पर्व ठक्कर: पैरों में प्लास्टर, फिर बने दुनिया के सबसे छोटे सिंगर, बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
क्लबफुट जैसी बीमारी के साथ जन्मे पर्व ठक्कर ने 2 साल से भी कम उम्र में Guinness World Record बनाया. दर्द और इलाज के बीच उन्होंने संगीत को अपनाया और आज 50 से अधिक गाने रिकॉर्ड कर चुके हैं. उनकी प्रेरक कहानी संघर्ष, परिवार के समर्थन और हौसले की मिसाल है.
कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो हमें यह सिखाती हैं कि मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर हिम्मत हो तो उन्हें हराया जा सकता है. अहमदाबाद के पर्व ठक्कर (Parv Thacker) की कहानी भी ऐसी ही है.
जन्म से पहले ही उनकी जिंदगी ने एक कठिन मोड़ ले लिया था. उनके माता-पिता, डॉ. कृपेश ठक्कर और डॉ. पूजा ठक्कर, जब पांचवें महीने की सोनोग्राफी के लिए गए, तो उन्हें पता चला कि उनका बच्चा क्लबफुट (clubfoot) नाम की बीमारी से जूझ रहा है.
यह खबर किसी भी माता-पिता के लिए आसान नहीं होती. डॉक्टर होने के बावजूद, उस पल उन्होंने खुद को सिर्फ माता-पिता के रूप में पाया.
साल 2017 में पर्व का जन्म हुआ. जन्म के बाद तुरंत उनका इलाज शुरू कर दिया गया. लगभग दो साल तक उनके पैरों में भारी प्लास्टर चढ़ा रहता था. हर हफ्ते उसे बदला जाता था. यह प्रक्रिया बेहद दर्दनाक थी.
उनके पिता बताते हैं कि पर्व लंबे समय तक दर्द के कारण रोते रहते थे. लेकिन यही दर्द उनकी ताकत बन गया. लगातार रोने से उनकी आवाज मजबूत होती चली गई.
अपने बेटे को शांत करने के लिए उनके माता-पिता ने एक तरीका अपनाया. उन्होंने संगीत का सहारा लिया. धीरे-धीरे पर्व संगीत के करीब आते गए.
वह बोलना सीखने से पहले गाना गाने लगे. सिर्फ डेढ़ साल की उम्र में वह सही सुर पकड़ने लगे थे. यह देखकर लोग हैरान रह जाते थे.
14 अप्रैल 2019 को, राम नवमी के दिन, पर्व ने एक ऐसा काम किया जो किसी चमत्कार से कम नहीं था. उस समय उनकी उम्र सिर्फ 1 साल और 342 दिन थी.
उन्होंने अपना पहला एल्बम रिकॉर्ड किया, जिसका नाम था ‘Parv – The Youngest Singer’. इस 50 मिनट के एल्बम में सात मंत्र शामिल थे.
इस उपलब्धि ने उन्हें Guinness World Record दिलाया. वह दुनिया के सबसे कम उम्र के ऐसे सिंगर बने, जिन्होंने एल्बम रिलीज किया.
उसी दिन उनके परिवार ने ‘Parv Fusion Band’ की भी शुरुआत की.
आज पर्व 8 साल के हो चुके हैं. उन्होंने अब तक 50 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए हैं. वह शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग भी ले रहे हैं.
उनके पिता और बहन उनके साथ गाते हैं, जबकि उनकी मां उनके पूरे शेड्यूल और काम को संभालती हैं.
पर्व की कहानी सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं है. उनके माता-पिता ने तय किया कि वह क्लबफुट के बारे में जागरूकता फैलाने का काम भी करेंगे.
आज पर्व इस मिशन का एक चेहरा बन चुके हैं. वह अपनी आवाज के जरिए लोगों तक यह संदेश पहुंचा रहे हैं.
हाल ही में उनके एल्बम ‘Sound of Sanatan: Vol. 1’ को Grammy के लिए भी भेजा गया है. अगर यह चयनित होता है, तो पर्व सबसे कम उम्र के भारतीय बन सकते हैं, जो इस स्तर तक पहुंचे हैं.
पढ़ाई के साथ-साथ उनका यह सफर भी जारी है. फिलहाल वह कक्षा 4 में हैं और आगे अपने मिशन को ध्यान में रखते हुए होमस्कूलिंग की तैयारी कर रहे हैं.
पर्व ठक्कर की कहानी हमें यह सिखाती है कि मुश्किलें हमारी पहचान तय नहीं करतीं. एक बच्चा, जिसे चलने में भी दिक्कत थी, आज अपनी आवाज से दुनिया को प्रेरित कर रहा है. यह कहानी सिर्फ एक रिकॉर्ड की नहीं है, बल्कि हिम्मत, परिवार के साथ और विश्वास की है.




