KITG 2026: मीराबाई चानू बोलीं—KITG है गेमचेंजर; मेरा एशियन गेम्स का सपना अधूरा
मीराबाई चानू एशियन गेम्स में पदक के अपने अधूरे सपने को पूरा करने के लिए तैयार हैं. ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ में उनकी मौजूदगी और संदेश ने जनजातीय प्रतिभाओं को नई प्रेरणा दी, साथ ही उनके संघर्ष और वापसी की कहानी भी सामने आई.
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 (Khelo India Tribal Games - KITG 2026) के उद्घाटन के अवसर पर सैखोम मीराबाई चानू (Saikhom Mirabai Chanu) की मौजूदगी ने इस आयोजन को खास बना दिया. छत्तीसगढ़ में आयोजित इस बहु-खेल प्रतियोगिता का उद्देश्य देश के जनजातीय इलाकों से खेल प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें राष्ट्रीय मंच देना है.
मीराबाई ने यहां खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए अपने संघर्ष और सफर का जिक्र किया और कहा कि छोटे शहरों और दूर-दराज के इलाकों से आने वाले खिलाड़ियों में अपार क्षमता होती है. उन्होंने इस पहल को “गेम-चेंजर” बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन न सिर्फ प्रतिभा को पहचान देते हैं, बल्कि खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं.
उन्होंने कहा, “सरकार द्वारा ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देना गर्व की बात है. इससे दूर-दराज के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा. खासकर उत्तर-पूर्व और जनजातीय क्षेत्रों में बहुत प्रतिभा है, लेकिन उन्हें सही मंच नहीं मिल पाता.”
मीराबाई ने साथ ही नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCOE), खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और साई ट्रेनिंग सेंटर की भी सराहना की.
उन्होंने कहा, “इन केंद्रों में खिलाड़ियों को बेहतरीन ट्रेनिंग, पोषण और सुविधाएं मिलती हैं. यहां कई युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे हैं. ये केंद्र भारतीय खेलों को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.”

छत्तीसगढ़ में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 (KITG 2026) के उद्घाटन के अवसर पर मीराबाई चानू ने इस पहल को “गेम-चेंजर” बताया. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न सिर्फ प्रतिभा को पहचान देते हैं, बल्कि खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं. (image: KITG 2026)
पिछले एक दशक से मीराबाई चानू भारतीय वेटलिफ्टिंग का बड़ा नाम रही हैं. इस दौरान उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक, तीन विश्व चैंपियनशिप पदक और तीन कॉमनवेल्थ गेम्स पदक अपने नाम किए हैं.
लेकिन एक उपलब्धि अब भी उनसे दूर है—एशियाई खेलों का पदक. मीराबाई ने पहली बार 19 साल की उम्र में 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में हिस्सा लिया था, जहां वह नौवें स्थान पर रहीं. 2018 जकार्ता एशियन गेम्स से उन्हें पीठ की चोट के कारण हटना पड़ा.
2022 हांगझोउ एशियन गेम्स में वह पदक के बेहद करीब पहुंचीं, लेकिन कूल्हे की चोट के कारण उनका सपना टूट गया. इस चोट ने उन्हें लगभग पांच महीने तक खेल से दूर रखा.
31 वर्षीय मीराबाई ने इसके बाद शानदार वापसी की और 2024 पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया, जहां वह लगातार दूसरा ओलंपिक पदक जीतने से मामूली अंतर से चूक गईं. अब उनका पूरा फोकस एशियन गेम्स में पदक जीतने पर है.
मीराबाई ने कहा, “एशियन गेम्स मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां मेरा अधूरा सपना है. वहां प्रतियोगिता का स्तर बहुत ऊंचा होता है, जो इसे और चुनौतीपूर्ण बनाता है.”
उनके सामने एक नई चुनौती वेट कैटेगरी को लेकर भी है. वह आमतौर पर 49 किलोग्राम वर्ग में खेलती हैं, लेकिन नियमों में बदलाव के चलते उन्हें 48 और 49 किलोग्राम के बीच संतुलन बनाना होगा.
वह 23 जुलाई से 2 अगस्त तक ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 48 किलोग्राम वर्ग में उतरेंगी. इसके बाद 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के नागोया में होने वाले एशियन गेम्स में 49 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी.
उन्होंने कहा, “कॉमनवेल्थ गेम्स तक मैं अपना वजन 48 किलोग्राम में रखूंगी, लेकिन उसके दो महीने बाद एशियन गेम्स 49 किलोग्राम में हैं, इसलिए मुझे फिर से बदलाव करना होगा.”
मीराबाई ने 2026 सीजन की शुरुआत फरवरी में राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप से की, जहां उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में तीन नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए. उन्होंने स्नैच में 89 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 116 किलोग्राम वजन उठाया. कुल 205 किलोग्राम के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक जीता, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा.
अब जहां एक ओर मीराबाई चानू अपने अधूरे एशियन गेम्स के सपने को पूरा करने की तैयारी में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर वह नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनकर उभर रही हैं—खासकर उन इलाकों में, जहां प्रतिभा तो है, लेकिन मंच की कमी रही है.
(images: KITG 2026)



