कॉर्पोरेट जॉब छोड़ किया स्टार्टअप और चमकाई 250 किराना स्टोर की किस्मत! BuyBuyCart की कहानी...
आज जब रिटेल तेज़ी से बदल रहा है, नोएडा का स्टार्टअप BuyBuyCart यह दिखाता है कि बिना भारी फीस और दबाव के भी एक टिकाऊ मॉडल खड़ा किया जा सकता है. यह कहानी बताती है कि अगर ज़मीन की समझ और नीयत साफ़ हो, तो छोटे किराना स्टोर भी भविष्य की रिटेल तस्वीर में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
भारत में किराना स्टोर सिर्फ खरीदारी की जगह नहीं होते. वे मोहल्ले की पहचान होते हैं. सुबह की पहली चाय से लेकर रात के आख़िरी राशन तक, ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा इन्हीं दुकानों से जुड़ा होता है. लेकिन बीते कुछ वर्षों में, खासकर कोविड के दौर ने, इन छोटे दुकानों की असली मुश्किलें सामने ला दीं. सप्लाई समय पर नहीं पहुँचना, ब्रांड्स की कमी, कम मुनाफा, उधारी का दबाव और पुराने बिलिंग सिस्टम. बड़े शहरों में शायद इसके विकल्प थे, लेकिन छोटे शहरों (टियर 2, टियर 3) और कस्बों में किराना स्टोर खुद को अकेला महसूस कर रहे थे.
इसी दौर में कॉर्पोरेट दुनिया से जुड़े आशीष पांडे (Ashish Pandey) और सुमित कुमार (Sumit Kumar) ने ज़मीनी हकीकत को नज़दीक से देखा. उन्होंने महसूस किया कि समस्या दुकानदार की मेहनत में नहीं, बल्कि सिस्टम की कमी में है.
ऐसे में सवाल साफ़ था — क्या छोटे दुकानदारों को भी आधुनिक रिटेल की ताकत मिल सकती है, और वो भी बिना भारी फ्रेंचाइज़ फीस और रॉयल्टी के बोझ के?
इसी सवाल से 2021 में नोएडा से शुरू हुआ BuyBuyCart, जो धीरे धीरे एक वैकल्पिक रिटेल मॉडल बनता चला गया.
किराना स्टोर से निकली सोच
आशीष पांडे और उनकी टीम ने देखा कि भारत के ज़्यादातर किराना स्टोर असंगठित रिटेल का हिस्सा हैं. उनके पास ग्राहक तो हैं, भरोसा भी है, लेकिन संसाधन नहीं हैं. सप्लाई चेन बिखरी हुई है. टेक्नोलॉजी की पहुँच सीमित है. नतीजा यह कि वही दुकानदार, जो सालों से मोहल्ले की ज़रूरतें समझता है, बड़े रिटेल से पिछड़ जाता है.
BuyBuyCart की सोच यहीं से अलग होती है. यह किसी पुराने सिस्टम को हटाने की कोशिश नहीं करता, बल्कि उसी किराना स्टोर को नए औज़ार देता है. आधुनिक स्टोर फॉर्मेट, डिजिटल बिलिंग, इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर और भरोसेमंद सप्लाई चेन. यह सब बिना फ्रेंचाइज़ फीस और बिना रॉयल्टी के.
हाल ही में YourStory हिंदी से हुई बातचीत में BuyBuyCart के को-फाउंडर और डायरेक्टर आशीष पांडे कहते हैं, “हमने किराना स्टोर को कमज़ोर नहीं, बल्कि सिस्टम से दूर पाया. जब सही सपोर्ट मिलता है, तो वही दुकान सबसे मज़बूत बन जाती है.”
ज़ीरो फीस मॉडल
भारत में रिटेल फ्रेंचाइज़ का नाम सुनते ही भारी निवेश और लगातार रॉयल्टी का डर सामने आ जाता है. यही वजह है कि कई छोटे उद्यमी आगे बढ़ने से रुक जाते हैं. BuyBuyCart ने इस डर को सीधे चुनौती दी.
ज़ीरो फ्रेंचाइज़ और ज़ीरो रॉयल्टी मॉडल सिर्फ एक बिज़नेस रणनीति नहीं थी, बल्कि भरोसे की परीक्षा थी. शुरुआत में लोगों को शक था कि बिना फीस के इतना सपोर्ट कैसे संभव है. लेकिन जैसे जैसे स्टोर खुले और स्थिर हुए, भरोसा बनता गया. जल्दी ब्रेक ईवन, बेहतर मार्जिन और कम आर्थिक दबाव ने इस मॉडल को मज़बूती दी.
आशीष पांडे मानते हैं, “जब हम फीस हटाते हैं, तो जोखिम कम होता है. उद्यमी फिर सिर्फ कारोबार पर ध्यान देता है, डर पर नहीं.”

BuyBuyCart की टीम
छोटे शहरों में असली बदलाव
BuyBuyCart ने बड़े महानगरों के बजाय उन शहरों को चुना, जहाँ संगठित रिटेल की कमी थी लेकिन मांग तेज़ी से बढ़ रही थी. इन इलाकों में ग्राहक बेहतर प्रोडक्ट, सही दाम और सुविधा चाहते हैं. वहीं दुकानदार अपने कारोबार को नए स्तर पर ले जाना चाहते हैं.
कंपनी ने स्टोर मालिकों के कंधों से कई बोझ खुद उठाए. मार्केटिंग, इन्वेंट्री प्लानिंग, ब्रांड ऑनबोर्डिंग और मार्जिन ऑप्टिमाइज़ेशन. जब क्विक कॉमर्स का दबाव बढ़ा, तो मोबाइल ऐप के ज़रिये स्टोर की इन्वेंट्री ऑनलाइन की गई, ताकि आसपास के इलाके में तेज़ डिलीवरी संभव हो सके.
आशीष पांडे कहते हैं, “हम सिर्फ स्टोर नहीं खोलते, हम एक पूरा सिस्टम देते हैं. ताकि दुकानदार अपने ग्राहक पर ध्यान दे सके.”
250 स्टोर, 1000 नौकरियां
आज BuyBuyCart का नेटवर्क 250 से ज़्यादा स्टोर तक पहुँच चुका है. यह विस्तार किसी आक्रामक प्रचार या भारी निवेश से नहीं हुआ, बल्कि ज़ीरो फीस मॉडल और ज़मीनी भरोसे से संभव हुआ. तेज़ स्टोर सेटअप और स्थिर सप्लाई चेन ने नए उद्यमियों को आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया.
इस मॉडल का असर सिर्फ स्टोर तक सीमित नहीं रहा. 1,000 से अधिक लोगों को स्थानीय स्तर पर रोज़गार मिला. कई ऐसे लोग, जिन्होंने पहले कभी रिटेल में कदम नहीं रखा था, आज संगठित कारोबार का हिस्सा हैं. कंपनी ने बाहरी फंडिंग के बजाय आंतरिक संसाधनों पर भरोसा किया, जिससे वित्तीय अनुशासन और संतुलित ग्रोथ बनी रही.
आशीष पांडे का कहना है, “हम तेज़ नहीं, सही ग्रोथ चाहते हैं. हमारा फोकस आज नहीं, आने वाले सालों पर है.”
भविष्य की योजनाएं
BuyBuyCart की कहानी किसी बड़े वादे या चमकदार नारों की कहानी नहीं है. यह उन छोटे दुकानदारों की कहानी है, जो हर सुबह शटर उठाते हैं और अपने मोहल्ले पर भरोसा करते हैं. यह उस सोच की कहानी है, जो मानती है कि कारोबार सिर्फ मुनाफे से नहीं, साझेदारी से चलता है.
आगे की राह भी इसी सोच से जुड़ी है. छोटे शहरों में और गहराई से काम करना. सप्लाई चेन को मज़बूत बनाना. प्राइवेट लेबल प्रोडक्ट्स के ज़रिये गुणवत्ता और भरोसा बढ़ाना. BuyBuyCart का लक्ष्य सिर्फ स्टोर बढ़ाना नहीं है, बल्कि ऐसा रिटेल इकोसिस्टम बनाना है, जहाँ दुकानदार, ग्राहक और समुदाय तीनों साथ आगे बढ़ें.
आज जब रिटेल तेज़ी से बदल रहा है, BuyBuyCart यह दिखाता है कि बिना भारी फीस और दबाव के भी एक टिकाऊ मॉडल खड़ा किया जा सकता है. यह कहानी बताती है कि अगर ज़मीन की समझ और नीयत साफ़ हो, तो छोटे किराना स्टोर भी भविष्य की रिटेल तस्वीर में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.



