KITG 2026: 7 साल में माता-पिता को खोया, स्विमिंग पूल में काम कर कुश्ती सीखी, जीता मेडल — देबी डायमारी की कहानी
छत्तीसगढ़ में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) 2026 में असम की देबी डायमारी ने 62 किग्रा कुश्ती में सिल्वर मेडल जीतकर संघर्ष की मिसाल पेश की. 7 साल की उम्र में माता-पिता को खोने के बाद स्विमिंग पूल में काम कर ट्रेनिंग जारी रखी और अब गोल्ड मेडल जीतने का सपना देख रही हैं.
‘जब हालात मुश्किल होते हैं, तो मजबूत लोग आगे बढ़ते हैं’- यह एक मशहूर कहावत है जो खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने की ललक को बयां करती है. असम की महिला पहलवान देबी डायमारी (Debi Daimiri) की कहानी बाधाओं को पार करने की इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है.
असम के गोलाघाट जिले के सिसुपानी स्थित दिनेशपुर गांव की रहने वाली 28 वर्षीय देबी ने महज सात साल की उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया था. इसके बाद उन्हें अपने चाचा-चाची के साथ रहना पड़ा और आर्थिक तंगी के चलते अपनी ट्रेनिंग जारी रखने के लिए उन्हें छोटे-मोटे काम भी करने पड़े.
और आखिरकार देबी को उन सभी प्रयासों का फल तब मिला, जब उन्होंने यहां ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ 2026 (KITG 2026) में महिलाओं की 62 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता.
बोडो ट्राइब से आने वाली देबी कहती हैं, “इस मेडल के पीछे मेरी कड़ी मेहनत है. मैंने चार साल पहले ही 2022 में गोलाघाट जिले के बोकाखात में काजीरंगा के बगल में खेलो इंडिया सेंटर में कुश्ती शुरू की थी. इसमें प्रैक्टिस करने के लिए मुझे सेंटर के आसपास रूम लेकर रहना पड़ा. रूम का 1000 रुपया किराया देने के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे, इसलिए मुझे एक साल तक पार्ट टाइम जॉब भी करना पड़ा.”
वह आगे कहती हैं, “पहले तो मुझे 2022 में 2500 रुपये मासिक वेतन पर ईजी बाजार (बोकाखात) स्टोर में काम करना पड़ा और फिर 2023 में काजीरंगा में स्थित बोन विला रिसॉर्ट में करीब 7000 रुपये के मासिक वेतन पर जॉब करना पड़ा. वहां पर मैं स्वीमिंग पूल की देखभाल और सफाई करती थीं.”
उन्होंने आगे कहा, “सारा दिन काम करने के बाद शाम को सिर्फ दो घंटे के लिए मैं कुश्ती की प्रैक्टिस कर पाती थी. मैंने जितना भी किया, उसके बदले मुझे ये सिल्वर मेडल मिला. लेकिन मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं और मैं अब और कड़ी मेहनत करके आगे गोल्ड जीतना चाहती हूं.”

असम की महिला पहलवान देबी डायमारी (बीच में) कोच अनुस्तूप नाराह (बाएं) के साथ (image: KITG 2026)
कुश्ती में मैट पर उतरने से पहले देबी पॉवरलिफ्टिंग और आर्म रेसलिंग करती थीं. लेकिन साल 2022 में उनकी मुलाकात असम टीम के कोच अनुस्तूप नाराह (Anustup Narah) से हुई, जिनके मार्गदर्शन में रहकर उन्होंने कुश्ती के दांव पेंच सीखे.
कोच अनुस्तूप बताते हैं, “2022 में जब बोकाखात में पंजा टूर्नामेंट हुआ था तो उस दौरान वह मुझे मिली और मैंने उन्हें देखते ही कह दिया कि तुम रेसलिंग करो. देबी ने सोच विचार के बाद मुझे हां- कह दिया और फिर मैंने उन्हें सबसे पहले सेंटर के पास ही रहने के लिए कहा ताकि ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त समय मिल सके. वह बोली कि सर यहां तो रूम लेकर रहना पड़ेगा और मेरे पास इतने पैसे तो नहीं है. फिर मैंने गोलाघाट जिले के कुश्ती सहायक सचिव से कहकर देबी को काम दिलवाया और एक साइकिल भी दिलवाई. देबी उसी साइकिल से जॉब करने लगी और फिर वह सेंटर के पास रहकर ही प्रैक्टिस भी करने लगी.”
देबी डायमारी ने 2022 में अपने ही जिले के बोकाखात में काजीरंगा स्थित खेलो इंडिया सेंटर में कुश्ती शुरू की थी और उसी साल उन्होंने विशाखापत्तनम में हुए सीनियर चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर लिया. इसके बाद साल बाद ही उन्होंने 2024 में स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता.
देबी की पिछले साल ही शादी हुई है और उनके पति बेंगलुरु में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं. वह बताती हैं, “ससुराल वाले मुझे हर तरह से बहुत सपोर्ट करते हैं. पति भी मुझे बहुत सपोर्ट करते हैं और वह बेंगलुरु से बराबर पैसे भेजते रहते हैं ताकि मुझे किसी चीज की दिक्कत ना हो.”
उन्होंने कहा, “मेरा अगला लक्ष्य सीनियर लेवल पर और मेडल जीतना है ताकि मैं उसके बाद इंटरनेशनल लेवल पर भाग ले सकूं. ये सब करने के लिए मैं दिन-रात कड़ी मेहनत कर रही हूं. यहां से जाने के बाद अब देखेंगे कि कोच साहब क्या प्लानिंग करते हैं और फिर हम उसी के हिसाब से काम करेंगे.”
(images: KITG 2026)



