के साथ काम करता है. कई राज्यों में उनकी खरीद और सप्लाई चेन फैली है. हर बैच की जांच होती है.
यहां एक खास बात है. कंपनी XRF टेक्नोलॉजी से हर फसल की पोषण जांच करती है. यानी जो लिखा है, वही नापा गया है.
प्रतीक साफ कहते हैं, “हम मानकर नहीं चलते. हम मापकर बताते हैं.”
यही वजह है कि Better Nutrition के आटा, चावल, दाल और मिलेट्स भरोसे के साथ घरों तक पहुंच रहे हैं.
Better Nutrition ने प्री-सीड और सीड फंडिंग राउंड में कुल 13 करोड़ रुपये जुटाए. शार्क टैंक इंडिया में आने के बाद ब्रांड को नई पहचान मिली.
खेल जगत की स्टार पीवी सिंधु और मशहूर शेफ पंकज भदौरिया जैसे नाम निवेशकों में जुड़े. इसके अलावा कृषि मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से 50 लाख रुपये का सरकारी अनुदान भी मिला.
इन संसाधनों से कंपनी ने किसान नेटवर्क बढ़ाया, सप्लाई चेन मजबूत की और पोषण जांच की अपनी व्यवस्था खड़ी की.
आज Better Nutrition के उत्पाद Blinkit, Zepto, Instamart और BigBasket जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं. दोबारा खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
वित्त वर्ष 25 में कंपनी ने 11 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू हासिल किया. अगले साल 25 करोड़ को पार करने का लक्ष्य है.
Better Nutrition के लिए मुनाफा और सामाजिक असर अलग नहीं हैं. कंपनी किसानों को बीज, ट्रेनिंग और खरीद की गारंटी देती है. इससे गांवों में स्थिर आमदनी बनती है.
Greenday सेंटर किसान, छोटे उद्यमी और उपभोक्ता को जोड़ने का काम करते हैं. जैसे जैसे मांग बढ़ती है, वैसे वैसे असर भी बढ़ता है.
प्रतीक कहते हैं, “हमारा हर किलो अनाज मिट्टी, किसान और सेहत तीनों को बेहतर करता है.”
सबसे बड़ी चुनौती थी लोगों को यह समझाना कि बायोफोर्टिफाइड क्या होता है. यह शब्द नया था. नियम और मानक भी पूरी तरह तय नहीं थे.
लेकिन CIMMYT, IARI, BISA और IIWBR जैसे संस्थानों के साथ काम करके कंपनी ने खुद को मजबूत किया. जो मुश्किल था, वही आज उनकी पहचान बन गया.
अगले दो सालों में Better Nutrition का सपना है कि वह भारत का सबसे भरोसेमंद पोषण ब्रांड बने. कंपनी रेडी टू कुक फूड, स्नैक्स और तेल जैसी श्रेणियों में भी कदम रखना चाहती है.
400 से ज्यादा शहरों तक पहुंचने की योजना है. सरकारी और संस्थागत कार्यक्रमों में भी बायोफोर्टिफाइड अनाज पहुंचाने का लक्ष्य है.
प्रतीक का कहना है, “हम चाहते हैं कि पोषक खाना खास न रहे. वह हर घर की सामान्य आदत बने.”
अंत में प्रतीक युवा उद्यमियों से कहते हैं, “अगर आप खेती और पोषण में काम करना चाहते हैं, तो सब्र रखना सीखिए. बीज समय लेते हैं. लेकिन जब उगते हैं, तो पूरी तस्वीर बदल देते हैं.”
Better Nutrition की कहानी यही सिखाती है कि असली बदलाव दिखावे से नहीं, जड़ों से आता है. और जब मिट्टी मजबूत होती है, तो पूरा देश स्वस्थ होता है.



