Cashlo: दुकानदारों को एक प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी UPI, बिल पेमेंट और दूसरी डिजिटल सेवाएं
Cashlo छोटे दुकानदारों को डिजिटल, बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़ी सेवाओं का एक्सेस पॉइंट बनाने की राह पर है. अगस्त 2026 में शुरू हुई कंपनी का लक्ष्य 5 लाख मर्चेंट और एजेंट जोड़ना है. YourStory ने हाल ही में Cashlo के को-फाउंडर राशिद अली से कंपनी के बिजनेस मॉडल, चुनौतियां और भविष्य की योजनाओं पर बात की.
भारत में डिजिटल पेमेंट और फिनटेक सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. शहरों में लोग मोबाइल से बिल भरते हैं, पैसे भेजते हैं और बैंकिंग से जुड़े कई दूसरे काम भी कुछ मिनटों में कर लेते हैं. लेकिन देश के छोटे शहरों और कस्बों में डिजिटल सेवाओं तक पहुंच की तस्वीर अभी पूरी तरह एक जैसी नहीं है.
यहां आज भी स्थानीय दुकानदार की भूमिका अहम है. मोहल्ले की दुकान सिर्फ सामान खरीदने की जगह नहीं होती. कई लोगों के लिए दुकानदार भरोसे का व्यक्ति भी होता है. ऐसे में अगर उसी दुकान से कैश निकालने, बिल भरने, मोबाइल रिचार्ज या दूसरी डिजिटल सेवाएं मिल जाएं, तो ग्राहक के लिए काम आसान हो सकता है.
इसी सोच के साथ नोएडा से स्टार्टअप Cashlo की शुरुआत हुई है. कंपनी स्थानीय दुकानदारों को एक ऐसे प्लेटफॉर्म से जोड़ना चाहती है, जहां वे सामान बेचने के साथ डिजिटल, बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़ी सेवाएं भी दे सकें. इसकी शुरुआत अगस्त 2026 में हुई. MJ Digital Services इसकी पैरेंट कंपनी है.
YourStory ने हाल ही में Cashlo के को-फाउंडर राशिद अली से बात की. इस दौरान उन्होंने कंपनी की शुरुआत, छोटे शहरों और कस्बों में डिजिटल बैंकिंग, फाइनेंस से जुड़ी सेवाओं की पहुंच और Cashlo के बिजनेस मॉडल के बारे में विस्तार से बताया.
कैसे हुई शुरुआत
राशिद अली का शुरुआती जीवन बिहार के अररिया जिले में बीता. उन्होंने वहीं स्कूली पढ़ाई की. इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली गए और वहां मास्टर्स की डिग्री पूरी की. उनका परिवार लंबे समय से कारोबार से जुड़ा रहा है. उनके पिता भी फैमिली बिजनेस संभालते थे. इसलिए कारोबार की दुनिया से उनका परिचय बचपन से ही रहा.
राशिद बताते हैं कि परिवार से उन्हें मेहनत और भरोसे की अहमियत समझ आई. लेकिन कारोबार को करीब से देखने पर उन्हें यह भी महसूस हुआ कि छोटे कारोबार लगातार एक जैसे अनुशासन और रोजमर्रा की मेहनत पर चलते हैं. यही अनुभव बाद में उन्हें टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेवाओं की तरफ ले गया.
राशिद कहते हैं, “मैंने कारोबार को बाहर से नहीं देखा था. बचपन से ही घर के कामकाज और ग्राहकों के साथ होने वाली बातचीत को करीब से देखा. इससे मुझे समझ आया कि छोटे कारोबार में भरोसा सबसे जरूरी चीजों में से एक है. बाद में जब मैंने टेक्नोलॉजी और फिनटेक को समझना शुरू किया, तो मेरे मन में यही सवाल आया कि क्या डिजिटल सेवाओं को उन लोगों तक आसान तरीके से पहुंचाया जा सकता है, जो हर काम खुद ऑनलाइन नहीं करना चाहते या जिनके पास हर सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं है.”
इसी सोच ने उन्हें Cashlo की ओर बढ़ाया. लेकिन उन्होंने सीधे ऑन्त्रप्रेन्योरशिप में कदम नहीं रखा. पहले फैमिली बिजनेस संभाला. इस दौरान उन्हें ग्राहकों की आदतों और छोटे कारोबार की दिक्कतों को समझने का मौका मिला.
टेक्नोलॉजी में उनकी दिलचस्पी पहले से थी. खास तौर पर फिनटेक और डिजिटल सेवाओं में. उन्हें लगता था कि नई टेक्नोलॉजी तभी उपयोगी होगी, जब उसका इस्तेमाल आम लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कर सकें.
यहीं से Cashlo का आइडिया आया. कंपनी का फोकस ऐसे स्थानीय दुकानदारों पर है, जो अपने इलाके के लोगों को पहले से जानते हैं. मकसद उन्हें टेक्नोलॉजी से बदलना नहीं, बल्कि उनकी मौजूदा पहुंच और भरोसे के साथ डिजिटल सेवाओं को जोड़ना है.

दुकान से डिजिटल सेंटर तक
Cashlo का मॉडल असिस्टेड डिजिटल सर्विस प्लेटफॉर्म के तौर पर तैयार किया जा रहा है. इसके जरिए स्थानीय दुकानदार एक ही जगह से कई तरह की सेवाएं दे सकेंगे. कंपनी के मुताबिक इसमें कैश विदड्रॉल की मदद, डिजिटल पेमेंट, बिल पेमेंट, मोबाइल और डीटीएच रिचार्ज जैसी सेवाएं शामिल हैं.
इस मॉडल के पीछे एक सीधी व्यावसायिक सोच है. छोटी दुकान पर ग्राहक किसी एक काम के लिए आता है. अगर उसी जगह उसे दूसरी जरूरी सेवा भी मिल जाए, तो दुकान पर उसकी विजिट बढ़ सकती है. दुकानदार को भी सामान बेचने के अलावा कमीशन और सर्विस से कमाई का एक और रास्ता मिल सकता है.
Cashlo का मानना है कि कई छोटे दुकानदारों के लिए समस्या ग्राहक की कमी नहीं है. समस्या यह है कि उनके पास अलग-अलग डिजिटल सेवाओं को संभालने के लिए अलग प्लेटफॉर्म होते हैं. एक काम के लिए एक ऐप या सिस्टम और दूसरे काम के लिए दूसरा सिस्टम. इससे छोटे कारोबारी के लिए काम जटिल हो सकता है.
कंपनी इसी जटिलता को कम करने की कोशिश कर रही है. उसका विचार है कि एक दुकान को स्थानीय डिजिटल एक्सेस पॉइंट बनाया जाए. ग्राहक को सेवा के लिए दूर जाने की जरूरत न पड़े और दुकानदार को भी अपनी मौजूदा दुकान से अतिरिक्त कमाई का अवसर मिले.
राशिद बताते हैं, “छोटे दुकानदारों के सामने सिर्फ पेमेंट लेने की समस्या नहीं है. उन्हें ऐसा प्लेटफॉर्म चाहिए, जहां रोजमर्रा के कई काम एक जगह से संभाले जा सकें. आज एक सेवा के लिए अलग सिस्टम और दूसरी सेवा के लिए अलग प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करना पड़ता है. हमारी कोशिश है कि इस अनुभव को आसान बनाया जाए. दुकानदार को टेक्नोलॉजी समझने में बहुत ज्यादा समय न लगाना पड़े और ग्राहक को भी अपने इलाके में जरूरी डिजिटल सेवाएं मिल सकें.”
Cashlo की कमाई का मॉडल मुख्य रूप से कमीशन, सर्विस चार्ज और पार्टनर एग्रीमेंट पर आधारित होगा. कंपनी किसी एक ट्रांजैक्शन पर निर्भर रहने के बजाय कई तरह की सेवाओं को एक साथ जोड़ना चाहती है. ज्यादा दुकानदार जुड़ने और ज्यादा सेवाओं के इस्तेमाल के साथ ट्रांजैक्शन आधारित कारोबार को बढ़ाने की योजना है.
हालांकि यहां एक अहम बात है. Cashlo अभी अपने शुरुआती चरण में है. इसलिए फिलहाल मर्चेंट की संख्या, एजेंट की संख्या, ट्रांजैक्शन, ट्रांजैक्शन वैल्यू या रेवेन्यू जैसे आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं.
पहले नेटवर्क, फिर रेवेन्यू
Cashlo के लिए मौजूदा दौर ज्यादा से ज्यादा रेवेन्यू दिखाने से ज्यादा नेटवर्क बनाने का है. कंपनी लोकल किराना स्टोर, दुकानदारों और दूसरे मर्चेंट्स के साथ काम करने की तैयारी कर रही है. अगले कुछ महीनों में इन दुकानों के जरिए ज्यादा डिजिटल और वित्तीय सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य है.
कंपनी की योजना अगले एक साल में कम से कम 5 लाख एजेंट और मर्चेंट जोड़ने की है. इसके साथ प्लेटफॉर्म पर और सेवाएं जोड़ने और टियर 2 तथा टियर 3 क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ाने की योजना है. कंपनी ने वित्त वर्ष27 तक 100 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य भी रखा है.
Cashlo को अब तक पूरी तरह बूटस्ट्रैप किया गया है. यानि कंपनी ने किसी बाहरी निवेशक से फंडिंग नहीं जुटाई है. शुरुआती पूंजी प्रमोटर्स के निजी फंड से आई है. इसके अलावा मौजूदा कंपनी MJ Digital Services ने भी लोन के जरिए मदद की है.
कंपनी अभी अपने मॉडल को जमीन पर उतारने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में आने वाले समय में असली चुनौती सिर्फ मर्चेंट जोड़ना नहीं होगी. जरूरी यह होगा कि ये मर्चेंट प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहें और ग्राहक भी लगातार सेवाओं का इस्तेमाल करें.
राशिद कहते हैं, “अभी हमारा ध्यान केवल रेवेन्यू बढ़ाने पर नहीं है. हम पहले ऐसा मर्चेंट नेटवर्क बनाना चाहते हैं जो लंबे समय तक टिक सके. इसके साथ ट्रांजैक्शन और सर्विस इस्तेमाल भी बढ़ना चाहिए. जैसे जैसे ज्यादा दुकानदार जुड़ेंगे और ज्यादा सेवाएं अपनाई जाएंगी, हमारा लक्ष्य बेहतर यूनिट इकनॉमिक्स बनाना है. हमारे लिए सिर्फ टॉप लाइन महत्वपूर्ण नहीं है. हम ऐसा नेटवर्क बनाना चाहते हैं, जिसमें दुकानदार को लगातार इस्तेमाल करने की वजह मिले.”

छोटे शहरों की बड़ी चुनौती
भारत में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन हर ग्राहक का अनुभव एक जैसा नहीं है. किसी के लिए मोबाइल ऐप पर खुद बिल भरना आसान हो सकता है. किसी दूसरे व्यक्ति के लिए वही काम स्थानीय दुकान पर जाकर करना ज्यादा सहज हो सकता है.
Cashlo इसी अंतर को एक अवसर के रूप में देखता है. कंपनी का मानना है कि UPI कैश पॉइंट, बिल पेमेंट, मोबाइल रिचार्ज और दूसरी असिस्टेड सेवाएं छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में डिजिटल सिस्टम और स्थानीय जरूरत के बीच एक पुल का काम कर सकती हैं.
राशिद के मुताबिक, कई लोग डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करना चाहते हैं, लेकिन हर प्रक्रिया खुद नहीं करना चाहते. ऐसे में स्थानीय दुकानदार की मदद उपयोगी हो सकती है. इसके अलावा दुकानदार को भी इन सेवाओं से अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है.
राशिद बताते हैं, “भारत में डिजिटल होने का रास्ता हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं है. कई लोग ऐप के जरिए खुद काम करना पसंद करते हैं, लेकिन बहुत से लोग किसी भरोसेमंद व्यक्ति की मदद चाहते हैं. स्थानीय दुकानदार यहां अहम भूमिका निभा सकता है. अगर उसके पास आसान टूल और सामान्य जरूरतों वाली सेवाएं हों, तो वह ग्राहक को प्रक्रिया समझा सकता है. साथ ही दुकानदार के लिए यह अतिरिक्त कमाई का जरिया भी बन सकता है.”
लेकिन इस मॉडल को जमीन पर उतारना आसान नहीं है. छोटे दुकानदारों को किसी नए सिस्टम पर भरोसा दिलाना एक बड़ी चुनौती है. उन्हें यह समझना जरूरी है कि नई सेवा उनके कारोबार में वास्तव में क्या बदलाव ला सकती है. इसके लिए ट्रेनिंग, स्टाफ की मदद और लगातार सपोर्ट की जरूरत होती है.
दूसरी चुनौती टेक्नोलॉजी से जुड़ी है. एक दुकान पर कई सेवाएं देने का मतलब है कि सिस्टम लगातार काम करता रहे. इसके लिए भरोसेमंद पार्टनर, स्पष्ट नियम, ग्राहक सहायता और रोजाना स्थिर सेवा जरूरी है.
इसके अलावा भारत का बाजार एक जैसा नहीं है. बड़े शहर की दुकान और छोटे कस्बे की दुकान की जरूरत अलग हो सकती है. ग्रामीण इलाके में जरूरतें और भी अलग हो सकती हैं. इसलिए Cashlo के सामने सिर्फ तेजी से विस्तार करने की चुनौती नहीं है. उसे ऐसा मॉडल बनाना होगा जो अलग अलग इलाकों की जरूरत के हिसाब से काम कर सके.
भरोसे को टेक्नोलॉजी से जोड़ने की कोशिश
Cashlo की कहानी का सबसे अहम हिस्सा शायद टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि स्थानीय भरोसा है. कंपनी जिस दुकानदार को अपने मॉडल के केंद्र में रख रही है, वह पहले से अपने इलाके के लोगों से जुड़ा हुआ है.
राशिद की नजर में यही स्थानीय रिश्ता Cashlo की बुनियाद बन सकता है. उनका मानना है कि छोटे दुकानदार को केवल दुकान चलाने वाले व्यक्ति के तौर पर देखने के बजाय स्थानीय उद्यमी के रूप में भी देखा जा सकता है.
अगले तीन से पांच साल में Cashlo अपने मर्चेंट नेटवर्क को बढ़ाने के साथ डिजिटल सेवाओं का दायरा बढ़ाना चाहता है. कंपनी नए पार्टनर जोड़ने, टेक्नोलॉजी बेहतर करने और उन क्षेत्रों में पहुंच बनाने की योजना पर काम करना चाहती है, जहां लास्ट माइल डिजिटल सेवाओं की जरूरत है.
कंपनी की महत्वाकांक्षा सिर्फ एक सेवा या एक ट्रांजैक्शन तक सीमित नहीं है. वह स्थानीय दुकानदारों के आसपास एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने की बात करती है, जिसमें बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़ी सेवाओं, डिजिटल सपोर्ट और कारोबार से जुड़ी दूसरी जरूरतों को जोड़ा जा सके.
राशिद कहते हैं, “हम स्थानीय दुकानदार को सिर्फ सामान बेचने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं देखते. सही टेक्नोलॉजी और सही मार्गदर्शन मिलने पर वही दुकानदार स्थानीय उद्यमी और डिजिटल सेवा केंद्र बन सकता है. उसकी सबसे बड़ी ताकत पहले से मौजूद भरोसा है. हमारी कोशिश उस भरोसे को टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ने की है. अगर इससे दुकान की कमाई बढ़ती है और ग्राहक को ज्यादा सेवाएं अपने आसपास मिलती हैं, तो इसका असर एक दुकान से आगे पूरे स्थानीय कारोबार पर पड़ सकता है.”
भारत के छोटे दुकानदारों के लिए डिजिटल बदलाव का मतलब केवल QR कोड लगाना या पेमेंट लेना नहीं है. जरूरत इससे आगे की है. अगर स्थानीय दुकान कई रोजमर्रा की डिजिटल और वित्तीय सेवाओं का भरोसेमंद केंद्र बनती है, तो इससे ग्राहक और दुकानदार दोनों के अनुभव में बदलाव आ सकता है.
Cashlo इसी संभावना को आजमाने की कोशिश कर रहा है. अभी उसके पास दिखाने के लिए बड़े ट्रांजैक्शन आंकड़े या रेवेन्यू नहीं हैं. उसके पास एक शुरुआती आइडिया, बूटस्ट्रैप्ड मॉडल और विस्तार की महत्वाकांक्षा है.
अब असली परीक्षा उस आइडिया को जमीन पर उतारने की होगी. कितने दुकानदार जुड़ते हैं. कितने ग्राहक सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. और क्या यह मॉडल अलग-अलग शहरों और कस्बों में लगातार काम कर पाता है. आने वाले कुछ साल Cashlo की इस कहानी के अगले अध्याय तय करेंगे.



