Nvidia ने रोचन शंकर पर लगाया 8000 करोड़ का दांव, जानिए कौन हैं AI चिप्स की दुनिया के ये महारथी
Nvidia ने भारतीय टेक जीनियस रोचन शंकर पर 8,000 करोड़ खर्च कर दिया! जानिए कैसे उनकी स्टार्टअप तकनीक AI की दुनिया बदलने वाली है.
दुनिया की सबसे बड़ी एआई (AI) चिप कंपनी एनविडिया (Nvidia) ने आईटी इंडस्ट्री को चौंकाने वाला कदम उठाया है. कंपनी ने भारतीय मूल के टेक लीडर रोचन शंकर (Rochan Sankar) और उनकी स्टार्टअप टेक्नोलॉजी पर 900 मिलियन डॉलर यानी करीब 8,000 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं.
हाल ही में समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने CNBC की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए इसकी जानकारी दी. रिपोर्ट के मुताबिक, एनविडिया रोचन शंकर को नकद और स्टॉक में भुगतान कर रही है. यह डील इस महीने के दूसरे सप्ताह में पूरी हुई है और रोचन शंकर एनविडिया जॉइन कर चुके हैं. यह जानकारी CNBC ने दी, अपने दो सूत्रों के हवाले से.
कौन हैं रोचन शंकर?
रोचन शंकर सिलिकॉन वैली स्थित एआई हार्डवेयर स्टार्टअप एनफैब्रिका (Enfabrica) के फाउंडर, प्रेसिडेंट और सीईओ हैं. उन्होंने 2019 में एनफैब्रिका की स्थापना की थी. उनकी कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सबसे बड़ी चुनौती का हल ढूंढ लिया है. यह चुनौती है हजारों चिप्स को जोड़कर उन्हें सुपरकंप्यूटर की तरह काम करने लायक बनाना.
उनकी अनोखी तकनीक ने इंडस्ट्री को प्रभावित किया और एनविडिया जैसी दिग्गज कंपनी को भी. यही वजह है कि एनविडिया ने रोचन शंकर और उनकी पूरी टीम को अपने साथ मिला लिया. कंपनी ने उनकी तकनीक का लाइसेंस भी हासिल कर लिया है.
रोचन शंकर का जन्म भारत में हुआ. आगे चलकर वे टेक्नोलॉजी की दुनिया में बड़ा नाम बने.
एनफैब्रिका शुरू करने से पहले वे ब्रॉडकॉम (Broadcom) में सीनियर डायरेक्टर थे. यहां उन्होंने डेटा सेंटर ईथरनेट स्विच सिलिकॉन बिजनेस को लीड किया. इसी दौरान उन्होंने टॉमहॉक (Tomahawk) और ट्राइडेंट (Trident) जैसी चिप्स जनरेशन लॉन्च कीं. उन्होंने 25जी ईथरनेट और व्हाइटबॉक्स नेटवर्किंग जैसे इकोसिस्टम बनाने में अहम योगदान दिया.
इससे पहले भी वे कई स्टार्टअप्स और पब्लिक सेमीकंडक्टर कंपनियों में काम कर चुके हैं. उन्होंने प्रोडक्ट मैनेजमेंट, चिप आर्किटेक्चर और इंजीनियरिंग की भूमिकाएं निभाईं.
रोचन शंकर ने यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने व्हार्टन स्कूल से एमबीए किया.
टेक जगत में उनका योगदान उल्लेखनीय है. उनके नाम छह पेटेंट दर्ज हैं.
क्यों किया Nvidia ने हायर?
AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए हजारों-लाखों चिप्स की जरूरत होती है. लेकिन अगर नेटवर्क धीमा हो जाए, तो ये महंगे चिप्स बेकार बैठ जाते हैं.
एनफैब्रिका की तकनीक इस समस्या को खत्म करती है. यह एक साथ 1 लाख तक एआई चिप्स को जोड़ सकती है और नेटवर्क पर कोई असर नहीं पड़ता. यही वजह है कि एनविडिया ने रोचन शंकर और उनकी टीम को हायर किया.
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले, एनविडिया ने 2023 में एनफैब्रिका में 125 मिलियन डॉलर के सीरीज बी फंडिंग राउंड में निवेश किया था. हालांकि, उस समय कंपनी ने अपनी वैल्यूएशन का खुलासा नहीं किया था.
एनविडिया का हालिया कदम दिखाता है कि टेक कंपनियां अब टैलेंट और इनोवेशन में भी भारी निवेश कर रही हैं. हाल ही में मेटा ने स्केल एआई (Scale AI) में हिस्सेदारी खरीदी थी. गूगल ने भी एआई स्टार्टअप्स से टैलेंट को हायर किया.
रोचन शंकर की यह उपलब्धि भारत के लिए गर्व का क्षण है. उनका इनोवेशन आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा और रफ्तार तय कर सकता है.



