क्या आहार से कैंसर का जोखिम कम हो सकता है?
आज इस लेख में हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि किस तरह से कोई भोजन कैंसर की संभावना को प्रभावित कर सकता है. साथ ही इस जोखिम को कम करने के लिए कुछ सरल और प्रभावी उपाय भी सुझाएंगे.
हालांकि यह बात सच है कि कुछ विशेष प्रकार के आहार और खान-पान की आदतें कैंसर की संभावना को बढ़ा देते हैं, लेकिन यह समझना भी उतना ही ज़रूरी है कोई एक आहार या भोजन बीमारी से पूरी तरह से सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकता. कैंसर से जुड़े कई कारण हो सकते हैं जैसे उम्र, आनुवंशिकी, पर्यावरण, संक्रमण, तंबाकू का सेवन, शराब का सेवन, शरीर का वज़न, शारीरिक व्यायाम और आहार. हम रोज़मर्रा में जो कुछ भी खाते हैं, उसका असर कैंसर के जोखिम से जुड़ी बायोलोजिकल प्रक्रियाओं पर पड़ता है- जैसे सूजन, शरीर का वज़न, इंसुलिन स्तर, गट का स्वास्थय और हानिकारक अवयवों के संपर्क में आना.
आज इस लेख में हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि किस तरह से कोई भोजन कैंसर की संभावना को प्रभावित कर सकता है. साथ ही इस जोखिम को कम करने के लिए कुछ सरल और प्रभावी उपाय भी सुझाएंगे.
आहार किस तरह कैंसर के जोखिम को प्रभावित करता है
आहार हमारे शरीर को कई तरह से प्रभावित करता है. अगर आप फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन पर्याप्त मात्रा में करते हैं तो इससे आपकी आंतों का स्वास्थय बेहतर होगा. इसी तरह सब्ज़ियों, फलों, साबुत अनाज, दालों से भरपूर आहार आपको विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेन्ट्स देता है. इन खाद्य पदार्थों में मौजूद अवयव कोशिकाओं की कार्यप्रणाली को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं.
वहीं दूसरी ओर अगर आप प्रोसेस्ड मीट, रैड मीट, चीनी युक्त पेय पदार्थों, तले खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं, तो इससे शरीर का वज़न बढ़ सकता है, मैटोबोलिक बदलाव आ सकते हैं. साथ ही इस तरह के खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन इन्फलामेशन यानि पुरानी सूजन का कारण भी बन जाता है. वज़न बढ़ने से कई प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है जैसे मेनोपॉज़ के बाद स्तन कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, एंडोमीट्रियल कैंसर, किडनी यानि गुर्दे का कैंसर और ईसोफेगस यानि ग्रसनी का कैंसर.
आप जो कुछ भी खाते हैं, उसका असर गट में मौजूद माइक्रोबायोम (पाचन तंत्र में रहने वाले सूक्ष्म जीवों का समूह) पर भी पड़ता है. आहार में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करने से गट में अच्छे बैक्टीरिया बनते हैं. वहीं कम फाइबर से युक्त आहार या अल्ट्रा-प्रोसेस्ड आहार के सेवन से पाचन तंत्र का यह संतुलन बिगड़ जाता है.

सांकेतिक चित्र
कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए कैसा आहार लें
1. पौधों से मिलने वाले फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें
कैंसर से बचने के लिए ढूंढ-ढूंढ कर चीज़ें खाने की ज़रूरत नहीं. बस आपकी किचन में जो भी आसानी से मिल जाए, वही आपके लिए अच्छा है.
सब्ज़ियों, फलों, साबुत अनाज, दालों, फलियों, चना, राजमा, अंकुरित दालें, मेवे, बीज- इन सभी को रोज़मर्रा के आहार में शामिल करें. इस तरह के खाद्य पदार्थों में फाइबर और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं. ये बिना ज़्यादा कैलोरी के आपको स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं.
रिफाइन्ड अनाज के बजाए साबुत अनाज जैसे आटा, ब्राउन राइस, ओट, मिलेट, दलिया और जौ का सेवन करें. फाइबर से युक्त खाद्य पदार्थ आंतों के स्वास्थय को बनाए रखने में मदद करते हैं. इनसे कोलोरेक्टल कैंसर की संभावना भी कम हो जाती है.
ध्यान रखें आपकी आधी प्लेट में सब्ज़ी और सलाद हो, एक चौथाई प्लेट में अनाज या मिलेट, एक चौथाई में प्रोटीन जैसे दाल, दही, पनीर, अंडा, मछली, चिकन, सोया और फलियां हों. व्यस्कों को रोज़ाना लगभग 25-30 ग्राम फाइबर का सेवन करना चाहिए.
2. प्रोसेस्ड और रैड मीट का सेवन सीमित मात्रा में करें
प्रोसेस्ड मीट जैसे सॉसेज़, सालमी, बेकोन, हैम और कुछ प्रीज़र्व किए गए मीट से कोलोरेक्टल कैंसर की संभावना बढ़ जाती है. इस तरह के भोजन में प्रीज़रवेटिव, बहुत ज़्यादा नमक होता है, साथ ही प्रोसेसिंग या ज़्यादा तापमान पर पकाने के दौरान इनमें कई हानिकारक अवयव बन जाते हैं.
इसके अलावा रैड मीट (मटन, पोर्क आदि) को भी सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. हम यह नहीं कहते कि अपने आहार में से मांसाहारी भोजन को पूरी तरह हटा दें, लेकिन इसे कभी कभी और कम मात्रा में ही खाएं.
इसके बजाए मछली, अंडा, पोल्ट्री, दालें, फलियां और दही- ये सभी प्रोटीन के अधिक सेहतमंद विकल्प हो सकते हैं.
इंटरनेशन एजेंसी फॉर रीसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी)- प्रोसेस्ड मीट को मनुष्य के लिए कार्सिनोजेनिक (कैंसर पैदा करने वाले ग्रुप 1) मानती है, इसी तरह रैड मीट को भी कार्सिनोजेनिक (कैंसर पैदा करने वाले ग्रुप 2ए) की श्रेणी में में रखती हैं. एजेंसी के मुताबिक इस तरह के खाद्य पदार्थ कोलोरेक्टल कैंसर का कारण बन सकते हैं.
3. चीनी, रिफाइंड कार्ब और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड आहार के सेवन से बचें
कई ऑनलाईन स्रोतों के अनुसार चीनी सीधे कैंसर की कोशिकाओं को फीड करती है. लेकिन ऐसा नहीं है. वास्तव में शरीर की सभी कोशिकाओं को एनर्जी के लिए ग्लुकोज़ की ज़रूरत होती है. ज़्यादा चीनी से युक्त पेय, मिठाईयां, मैदे से बने स्नैक्स और ज़्यादा कैलोरी से युक्त प्रोसेस्ड फूड- शरीर में इंसुलिन रेज़िस्टेन्स पैदा करते हैं और वज़न बढ़ने का कारण बन सकते हैं. इस तरह ये अप्रत्यक्ष रूप से कैंसर का जोखिम बढ़ाते हैं. पैकेज़्ड स्नैक्स, चीनी युक्त पेय पदार्थों, बेकरी आइटमों, तले खाद्य पदार्थों और फास्ट फूड का सेवन कभी-कभार ही करें, इसे रूटीन न बनाएं. इस तरह के खाद्य पदार्थों में फाइबर की मात्रा कम तथा नमक, फैट और कैलोरीज़ की मात्रा अधिक होती है. इनके बजाए फल, भुना चना, मेवे, दही, अंकुरित दालें, मखाना या घर में बने स्नैक्स का सेवन करें.
4. शराब के सेवन से बचें
शराब के कारण कई प्रकार के कैंसर -जैसे मुंह, गले, फूड पाईप, लिवर, स्तन या कोलोरेक्टल कैंसर- की संभावना बढ़ जाती है. शराब की मात्रा बढ़ने से जोखिम और अधिक बढ़ता है. कैंसर की रोकथाम के लिए शराब के सेवन से बचना ही सबसे सुरक्षित है. जो लोग शराब पीना चाहते हैं, उन्हें पहले डॉक्टर से इसके जोखिम समझ लेने चाहिए. यह सोच कर शराब न पीएं कि ‘सीमित मात्रा में शराब पीना’ नुकसानदायक नहीं है. अध्ययनों से पता चलता है कि किसी भी मात्रा में शराब कैंसर की रोकथाम के लिए सुरक्षित नहीं मानी जा सकती. इसलिए कैंसर के जोखिम से बचने के लिए शराब से दूर रहना ही सबसे अच्छा तरीका है.
5. ज़्यादा तापमान पर खाना न पकाएं
कैंसर का जोखिम सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हम क्या खाते हैं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि हम खाना कैसे पकाते हैं. ज़्यादा तापमान पर ग्रिल करने या तलने से भोजन में हानिकारक पदार्थ पैदा हो जाते हैं, खासतौर पर तब जब खाने को बहुत अधिक भूरा होने तक या जलने तक पकाया जाए. इस तरह खाना पकाने में तेल या कैलोरी की मात्रा भी बढ़ जाती है. इसलिए रोज़मर्रा में खाना पकाने के सेहतमंद तरीके अपनाएं जैसे स्टीम में पकाना, उबालना, प्रेशर कुकिंग, बेकिंग, स्लो कुकिंग या कम तेल में सॉटे करना. ताकि आपको सवाद से भी समझौता न करना पड़े और खाने के पोषक तत्व भी बरक़रार रहें और सेहत के लिए बेवजह जोखिम पैदा न हो.
6. ऐसे सप्लीमेंट्स से सावधान रहें, जो ‘एंटी-कैंसर’ होने का दावा करते हैं
बहुत से लोगों का मानना है कि महंगे सप्लीमेंट, हर्बल पाउडर, डीटॉक्स ड्रिंक्स और सुपरफूड कैंसर से बचा सकते हैं. यह तथय पूरी तरह गुमराह करने वाला है. कोई सप्लीमेंट- संतुलित आहार की जगह नहीं ले सकता, और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई सप्लीमेंट ज़्यादा मात्रा में नहीं लेना चाहिए. सही आहार भी आपको उचित पोषण दे सकता है. शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी होने पर, गर्भावस्था में, बीमारी या इलाज के बाद सप्लीमेंट की ज़रूरत पड़ सकती है. लेकिन ये सप्लीमेंट कैंसर से बचाने वाला शॉर्ट-कट नहीं हो सकते. इसी तरह कोई एक आहार जैसे हल्दी, ब्रॉकली, ग्रीन टी, लहसुन या बैरीज़- कैंसर को नहीं सकते. ये सभी सेहतमंद और संतुलित आहार का भाग हो सकते हैं लेकिन इलाज या रोकथाम की गारंटी नहीं हैं.
आहार महत्वपूर्ण है, लेकिन कैंसर से बचाने वाला एक मात्र कारक नहीं है
कैंसर से बचाव के लिए जीवनशैली के प्रति व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की ज़रूरत है. इसके लिए सेहतमंद आहार का सेवन करें, तंबाकू का सेवन बिल्कुल न करें, शारीरिक रूप से सक्रिय रहें, शरीर का वज़न सामान्य बनाए रखें, पूरी नींद लें, शराब का सेवन सीमित मात्रा में करें, बहुत ज़्यादा धूप में रहने से बचें, जहां ज़रूरी हो-वैक्सीन लें और कैंसर के लिए नियमित स्क्रीनिंग की आदत बनाएं.
एक अनुमान के अनुसार दुनिया भर में होने वाले कैंसर के 30-40 फीसदी मामलों को सेहतमंद जीवनशैली के द्वारा रोका जा सकता है. इसके लिए नियमित जांच भी ज़रूरी है क्योंकि कुछ प्रकार के कैंसर बिना लक्षणों के ही बढ़ जाते हैं. आहार से कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है, लेकिन उम्र, परिवार के इतिहास और मेडिकल जोखिम को ध्यान में रखते हुए मैमोग्राम, पैप स्मीयर, कोलन कैंसर की स्क्रीनिंग, मुंह की जांच और अन्य प्रकार की जांच भी उतनी ही ज़रूरी है.
निष्कर्ष
आहार कैंसर के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव को समझना ज़रूरी है. आहार में सब्ज़ियों, फलों, साबुत अनाज, दालों और फाइबर का सेवन भरपूर मात्रा में करें; प्रोसेस्ड मीट, शराब, चीनी युक्त पेय, अल्ट्रो-प्रोसेस्ड आहर के सेवन से बचें; खाना पकाने के लिए सेहतमंद तरीके अपनाएं साथ ही खाने की मात्रा पर भी ध्यान दें.
रोज़मर्रा की छोटी-छोटी आदतें आपके वज़न को नियन्त्रित रखने, स्वास्थय को बनाए रखने और बीमारियों से बचाने में कारगर हो सकती हैं.
एक और महत्वपूर्ण बात यह भी है गलत जानकारी से बचें. अगर किसी के परिवार में कैंसर का इतिहास है, और उसमें कोई अजीब लक्षण दिखते हैं जैसे वज़न कम होना, ब्लीडिंग, गांठें, लगातार दर्द, पाचन में बदलाव- तो तुरंत डॉक्टर से मिलें. भोजन आपके स्वास्थय को बेहतर बना सकता है, लेकिन समय पर जांच और इलाज हमेशा सबसे ज़रूरी होता है.
(images: AI generated)
(लेखक Rajiv Gandhi Cancer Institute & Research Centre में Consultant - Surgical Oncology हैं। इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं। उनसे YourStory का सहमत होना आवश्यक नहीं है।)
Edited by Ravi Pareek



