MedTech स्टार्टअप Bioscan Research को मिली 10 लाख डॉलर की सीड फंडिंग
साल 2017 में अनुपम लवानिया और शिल्पा मलिक ने Bioscan Research की स्थापना की थी. कंपनी ऐसे मेडिकल डिवाइस बनाती है जो बिना किसी सर्जरी के ब्रेन इंजरी की शुरुआती पहचान करने में मदद करते हैं. इस फंडिंग का इस्तेमाल कारोबार विस्तार, नए रेगुलेटरी अप्रूवल हासिल करने, प्रोडक्ट को बेहतर बनाने में होगा.
MedTech स्टार्टअप Bioscan Research ने सीड फंडिंग राउंड में 10 लाख डॉलर जुटाए हैं. इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Unicorn India Ventures ने किया है. कंपनी इस फंडिंग का इस्तेमाल अपने कारोबार का विस्तार करने, नए रेगुलेटरी अप्रूवल हासिल करने, प्रोडक्ट को बेहतर बनाने और नई इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) विकसित करने में करेगी.
साल 2017 में अनुपम लवानिया और शिल्पा मलिक ने की स्थापना की थी. कंपनी ऐसे मेडिकल डिवाइस बनाती है जो बिना किसी सर्जरी के ब्रेन इंजरी की शुरुआती पहचान करने में मदद करते हैं.
कंपनी का प्रमुख प्रोडक्ट CEREBO है. यह मशीन लर्निंग (ML) और Near Infrared Spectroscopy यानी NIRS टेक्नोलॉजी पर काम करने वाला डिवाइस है. इसका उद्देश्य सिर में होने वाली गंभीर चोट और इंट्राक्रेनियल इंजरी का शुरुआती चरण में पता लगाना है. खास बात यह है कि यह उन मरीजों की भी पहचान करने में मदद कर सकता है जिनमें शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते.
Bioscan Research का कहना है कि दुनिया भर में हर साल 5 करोड़ से अधिक लोग ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी का शिकार होते हैं. इनमें से हल्की ब्रेन इंजरी वाले 50 से 90 प्रतिशत मरीजों की समय पर पहचान नहीं हो पाती. कंपनी का मानना है कि उसकी तकनीक इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती है और मरीजों को सही समय पर इलाज मिलने में मदद करेगी.
कंपनी के को-फाउंडर्स अनुपम लवानिया और शिल्पा मलिक ने कहा कि उनका लक्ष्य ऐसी टेक्नोलॉजी तैयार करना है जो डॉक्टरों को जल्दी और सटीक फैसला लेने में मदद करे. उनका कहना है कि नई फंडिंग से कंपनी अपने प्रोडक्ट को और बेहतर बनाएगी. साथ ही भारत और दूसरे देशों में इमरजेंसी हेल्थकेयर सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में भी काम करेगी.

Bioscan Research के अनुसार पिछले 12 महीनों में कंपनी ने पांच गुना वृद्धि दर्ज की है. कंपनी का दावा है कि उसकी टेक्नोलॉजी गंभीर मेडिकल स्थितियों की पहचान को तेज और आसान बना रही है. इससे डॉक्टरों को जल्दी निर्णय लेने में मदद मिलती है और मरीजों के इलाज के बेहतर परिणाम सामने आते हैं.
Unicorn India Ventures के मैनेजिंग पार्टनर अनिल जोशी ने कहा कि भारत जैसे देशों में हेल्थकेयर सेक्टर में अभी भी कई चुनौतियां हैं. उनका मानना है कि ब्रेन इंजरी और सिर की चोट के मामलों में शुरुआती पहचान बेहद जरूरी है. Bioscan Research ऐसी टेक्नोलॉजी विकसित कर रही है जो बिना किसी सर्जरी के इंट्राक्रेनियल ब्लीडिंग का पता लगाने में मदद कर सकती है. उन्होंने कहा कि कंपनी ने पिछले एक साल में अपनी तकनीक को काफी बेहतर बनाया है और अब उसके पास बड़े बाजार में तेजी से आगे बढ़ने का अच्छा अवसर है.
आने वाले 12 महीनों में Bioscan Research का लक्ष्य अपने कारोबार को तीन गुना बढ़ाना है. कंपनी भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की योजना बना रही है.



