BonV Aero: ओडिशा का स्टार्टअप बना भारतीय सेना का भरोसेमंद साथी
BonV Aero — भुवनेश्वर स्थित स्टार्टअप, भारत का पहला eVTOL ड्रोन निर्माता है जो सेना, आपदा प्रबंधन और मेडिकल लॉजिस्टिक्स जैसे मिशन-केंद्रित कार्यों के लिए 100% इलेक्ट्रिक, हाई-पे लोड ड्रोन बनाता है. यह भारत को ड्रोन टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बना रहा है.
हाइलाइट्स
भारत की उड़ान को नए पंख दे रहा है स्टार्टअप BonV Aero
BonV Aero बना सेना और आपदा राहत का टेक्नोलॉजिकल साथी
GPS के बिना उड़ने वाले ड्रोन, भारत बन रहा आत्मनिर्भर
International Book Of Records में दर्ज है BonV Aero का नाम
100% इलेक्ट्रिक, 0% प्रदूषण: कार्बन फ्री लॉजिस्टिक्स सप्लाई
एक समय था जब भारत की ड्रोन और एविएशन टेक्नोलॉजी पूरी तरह से विदेशी कंपनियों पर निर्भर थी. लेकिन आज, ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से निकला एक स्टार्टअप न केवल इस धारणा को बदल रहा है, बल्कि दुनिया के सबसे दुर्गम इलाकों में उड़ान भरकर भारत को सैन्य, आपदा प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स में आत्मनिर्भर बना रहा है. यह स्टार्टअप आज भारतीय सेना के साथ मिलकर दुर्गम इलाकों में सप्लाई पहुंचा रहा है. यह भारत का पहला ऐसा eVTOL (Electric Vertical Take-Off and Landing) ड्रोन स्टार्टअप है जो विशेष रूप से लॉजिस्टिक्स, मेडिकल इमरजेंसी और डिफेंस ऑपरेशंस के लिए भारी-भरकम ड्रोन बनाता है.
साल 2021 में शुरू हुआ यह स्टार्टअप देश की तकनीकी क्षमताओं को सिर्फ 'शोकेस' (दिखावा) करने के लिए नहीं, बल्कि मिशन-केंद्रित समस्याओं को हल करने के लिए बना है. भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में जहां कई इलाके अभी भी सड़कों और बुनियादी ढांचे से कटे हुए हैं—वहीं BonV Aero के बनाए इलेक्ट्रिक VTOL ड्रोन आज सेना, राहत कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लाइफ लाइन बनते जा रहे हैं.
भारत में जब ज्यादातर स्टार्टअप डिजिटल या सॉफ्टवेयर डोमेन में सुरक्षित राहें तलाश रहे थे, तब BonV Aero के फाउंडर छह युवा इंजीनियरों ने एक गंभीर और साहसिक रास्ता चुना — ‘हवा में मालवाहन’ को वास्तविकता बनाना. और वह भी न केवल शहरी इलाकों के लिए, बल्कि लद्दाख की बर्फीली चोटियों, गिरनार के तीर्थ मार्गों, और आपदा से ग्रस्त गांवों के लिए.
आज BonV Aero न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया में भी अपनी पहचान बना रहा है — एक ऐसा स्टार्टअप जो दिखाता है कि डीप-टेक (Deep-Tech) में भी भारत अगली उड़ान भरने को तैयार है. BonV Aero की यह उड़ान सिर्फ टेक्नोलॉजी की नहीं, बल्कि मिशन-केंद्रित सोच और स्वदेशी नवाचार की भी है.
कैसे हुई शुरुआत?
BonV Aero की नींव रखने वाले छह युवा — सत्यब्रत सतपथी (CEO), अविनाश साहू (CTO), उमंग राठी (COO), सुल्तान आलम खान, गौरव अच्छा और राहुल कुमार — सभी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं. शुरुआत में इनका सपना था भारत के लिए एयर एम्बुलेंस बनाना, ताकि उन इलाकों में भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें जहां सड़कें नहीं जातीं.
लेकिन जल्द ही इन्हें यह समझ आया कि सबसे पहले वास्तविक जरूरत उन जगहों पर भारी सामान पहुंचाने की है जहां पर न तो हेलिकॉप्टर आसानी से पहुंच सकते हैं और न ही कोई दूसरा वाहन. यहीं से BonV Aero ने एक नया मोड़ लिया.

(बाएं से दाएं) — अविनाश साहू (CTO), सत्यब्रत सतपथी (CEO), उमंग राठी, सुल्तान खान, गौरव अच्छा और राहुल कुमार — BonV Aero के को-फाउंडर
BonV Aero की खासियतें
YourStory से बात करते हुए BonV Aero के को-फाउंडर और सीईओ सत्यब्रत सतपथी बताते हैं, “कंपनी की सबसे बड़ी ताकत है इसकी इंडिजिनस (स्वदेशी) डीप-टेक टेक्नोलॉजी. जहां दुनिया की दूसरी eVTOL कंपनियां शहरी यातायात या पैसेंजर ट्रांसपोर्ट पर ध्यान देती हैं, वहीं BonV Aero हाई-एल्टीट्यूड (ज्यादा ऊंचाई तक उड़ने वाला), हाई-पे लोड (भारी सामान ले जाने में सक्षम) मिशनों पर काम कर रहा है.”
ये हैं BonV Aero की खासियतें:
- 19,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरने और 50 किलो तक का वजन ले जाने में सक्षम.
- पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक – फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, नेविगेशन, टेलीमेट्री, एयरफ्रेम तक.
- -20°C से +55°C तक काम करने की क्षमता.
- GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) नहीं होने पर भी उड़ने वाला सिस्टम.
- मॉड्यूलर डिजाइन – एक ही ड्रोन का उपयोग लॉजिस्टिक्स, मेडिकल, AI-बेस्ड मैपिंग में किया जा सकता है.
- अब तक 4000 घंटे से ज्यादा की उड़ानें पूरी कर चुका है.
BonV Aero का नाम International Book Of Records में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है. कंपनी ने 10 अगस्त 2024 को यह वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. BonV Aero ने अपने मल्टीरोटर ड्रोन की मदद से 30 किलो वजन को दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सड़क उमलिंग ला (Umling LA) (19,000 फीट) तक पहुंचाया. यह ड्रोन द्वारा सबसे भारी वजन को इतनी ऊंचाई तक ले जाने का अनोखा रिकॉर्ड है.
बिजनेस मॉडल और फंडिंग
BonV Aero एक OEM (Original Equipment Manufacturer) कंपनी है जो अपने ड्रोन को डिज़ाइन करने से लेकर उत्पादन तक सब कुछ खुद करती है. कंपनी के पास फिलहाल 20 किलो, 30 किलो और 50 किलो के पेलोड वाले ड्रोन हैं. आने वाले समय में ये 100 किलो और 500 किलो के भी मॉडल तैयार करेंगे.
ड्रोन बेचने के साथ-साथ कंपनी अपने क्लाइंट्स को मेंटेनेंस सर्विस, ट्रेनिंग, और फ्लाइट-प्लानिंग सॉफ्टवेयर भी देती है. यही नहीं, BonV Aero भारत सरकार और PSUs (Public Sector Undertakings) के साथ कस्टमाइज्ड सॉल्यूशन्स पर भी काम करता है.
Tracxn के मुताबिक, BonV Aero ने अब तक कुल $3.9 मिलियन की फंडिंग 5 राउंड्स में जुटाई है. इसकी पहली फंडिंग 25 मार्च 2022 को हुई थी. वहीं, इसका सबसे हालिया फंडिंग राउंड 30 जनवरी 2025 को एक सीड राउंड के रूप में हुआ, जिसमें कंपनी ने $1.15 मिलियन जुटाए.
अगर निवेशकों की बात करें तो , , और Beacon Trusteeship जैसी नामचीन वेंचर कैपिटल (VC) फर्मों समेत कई प्रमुख ऐंजल निवेशकों ने इस स्टार्टअप में निवेश किया है.

बाजार और उपयोग: लद्दाख से लेकर बाढ़ग्रस्त इलाकों तक
स्टार्टअप के बनाए गए ड्रोन केवल रक्षा क्षेत्र (डिफेंस सेक्टर) तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका इस्तेमाल कई तरह के मिशनों और क्षेत्रों में हो रहा है. सियाचिन और लद्दाख जैसे दुर्गम इलाकों में यह ड्रोन आवश्यक सामान पहुंचाने का काम कर रहे हैं. अग्रिम पोस्ट्स पर राशन, गोलाबारूद और मेडिकल किट्स की आपूर्ति के अलावा ये ड्रोन जामर और कम्युनिकेशन डिवाइसेस भी तैनात करने में सक्षम हैं. खास बात यह है कि ये ड्रोन उन इलाकों में भी ऑपरेशन कर सकते हैं, जहां GPS काम नहीं करता है.
आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में भी BonV Aero के ड्रोन अहम भूमिका निभा रहे हैं. बाढ़, भूकंप या भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ये राहत सामग्री पहुंचाने में सक्षम हैं. जंगल की आग को नियंत्रित करने में भी ये मददगार साबित हो सकते हैं. मेडिकल इमरजेंसी के दौरान ‘गोल्डन आवर’ के भीतर जरूरी मदद पहुंचाना इनकी एक बड़ी खासियत है.
पुलिस और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज़ से भी ये ड्रोन काफी उपयोगी हैं. इन्हें भीड़ नियंत्रण, हाई-रिस्क इलाकों में सरप्राइज विजुअल मॉनिटरिंग और इमरजेंसी मेडिकल किट या डिफिब्रिलेटर जैसी आवश्यक चीजें पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
इसके अलावा, ग्रामीण और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स में भी ये ड्रोन उपयोगी साबित हो रहे हैं. गिरनार हिल्स जैसे तीर्थ स्थलों पर सामान और कचरा ढोने के अलावा, जंगलों, नदी किनारे या खनन क्षेत्रों में जरूरी सामान पहुंचाने का काम भी ये कर सकते हैं.
भविष्य की बात करें तो BonV Aero अपने eVTOL ड्रोन के माध्यम से मिड-माइल कार्गो डिलीवरी, अंगों के परिवहन (ऑर्गन ट्रांसपोर्ट), कोल्ड-चेन फार्मा और कृषि या ग्रामीण हेल्थकेयर सेक्टर में अंतिम छोर तक सप्लाई जैसे सिविल उपयोगों की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है.
इको-फ्रेंडली उड़ान: न प्रदूषण, न ईंधन खर्च
सबसे खास बात यह है कि कंपनी के सभी ड्रोन 100% इलेक्ट्रिक हैं, यानी उड़ान के दौरान कोई कार्बन उत्सर्जन नहीं होता. ये ड्रोन ऐसे इलाकों में काम करते हैं जहां आमतौर पर डीजल ट्रक, हेलिकॉप्टर या इंसान सामान पहुंचाते हैं.
एक आंकड़े के अनुसार, 100 किलो सामान को 10 किलोमीटर तक पहुंचाने में BonV ड्रोन 0 किलो CO₂ छोड़ता है, जबकि एक हेलिकॉप्टर 200 किलो तक CO₂ उत्सर्जित करता है.
BonV Aero अब सोलर चार्जिंग, हाइड्रोजन ईंधन, और बैटरी रिसाइक्लिंग जैसे इनोवेशन पर भी काम कर रहा है.

BonV Aero की प्रोडक्ट रेंज
मार्केट स्ट्रैटेजी और रेवेन्यू
स्टार्टअप अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए खास रणनीति पर काम कर रहा है – सबसे पहले डिफेंस और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के बड़े क्लाइंट्स के साथ पायलट प्रोजेक्ट्स और लाइव फ्लाइट्स.
वित्तीय वर्ष (FY) 2023-24 में कंपनी ने ₹4.5 करोड़ का टर्नओवर किया. अगले साल, 2024-25 में यह बढ़कर ₹7 करोड़ हो गया. आने वाले साल यानी 2025-26 में कंपनी का लक्ष्य ₹40 करोड़ के आंकड़े को पार करना है.
चुनौतियां
भारत की विविध भौगोलिक स्थितियां – कभी बर्फीले पहाड़, कभी उमस भरी तटीय हवा – BonV Aero के लिए एक चुनौती भी हैं और अवसर भी. कंपनी इस समय हाई-एनर्जी बैटरियों, हाइड्रोजन हाइब्रिड सिस्टम, और AI-बेस्ड नेविगेशन पर काम कर रही है.
रेगुलेटरी स्तर पर भी DGCA (Directorate General of Civil Aviation) और रक्षा मंत्रालय की अनुमति, BVLOS (Beyond Visual Line of Sight) फ्लाइट्स के लिए एयरवर्दिनेस टेस्टिंग जैसे कई पेचीदे चरण हैं. इसके साथ-साथ लोकल सप्लाई चेन की गुणवत्ता को सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती है.

भविष्य की योजनाएं
BonV Aero का विज़न सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. आने वाले 5 वर्षों में कंपनी 15 किलो से लेकर 500 किलो तक के ड्रोन लॉन्च करेगी. इसके अलावा कंपनी अपने खुद के मिशन मैनेजमेंट SaaS (Software-as-a-Service) सॉफ्टवेयर को डेवलप करेगी और पूरी तरह से AI-बेस्ड ऑटोनोमस उड़ान को संभव बनाएगी.
स्टार्टअप का मकसद भारत को एविएशन सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाना और विश्व स्तर पर मिशन-क्रिटिकल VTOL सेगमेंट में अग्रणी भूमिका निभाना है.
BonV Aero के को-फाउंडर और CTO (चीफ़ टेक्नोलॉजी ऑफिसर) अविनाश साहू कहते हैं, “भारत में हार्डवेयर बनाना मुश्किल है, अगर आप सिलिकॉन वैली का मॉडल कॉपी करते हैं. किसी एक मिशन-क्रिटिकल ग्राहक से शुरुआत करें, वाजिब कीमत वाले प्रोडक्ट बनाएं, और प्रोटोटाइप को पावरपॉइंट में नहीं, फील्ड में टेस्ट करें.”
BonV Aero का सफर दिखाता है कि अगर जज्बा हो, तो भारत में डीप-टेक के सपने भी सच हो सकते हैं – और वो भी दुनिया के सबसे कठिन इलाकों में उड़ान भरते हुए.



