डॉक्टर से IPS तक, नवजोत सिमी की कहानी: बिना कोचिंग पहली ही कोशिश में UPSC फतह
डेंटिस्ट से IPS बनीं डॉ. नवजोत सिमी की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखता है. बिना कोचिंग के सेल्फ-स्टडी के दम पर उन्होंने 2018 में पहली ही कोशिश में UPSC पास किया और 735वीं रैंक हासिल कर अपने जुनून को हकीकत में बदल दिया.
जिंदगी अक्सर हमें सुरक्षित रास्तों की आदत डाल देती है. हम वही चुनते हैं जिसमें जोखिम कम हो और भविष्य तय दिखे. लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो तय रास्तों पर नहीं चलते. वे अपने रास्ते खुद बनाते हैं.
डॉ. नवजोत सिमी (Navjot Simi) उन्हीं लोगों में से एक हैं. उनके पास एक सम्मानजनक पेशा था. एक डेंटिस्ट के रूप में उनकी जिंदगी पूरी तरह सेट थी. लेकिन दिल के किसी कोने में एक आवाज लगातार उठ रही थी. यह आवाज थी वर्दी की. देश सेवा की. यह आवाज इतनी मजबूत थी कि उन्होंने अपने सुरक्षित करियर को पीछे छोड़ने का फैसला कर लिया. यह सिर्फ एक निर्णय नहीं था, बल्कि खुद पर विश्वास की शुरुआत थी.
पंजाब के गुरदासपुर में जन्मी नवजोत सिमी ने डेंटल सर्जरी की पढ़ाई पूरी की थी. डॉक्टर बनना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि होती है. और जब यह मुकाम मिल जाए, तो ज्यादातर लोग यहीं रुक जाते हैं.
लेकिन नवजोत सिमी के लिए यह मंजिल नहीं थी. उन्हें हमेशा लगता था कि उनका असली सपना कुछ और है. वह अपने जीवन को एक बड़े उद्देश्य से जोड़ना चाहती थीं.
यही सोच उन्हें UPSC की ओर ले गई. नवजोत सिमी ने तय किया कि वह सिविल सर्विसेज की तैयारी करेंगी. यह रास्ता लंबा था. कठिन था. और अनिश्चितताओं से भरा था. फिर भी उन्होंने कदम बढ़ाया. क्योंकि कभी कभी दिल की सुनना ही सबसे सही फैसला होता है.
UPSC की तैयारी में सबसे बड़ी चुनौती होती है निरंतरता बनाए रखना. नवजोत सिमी ने यही किया. उन्होंने अपने दिन और रात दोनों को पढ़ाई के लिए समर्पित कर दिया. नवजोत ने किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया. खुद पढ़ाई की. इंटरनेट से सीखा. अपनी गलतियों से सीखा. कई बार ऐसा भी हुआ जब थकान ने उन्हें रोकने की कोशिश की. लेकिन हर बार नवजोत सिमी ने खुद को याद दिलाया कि वह क्यों शुरू हुई थीं. धीरे-धीरे उनकी मेहनत ने आकार लेना शुरू किया. उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया. और वही आत्मविश्वास उन्हें आगे बढ़ाता रहा.

साल 2018 में डॉ. नवजोत सिमी ने UPSC में 735वीं रैंक हासिल की थी.
साल 2018 में वह पल आया जिसका इंतजार हर UPSC अभ्यर्थी करता है. रिजल्ट का दिन. जब परिणाम सामने आया, तो नवजोत सिमी ने 735वीं रैंक हासिल की थी. सबसे खास बात यह थी कि नवजोत सिमी ने यह सफलता पहली ही कोशिश में हासिल की. यह सिर्फ एक नंबर नहीं था. यह उनकी मेहनत का प्रमाण था. यह उन सभी रातों की कहानी थी जो उन्होंने अपने सपनों के लिए जागकर बिताई थीं. इसके साथ ही नवजोत सिमी का चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हुआ और उन्हें बिहार कैडर मिला. उनका सपना अब हकीकत बन चुका था.
IPS बनने के बाद नवजोत सिमी ने हैदराबाद में ट्रेनिंग ली. यह ट्रेनिंग उनके व्यक्तित्व को और मजबूत बनाने वाली थी. इसके बाद नवजोत सिमी को पटना में DSP के रूप में पहली जिम्मेदारी मिली. यहां उन्होंने अपने काम से अलग पहचान बनाई. उन्होंने खासतौर पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान दिया. कम्युनिटी पुलिसिंग के जरिए लोगों से जुड़ने की कोशिश की.
डॉ. नवजोत सिमी की कहानी सिर्फ उनके काम तक सीमित नहीं है. वे आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. इंस्टाग्राम पर उनके 10 लाख (1 मिलियन) से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. वह अपने अनुभव साझा करती हैं. अपने जीवन के छोटे छोटे पल दिखाती हैं. इससे लोगों को यह समझ आता है कि सफलता सिर्फ किताबों में लिखी कहानी नहीं होती. इसे जीना पड़ता है.

अपने पति IAS तुषार सिंगला के साथ डॉ. नवजोत सिमी IPS
डॉ. नवजोत सिमी के पति तुषार सिंगला भी IAS अधिकारी हैं. दोनों मिलकर समाज और देश के लिए काम कर रहे हैं.
डॉ. नवजोत सिमी की कहानी हमें एक गहरी सीख देती है. जिंदगी में सबसे बड़ी बाधा बाहर नहीं, हमारे अंदर होती है. जब हम अपने डर को पार कर लेते हैं, तो कोई भी सपना दूर नहीं रहता. नवजोत ने यह दिखाया कि अगर इरादा साफ हो और मेहनत सच्ची हो, तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं.
यह कहानी सिर्फ एक IPS अधिकारी बनने की नहीं है. यह कहानी उस हिम्मत की है, जो हमें अपने सपनों की ओर पहला कदम बढ़ाने की ताकत देती है.
(images: instagram/navjotsimi)



