भारत बनेगा दुनिया का डेटा सेंटर हब, 200 अरब डॉलर के निवेश की उम्मीद — केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
भारत को दुनिया के सबसे बड़े डेटा सेंटर हब में शामिल करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के डेटा सेंटर सेक्टर में 200 अरब डॉलर तक निवेश की उम्मीद है. सरकार बिजली, जमीन और मंजूरी से जुड़े सुधारों पर जोर दे रही है.
भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े डेटा सेंटर हब में से एक बन सकता है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए भारत दुनिया की सबसे बेहतरीन जगह है.
उन्होंने यह बात नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में आयोजित सीईओ राउंडटेबल के दौरान कही. इस बैठक का विषय था “Ease of Doing Business (EoDB) for Scaling India’s Data Centre Ecosystem”.
बैठक में डेटा सेंटर सेक्टर से जुड़े कई बड़े उद्योग प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी, ग्लोबल हाइपरस्केलर्स, डेटा सेंटर डेवलपर्स, ऑपरेटर्स, इन्वेस्टर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे.
200 अरब डॉलर तक निवेश की उम्मीद
पीयूष गोयल ने कहा कि डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत के पास बड़ी संभावनाएं हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में भी देश तेजी से आगे बढ़ रहा है.
भारत का मैन्युफैक्चरिंग बेस भी लगातार मजबूत हो रहा है. ऐसे में डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, AI और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि को गति दे सकते हैं.
सरकार को उम्मीद है कि भारत के डेटा सेंटर सेक्टर में करीब 200 अरब डॉलर तक का निवेश आ सकता है. यह आंकड़ा इस क्षेत्र में मौजूद बड़े अवसरों को दिखाता है.
पीयूष गोयल ने कहा कि इन क्षेत्रों की मदद से भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ सकता है.

AI के बढ़ते इस्तेमाल से डेटा सेंटर की मांग बढ़ी
भारत में क्लाउड और AI-बेस्ड वर्कलोड तेजी से बढ़ रहा है. इसका सीधा असर डेटा सेंटर की मांग पर पड़ रहा है.
2026 की पहली छमाही में डेटा सेंटर में हुई कुल एब्जॉर्प्शन का 80 फीसदी से अधिक हिस्सा हाइपरस्केलर्स का रहा. इससे पता चलता है कि भारत AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक अहम डेस्टिनेशन बनता जा रहा है.
सरकार अब बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है.
बिजली और जमीन की उपलब्धता पर भी चर्चा
राउंडटेबल में डेटा सेंटर के लिए पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली की उपलब्धता पर विस्तार से चर्चा हुई. इसके लिए क्लस्टर-बेस्ड ट्रांसमिशन और सबस्टेशन प्लानिंग की जरूरत पर जोर दिया गया.
बैठक में डे वन सैंक्शन्ड लोड और ड्यूल पावर फीडर्स जैसे उपायों पर भी चर्चा हुई. इसके अलावा रिन्यूएबल एनर्जी की खरीद को आसान बनाने की जरूरत पर भी बात हुई. खासतौर पर अलग-अलग राज्यों के बीच रिन्यूएबल एनर्जी प्रोक्योरमेंट को सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया.
डेटा सेंटर के लिए पहले से तैयार जमीन उपलब्ध कराने का मुद्दा भी बैठक में उठा. सरकार और राज्यों के स्तर पर डीसी रेडी लैंड बैंक्स और पावर रेडी पार्सल्स तैयार करने की जरूरत बताई गई.
मंजूरी की प्रक्रिया आसान बनाने पर जोर
डेटा सेंटर प्रोजेक्ट शुरू करने में लगने वाले समय को कम करने के लिए रेग्युलेटरी रिफॉर्म्स पर भी चर्चा हुई.
इसमें सिंगल विंडो अप्रूवल सिस्टम को और बेहतर बनाने की बात कही गई. इसके अलावा बिल्डिंग रेग्युलेशंस को डेटा सेंटर की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर भी जोर दिया गया.
इस दिशा में कुछ महत्वपूर्ण प्रगति भी हुई है. नेशनल बिल्डिंग कोड 2026 में डेटा सेंटर को अलग से ग्रुप ई के तहत मान्यता दी गई है.
इसके साथ ही डेटा सेंटर के लिए एक डेडिकेटेड एनेक्स भी जोड़ा गया है. इसमें फायर रिस्क असेसमेंट और डेटा सेंटर से जुड़े परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स जैसी जरूरतों को शामिल किया गया है.
8 राज्यों और 46 डेटा सेंटर कंपनियों ने लिया हिस्सा
इस राउंडटेबल में आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश की सरकारों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए.
इसके अलावा करीब 46 डेटा सेंटर कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया.
पीयूष गोयल ने कहा कि केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों और राज्यों के साथ बातचीत के जरिए कई मुद्दों को पहले ही सुलझाया जा चुका है. उन्होंने कहा कि बैठक में उद्योग की ओर से सकारात्मक माहौल देखने को मिला.
मंत्री ने भारत की आर्थिक संभावनाओं पर भी भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत मजबूत स्थिति में है. उन्होंने पहली तिमाही में देश की 7.8 फीसदी आर्थिक वृद्धि का भी उल्लेख किया.
पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि देश में लोगों का भरोसा बढ़ा है और हर भारतीय विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देने के लिए आगे आ रहा है.
अब इस बातचीत को समयबद्ध सुधारों में बदलने की तैयारी है. इसका मकसद डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और इनोवेशन को बढ़ावा देना है. साथ ही भारत को एक भरोसेमंद ग्लोबल डेटा सेंटर हब के रूप में स्थापित करना है.



