टीकाकरण सिर्फ बच्चों और बुजुर्गों के लिए नहीं — वयस्कों के लिए भी ज़रूरी: डॉक्टरों की सलाह
समय पर टीकाकरण करवाना, स्वास्थ्य की रक्षा करने, अस्पताल के खर्च को कम करने और परिवार तथा समाज दोनों के लिए एक मजबूत और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करने का जिम्मेदार कदम है. स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होकर आज उठाया गया निर्णय, आने वाले कल को सुरक्षित बना सकता है.
अक्सर जब टीकाकरण की बात होती है, तो लोग मान लेते हैं कि यह केवल बच्चों या बुजुर्गों के लिए ही ज़रूरी है. इस सोच के कारण वयस्कों के बड़े वर्ग के लिए टीकाकरण की आवश्यकता अनदेखी रह जाती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि वयस्कों में भी कुछ संक्रमण गंभीर रूप ले सकते हैं, जिनमें से एक है पल्मोनोकॉकल बीमारी. यह संक्रमण वयस्कों में अस्पताल में भर्ती और मृत्यु का प्रमुख कारण माना जाता है.
पल्मोनोकॉकल संक्रमण स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया नामक बैक्टीरिया के कारण होता है. यह उन लोगों को अधिक प्रभावित करता है, जिन्हें पहले से मधुमेह, हृदय रोग, सीओपीडी या अस्थमा जैसी पुरानी स्वास्थ्य स्थितियाँ होती हैं. डॉक्टरों का कहना है कि टीकाकरण का निर्णय केवल उम्र देखकर नहीं, बल्कि व्यक्ति के स्वास्थ्य जोखिम और चिकित्सीय स्थिति के आधार पर होना चाहिए.
लाइफस्टाइल बदलने से बढ़ रहे खतरे
आजकल की जीवनशैली भी इस संक्रमण के खतरे को बढ़ा रही है. प्रोसेस्ड और तला-भुना भोजन, लंबे समय तक बैठकर काम करना, देर रात तक जागना और मानसिक तनाव, ये सभी आदतें शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता को कम करती हैं. इसी कारण डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और सीओपीडी जैसी बीमारियाँ अब केवल बुजुर्गों में ही नहीं बल्कि युवाओं में भी बढ़ती नज़र आ रही हैं. इससे कम उम्र के वयस्क भी पल्मोनोकॉकल संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं.
अर्ली स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है
अगर किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, ठंड लगना, खांसी, सांस लेने में तकलीफ या श्वसन संक्रमण जैसे लक्षण महसूस हों, तो समय पर डॉक्टर से जांच करवाना ज़रूरी है. डॉक्टर रक्त, बलगम या यूरिन की जांच करके यह पता लगाते हैं कि संक्रमण स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया बैक्टीरिया के कारण है या नहीं. लक्षणों की समय रहते पहचान गंभीर स्थिति और जटिलताओं से बचने में मदद करती है.
टीकाकरण सभी के लिए – “Be Wise, Immunize”
डॉ. दीपक तलवार, सीनियर कंसल्टेंट, मेट्रो ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल्स का कहना है कि टीकाकरण को केवल बच्चों या बुजुर्गों तक सीमित समझना एक गलत धारणा है. यदि आपकी उम्र 50 वर्ष या उससे अधिक है, या फिर आप किसी भी उम्र में मधुमेह, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, कैंसर या किसी भी प्रकार की पुरानी बीमारी से जूझ रहे हैं, तो आपको टीकाकरण करवाने में देरी नहीं करनी चाहिए. अब समय है कि हम अपने स्वास्थ्य और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें.
टीकाकरण न केवल संक्रमण के जोखिम को कम करता है, बल्कि अस्पताल में भर्ती होने की संभावना घटाता है, इलाज का खर्च बचाता है और दैनिक जीवन की क्षमता को बनाए रखने में मदद करता है. विशेष रूप से पल्मोनोकॉकल वैक्सीन उच्च जोखिम वाले लोगों में बीमारी की गंभीरता और संक्रमण की संभावना को कम करती है. अनेक शोध यह साबित करते हैं कि वैक्सीन लेने वालों में निमोनिया और अन्य न्यूमोकॉकल संक्रमणों से गंभीर जटिलताओं, लंबी अस्पताल में भर्ती या जान को खतरे तक की संभावना काफी कम हो जाती है. इस तरह, टीकाकरण केवल शरीर की रक्षा नहीं करता, बल्कि लंबे समय तक चलने वाली बीमारी और उसके आर्थिक और मानसिक बोझ से भी बचाता है.
संतुलित आहार और नियमित गतिविधि
जीवनशैली में छोटे लेकिन निरंतर बदलाव लंबे समय तक असर दिखाते हैं. अपने भोजन में सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज, दालें, कम वसा वाले प्रोटीन (जैसे मछली और चिकन) और हेल्दी फैट्स शामिल करें. तले हुए और प्रोसेस्ड भोजन से बचें. इसके साथ, रोजाना की दिनचर्या में टहलना, योग या हल्का-फुल्का व्यायाम शामिल करना प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाता है और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम करता है.
स्वच्छता और हाइजीन
साफ-सफाई की आदतें भी संक्रमण की रोकथाम में बड़ी भूमिका निभाती हैं. नियमित हाथ धोना, बार-बार छुई जाने वाली सतहों को साफ रखना और ऐसे लोगों के संपर्क से बचना जिनमें खांसी या सांस संबंधी संक्रमण के लक्षण हों — ये सभी कदम संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद करते हैं. ये आदतें सिर्फ न्यूमोकॉकल संक्रमण ही नहीं, बल्कि कई अन्य बीमारियों से भी सुरक्षा प्रदान करती हैं.
डॉक्टरों का संदेश
आज जब निष्क्रिय जीवनशैली, तनाव और खानपान की आदतों में बदलाव के चलते जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ रही हैं, तो वयस्कों में न्यूमोकॉकल टीकाकरण और भी ज़रूरी हो जाता है. समय पर टीकाकरण करवाना, स्वास्थ्य की रक्षा करने, अस्पताल के खर्च को कम करने और परिवार तथा समाज दोनों के लिए एक मजबूत और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करने का जिम्मेदार कदम है. स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होकर आज उठाया गया निर्णय, आने वाले कल को सुरक्षित बना सकता है.
Edited by रविकांत पारीक


