पार्किंग स्टार्टअप ParkoBot को मिली 2.09 करोड़ की सीड फंडिंग
ParkoBot ने 2.09 करोड़ रु की सीड फंडिंग जुटाई है. इस राउंड का नेतृत्व IPV ने किया. यह दुनिया का पहला IoT-बेस्ड ‘Airbnb फॉर पार्किंग’ है जो प्राइवेट पार्किंग स्पेस को किराए पर देने की सुविधा देता है. इस फंडिंग से कंपनी नए बाजारों में विस्तार करेगी.
भारत के पहले IoT-बेस्ड ‘Airbnb फॉर पार्किंग’ स्टार्टअप ParkoBot ने 2.09 करोड़ रुपये की सीड फंडिंग हासिल की है. इस राउंड का नेतृत्व Inflection Point Ventures (IPV) ने किया.
ParkoBot एक अनोखा स्टार्टअप है जो प्राइवेट पार्किंग स्पेस को किराए पर देने के लिए IoT (Internet of Things) तकनीक का इस्तेमाल करता है. यह प्लेटफॉर्म लोगों को उनके खाली पड़ी निजी पार्किंग जगहों को दूसरों को घंटों के हिसाब से किराए पर देने की सुविधा देता है. इसके लिए ParkoBot ने एक खास स्मार्ट मोबाइल ऐप और IoT-बेस्ड बूम बैरियर सिस्टम तैयार किया है.
इस फंडिंग से कंपनी अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी, नए बाजारों में कदम रखेगी, बैकएंड ऑपरेशंस को बेहतर बनाएगी और अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को भी बढ़ाएगी.
कोलकाता स्थित ParkoBot की स्थापना अमृत चौधरी, राज कुमार बिहानी और अनिमेष मुखर्जी ने की थी. स्टार्टअप का उद्देश्य है – भारत की सड़कों पर भीड़ को कम करना और प्राइवेट पार्किंग स्पेस का सही इस्तेमाल करना. स्टार्टअप अपने स्मार्ट पार्किंग मैनेजमेंट सिस्टम (PMS) से बुकिंग्स को पहले से तय करने की सुविधा देता है और मैनुअल हस्तक्षेप को कम करता है.
ParkoBot के को-फाउंडर और सीईओ अमृत चौधरी का कहना है, “हमारा लक्ष्य है – भारत की सड़कों से जाम हटाना और खाली पड़ी निजी पार्किंग को कमाई का साधन बनाना.”
स्टार्टअप फिलहाल हर महीने 20,000 से ज्यादा बुकिंग मैनेज कर रहा है. इसका टेक प्लेटफॉर्म पूरी तरह इन-हाउस है और इसमें स्मार्ट ऑटोमेशन की सुविधाएं शामिल हैं, जिससे पार्किंग को सुचारू और लाभदायक बनाया जा रहा है.
IPV के को-फाउंडर मितेश शाह ने कहा, “शहरों में पार्किंग एक बड़ी समस्या है. ParkoBot टेक्नोलॉजी और स्मार्ट सॉल्यूशंस के ज़रिए इस परेशानी को हल करने में अहम भूमिका निभा रहा है.”
स्टार्टअप का वैश्विक TAM (Total Addressable Market) करीब 114 अरब (बिलियन) डॉलर है, जबकि भारत में यह 9.5 बिलियन डॉलर है. यह मार्केट सालाना 6.5% की दर से बढ़ रहा है. ParkoBot की खास बात यह है कि इसका कोई डायरेक्ट ग्लोबल कॉम्पिटिटर नहीं है, जो इस मॉडल पर IoT की मदद से प्राइवेट पार्किंग को मॉनेटाइज करता हो.



