BBA के बाद नौकरी नहीं, आयुष केशरवानी ने शुरू किया बेकरी बिजनेस
चित्रकूट के करवी कस्बे में आयुष केशरवानी ने बेकरी कारोबार शुरू किया. वे सीखते हुए आगे बढ़े. इस सफर में यूपी सरकार की CM YUVA योजना के तहत मिली आर्थिक मदद ने कारोबार को स्थिरता और विस्तार की दिशा दी. यह कहानी है धैर्य, गुणवत्ता और भरोसे की.
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले का करवी कस्बा बहुत बड़ा बाजार नहीं है. यहां ग्राहक एक दूसरे को जानते हैं. स्वाद और भरोसा जल्दी बनता है और जल्दी टूट भी सकता है. इसी माहौल में आयुष केशरवानी ने अपनी छोटी सी बेकरी खड़ी की. यह कहानी किसी एक बड़े फैसले की नहीं है. यह कहानी धीरे धीरे आगे बढ़ने की है. सीखते हुए आगे बढ़ने की है.
आयुष करवी के ही रहने वाले हैं. उन्होंने ग्रामोदय विश्वविद्यालय से बीबीए की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के बाद उन्होंने तुरंत किसी बड़ी नौकरी की ओर नहीं देखा. उनका मन कुछ अपना करने का था. शुरुआत बहुत साधारण थी. वह मोहल्लों में घूम घूमकर छोटे स्तर पर सामान बेचते थे. लोगों से बात करते थे. उनकी पसंद समझते थे. कौन क्या खरीदता है. क्या चीज बार बार बिकती है.
इसी दौरान उनका झुकाव बेकरी आइटम्स की ओर हुआ. खासकर केक की तरफ. उन्हें लगा कि इसमें मांग बनी रहती है. लोग जन्मदिन और छोटे मौकों पर बार बार आते हैं. मुनाफा भी धीरे धीरे बन सकता है.
आयुष का परिवार व्यापार से जुड़ा रहा है. घर में खरीद बेच और लेन देन की बातें आम थीं. भरोसे की अहमियत उन्होंने वहीं सीखी. लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि रास्ता आसान हो गया. बाजार में पहले से मौजूद दुकानों की अपनी पहचान थी. नए चेहरे पर लोग जल्दी भरोसा नहीं करते.
शुरुआत में उनकी उम्र भी एक चुनौती थी. कई बार ग्राहक उन्हें गंभीरता से नहीं लेते थे. लेकिन आयुष ने जल्दी मुनाफा कमाने की जगह एक और चीज पर ध्यान दिया. वह थी गुणवत्ता.
आयुष कहते हैं, “शुरुआत में कमाई पर नहीं, स्वाद और क्वालिटी पर ध्यान दिया.” धीरे धीरे फर्क दिखने लगा. जो ग्राहक एक बार आया, वह दोबारा भी आया. केक का स्वाद और समय पर सेवा उनकी पहचान बनने लगी.
जैसे जैसे मांग बढ़ी, वैसे वैसे कामकाज के लिए पूंजी की जरूरत भी बढ़ने लगी. कच्चा माल, उपकरण और रोजमर्रा के खर्च संभालना आसान नहीं था. इसी दौर में आयुष ने यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के तहत आवेदन किया.
उनके लिए यह योजना कोई जादुई बदलाव नहीं थी. यह एक सहारा थी. एक ऐसा सहारा जिसने बढ़ते कारोबार को स्थिरता दी. इस मदद से उन्होंने अपनी बेकरी को थोड़ा और मजबूत किया. काम को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया.
आयुष बताते हैं कि इस सहयोग से उन्हें आत्मविश्वास मिला. कारोबार बढ़ रहा था लेकिन जोखिम भी था. अतिरिक्त पूंजी ने उस जोखिम को कुछ हद तक कम किया. इसके बाद उन्होंने रिटेल के साथ साथ होलसेल सप्लाई के बारे में सोचना शुरू किया. यह फैसला भी एकदम से नहीं लिया गया. मांग देखकर कदम बढ़ाया गया.
बेकरी शुरू करने से पहले आयुष ने और भी छोटे काम आजमाए थे. फूड स्टॉल जैसे प्रयोग किए. इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि उनका बाजार क्या चाहता है और उनकी अपनी क्षमता क्या है. इसी अनुभव ने उन्हें सतर्क बनाया.
आज भी वह बड़े सपने जरूर देखते हैं. लेकिन जल्दबाजी नहीं करते. पहले मौजूदा काम को स्थिर रखना उनकी प्राथमिकता है. उसके बाद ही आगे कुछ नया जोड़ने की सोचते हैं.
आज उनकी बेकरी करवी के स्थानीय ग्राहकों को केक और दूसरे बेकरी आइटम्स सप्लाई करती है. काम में अब एक तय रूटीन है. सुबह तैयारी होती है. ऑर्डर पूरे होते हैं. दिन का हिसाब साफ रहता है.
पीछे मुड़कर देखें तो यह सफर अनिश्चितता से नियंत्रण की ओर जाता दिखता है. शुरुआत में सब कुछ आजमाने जैसा था. आज काम में स्पष्टता है. चुनौतियां अब भी हैं. लेकिन उनसे निपटने का भरोसा भी है.
आयुष केशरवानी की कहानी दिखाती है कि हर सफलता शोर मचाकर नहीं आती. कुछ सफलताएं धीरे धीरे बनती हैं. छोटे कस्बों में ऐसे ही कदम दर कदम खड़े होते हैं कई कारोबार. जहां सपना बड़ा होता है. लेकिन रास्ता सोच समझकर चुना जाता है.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
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Edited by Ravi Pareek



