स्टार्टअप्स अब दोगुनी रफ्तार से बनेंगे यूनिकॉर्न, ये सरकारी योजनाएं करेगी मदद
भारत सरकार टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए RDI, NQM, NM-ICPS, NIDHI और Startup India जैसी योजनाएँ चला रही है. फंडिंग, इनक्यूबेशन और नई नीतियों से देश में इनोवेशन तेज हुआ है. अब तक 121 स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न बने हैं और आने वाले वर्षों में संख्या और बढ़ेगी.
भारत सरकार लगातार ऐसा माहौल बना रही है जिससे टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को बढ़ने और यूनिकॉर्न (वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर) बनने में मदद मिल सके. सरकार देशभर में इनोवेशन और स्टार्टअप्स को मजबूत करने के लिए कई योजनाएँ चला रही है. इनमें कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्य भी शामिल हैं.
सरकार ने रिसर्च डेवलपमेंट और इनोवेशन (RDI) योजना शुरू की है. इसका उद्देश्य नई और उभरती टेक्नोलॉजीज को बढ़ावा देना है. इस योजना का फोकस ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु समाधान, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, स्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों पर है. अगले छह साल में इस योजना पर 1 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
नेशनल क्वांटम मिशन (NQM) के तहत सरकार क्वांटम टेक्नोलॉजी पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को फंडिंग और सुविधाएँ दे रही है. अब तक 7 स्टार्टअप्स को मदद मिल चुकी है. इन स्टार्टअप्स को एडवांस लैब्स, तकनीकी संसाधन और इंडस्ट्री विशेषज्ञों से मार्गदर्शन दिया जा रहा है.
नेशनल मिशन ऑन इंटरडिसिप्लिनरी साइबर फिजिकल सिस्टम्स (NM-ICPS) के तहत देशभर के प्रमुख संस्थानों में 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब बनाए गए हैं. ये हब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग (ML), रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर काम करते हैं. अब तक 800 से अधिक स्टार्टअप्स को इन हब्स से लाभ मिला है. कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान में 6 हब मिलकर 160 स्टार्टअप्स को सहायता दे चुके हैं.
National Initiative for Developing and Harnessing Innovations (NIDHI) प्रोग्राम के तहत सरकार स्टार्टअप्स को आइडिया से लेकर बिजनेस तक तैयार करने में सहयोग देती है. प्रोटोटाइप बनाने, इनक्यूबेशन, सीड फंडिंग और तेजी से विस्तार के लिए सहायता दी जाती है. इस कार्यक्रम से 12 हजार से ज्यादा स्टार्टअप्स को लाभ मिला है. केवल PRAYAS स्कीम के तहत 2,200 से अधिक इनोवेटर्स और स्टार्टअप्स को सहायता मिली है. कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान में भी बड़ी संख्या में युवा उद्यमियों को फायदा हुआ है.
अनुसंधान राष्ट्रीय रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) ने इंडस्ट्री और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाया है. इससे रिसर्च को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुँचाने में आसानी हुई है. स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत अब तक लगभग 2 लाख स्टार्टअप्स को मान्यता दी जा चुकी है. इन स्टार्टअप्स ने देश में 21.11 लाख नौकरियाँ पैदा की हैं.
BIRAC (Biotechnology Industry Research Assistance Council) ने बायोटेक स्टार्टअप्स के लिए शुरुआती फंडिंग और विशेष बायो-इन्क्यूबेशन सेंटर उपलब्ध कराए हैं. 2,700 से अधिक स्टार्टअप्स और छात्रों को इन सुविधाओं का लाभ मिला है. 800 से अधिक प्रोडक्ट विकसित किए जा चुके हैं और 1300 से अधिक पेटेंट दाखिल हुए हैं.
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी डीप टेक स्टार्टअप्स को फंडिंग और तकनीकी सहायता दे रहा है. वहीं, स्पेस सेक्टर में IN-SPACe और रक्षा क्षेत्र में iDEX प्रोग्राम तेजी से स्टार्टअप्स को आगे बढ़ा रहे हैं.
केंद्र और राज्यों के बीच मिलकर बनाई गई नीतियाँ और स्टार्टअप रैंकिंग जैसे कार्यक्रमों ने देश के स्टार्टअप माहौल को मजबूत किया है. सरकार द्वारा बनाए गए इनक्यूबेटर्स, रिसर्च लैब्स और फंडिंग सपोर्ट से छात्रों और युवाओं को उद्यमिता अपनाने का अवसर मिला है.
सरकार की इन पहलों से कई स्टार्टअप्स बड़ी सफलता हासिल कर चुके हैं. Department of Science & Technology (DST) समर्थित 4 स्टार्टअप अब यूनिकॉर्न बन चुके हैं. देशभर में अब तक कुल 121 स्टार्टअप यूनिकॉर्न का तमगा हासिल कर चुके हैं. QuNu Labs, QpiAI, Ather Energy, IdeaForge, Razorpay, Uniphore, FarEye, Lauras Labs, Gupshup, Atomberg, Agnikul, Offgrid Energy Labs जैसे स्टार्टअप्स ने राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है.
सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर कई तरह की गतिविधियाँ और कार्यक्रम भी शुरू किए हैं. इनमें स्टेट स्टार्टअप रैंकिंग, स्टेट स्टार्टअप पॉलिसी और नेशनल स्टार्टअप अवॉर्ड जैसे प्रयास शामिल हैं. इन कार्यक्रमों ने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद की है. इससे देश में स्टार्टअप इकोसिस्टम का संतुलित और तेज विकास हो पाया है.
भारत में स्टार्टअप्स के लिए तैयार किया गया यह मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर आने वाले वर्षों में और भी यूनिकॉर्न देने की क्षमता रखता है.



