केंद्र सरकार लाई ECLGS 5.0 योजना, छोटे कारोबारियों को मिलेगा 2.55 लाख करोड़ रु का क्रेडिट सपोर्ट
नई योजना के तहत MSME और गैर MSME कंपनियों को अतिरिक्त कर्ज दिया जाएगा. सरकार ने इस योजना में गारंटी फीस को पूरी तरह खत्म कर दिया है. यानी कारोबारियों को इसके लिए अलग से कोई फीस नहीं देनी होगी. सरकार ने लोन चुकाने की अवधि भी आसान रखी है.
वेस्ट एशिया में जारी तनाव का असर अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है. भारत के कारोबार और सप्लाई चेन पर इसका असर कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0 को मंजूरी दे दी गई है.
इस योजना का मकसद उन कारोबारों को राहत देना है, जो मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों की वजह से नकदी की कमी और कारोबारी दबाव का सामना कर रहे हैं. सरकार का मानना है कि इससे कंपनियों को कामकाज जारी रखने, कर्मचारियों की नौकरियां बचाने और सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने में मदद मिलेगी.
सरकार ने इस योजना के तहत कुल 2.55 लाख करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त क्रेडिट फ्लो का लक्ष्य रखा है. इसमें एयरलाइन सेक्टर के लिए 5 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान भी शामिल है.
नई योजना के तहत MSME और गैर MSME कंपनियों को अतिरिक्त कर्ज दिया जाएगा. इसके लिए नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) सदस्य लेंडिंग संस्थानों को गारंटी कवर देगी. MSME सेक्टर के लिए सरकार 100 फीसदी गारंटी देगी, जबकि गैर MSME और एयरलाइन सेक्टर के लिए 90 फीसदी गारंटी कवर मिलेगा.
सरकार ने इस योजना में गारंटी फीस को पूरी तरह खत्म कर दिया है. यानी कारोबारियों को इसके लिए अलग से कोई फीस नहीं देनी होगी. इससे कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा.
योजना के अनुसार, पात्र MSME और गैर MSME कंपनियां वित्त वर्ष 2025 26 की चौथी तिमाही में इस्तेमाल की गई पीक वर्किंग कैपिटल का 20 फीसदी तक अतिरिक्त कर्ज ले सकेंगी. हालांकि इसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपये तय की गई है.
एयरलाइन सेक्टर के लिए अलग व्यवस्था की गई है. एयरलाइन कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से 100 फीसदी तक अतिरिक्त कर्ज ले सकेंगी. प्रति उधारकर्ता इसकी सीमा 1500 करोड़ रुपये रखी गई है. इसके लिए कुछ विशेष शर्तें भी लागू होंगी.
सरकार ने लोन चुकाने की अवधि भी आसान रखी है. MSME और गैर MSME सेक्टर को पांच साल का समय मिलेगा. इसमें एक साल का मोरेटोरियम भी शामिल होगा. यानी शुरुआती एक साल तक मूल राशि चुकाने का दबाव नहीं रहेगा.
वहीं एयरलाइन सेक्टर के लिए सात साल की अवधि तय की गई है. इसमें दो साल का मोरेटोरियम मिलेगा. इससे एयरलाइन कंपनियों को आर्थिक दबाव से उबरने का समय मिल सकेगा.
यह योजना उन कंपनियों के लिए लागू होगी जिनके खाते 31 मार्च 2026 तक स्टैंडर्ड कैटेगरी में होंगे. योजना के तहत दिए जाने वाले सभी कर्ज 31 मार्च 2027 तक मंजूर किए जा सकेंगे.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण कई उद्योगों पर दबाव बढ़ रहा है.
खासकर MSME सेक्टर को नकदी संकट, बढ़ती लागत और सप्लाई चेन की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
सरकार को उम्मीद है कि ECLGS 5.0 से कारोबारों को समय पर पूंजी मिलेगी और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी. इससे लाखों नौकरियां बचाने में मदद मिल सकती है. साथ ही घरेलू उत्पादन और उद्योग जगत का भरोसा भी मजबूत होगा.


