राजस्थान बजट 2025-26: पहले ‘ग्रीन बजट’ की खास बातें, क्या है विशेषज्ञों की राय
राजस्थान का ‘ग्रीन बजट’ 2025-26 सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह बजट राज्य की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन, और पर्यावरणीय स्थिरता को संतुलित करने का प्रयास करता है.
राजस्थान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपना पहला ‘ग्रीन बजट’ पेश किया है, जो सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह बजट राज्य की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन, और पर्यावरणीय स्थिरता को संतुलित करने का प्रयास करता है.
बजट की मुख्य विशेषताएं
ग्रीन बजट का प्रावधान: राज्य सरकार ने कुल बजट का 11.34% यानी ₹27,854 करोड़ ‘ग्रीन बजट’ के लिए आवंटित किया है, जो सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को 2030 तक प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है.
नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा: सभी सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग (PHED) के पंपिंग स्टेशनों को सौर ऊर्जा से संचालित करने की योजना है. इसके अलावा, ‘सोलर दीदी’ कार्यक्रम के तहत 25,000 महिलाओं को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा.
जल संरक्षण और सिंचाई: 4,700 गांवों में जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के लिए ₹2,700 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे जल संसाधनों का संरक्षण और कृषि क्षेत्र को लाभ मिलेगा.
पर्यावरणीय संरक्षण: 10 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है, साथ ही ‘ग्रीन अरावली विकास परियोजना’ के लिए ₹250 करोड़ का आवंटन किया गया है, जिससे जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण होगा.
कचरा प्रबंधन और सर्कुलर अर्थव्यवस्था: प्रत्येक पंचायत में प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के लिए बर्तन बैंक स्थापित किए जाएंगे, और सभी जिला मुख्यालयों में 'वेस्ट टू वेल्थ पार्क' बनाए जाएंगे, जिससे कचरे का पुनर्चक्रण और प्रबंधन प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा.
रोजगार और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर प्रभाव
रोजगार सृजन: सरकार ने 1.25 लाख सरकारी नौकरियों और 1.5 लाख निजी क्षेत्र की नौकरियों के सृजन का लक्ष्य रखा है, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट: 9,600 किमी नई सड़कों का निर्माण और 13,000 किमी मौजूदा सड़कों का उन्नयन किया जाएगा. साथ ही, जयपुर मेट्रो के विस्तार के लिए ₹12,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे यातायात व्यवस्था में सुधार होगा.
विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान का यह ग्रीन बजट अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है. Council on Energy, Environment and Water (CEEW) के अनुसार, “राजस्थान का यह कदम सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो अन्य राज्यों को भी प्रेरित करेगा.”
एल्प कंसल्टिंग लिमिटेड की एक लिंक्डइन पोस्ट के अनुसार, “देश की महत्वाकांक्षा के अनुरूप, राजस्थान ने बड़े पैमाने पर सस्टेनेबिलिटी को अपनाया है और पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देने और पर्यावरण को संरक्षित करने के मामले में लगातार आगे बढ़ रहा है. भारत सरकार ने 2030 तक 450 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है. राज्य ग्रिड में उच्च अक्षय ऊर्जा का प्रबंधन करने के लिए ऊर्जा भंडारण पर ध्यान केंद्रित करता है. जलवायु परिवर्तन एक ज्वलंत वैश्विक चुनौती बन गया है, राजस्थान इस बात का प्रतीक है कि कैसे शुष्क और संसाधनों की कमी वाले क्षेत्र स्थायी समाधान अपनाकर फल-फूल सकते हैं.”
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, “सीएम भजनलाल शर्मा ने राज्य के विधायकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने का फैसला किया है. इस रणनीति के तहत, पांच विधायकों के समूह बनाए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक समूह से एक मंत्री जुड़ा होगा. ये समूह विभागीय कार्यों में तेजी लाने और जनता की शिकायतों का तुरंत समाधान सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे.”
विशेषज्ञों का कहना है कि बजट निष्पादन की इतनी बड़े पैमाने पर निगरानी राजस्थान में पहले कभी नहीं देखी गई. सीएमओ सीधे जिला कलेक्टरों से कार्यान्वयन योजनाएं मांग रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्य तीव्र गति से आगे बढ़े.
हालांकि, कुछ उद्योग विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है कि भूमि पंजीकरण कानूनों में हालिया बदलाव से नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की लागत में वृद्धि हो सकती है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, “नए नियमों के तहत, कंपनियों को भूमि बिक्री या पट्टे के लिए समझौतों को पंजीकृत करने पर स्टांप शुल्क का भुगतान करना होगा, जिससे परियोजना की लागत में 8-10% की वृद्धि हो सकती है.”
निष्कर्ष
राजस्थान का ग्रीन बजट 2025-26 सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह बजट राज्य की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन, और पर्यावरणीय स्थिरता को संतुलित करने का प्रयास करता है. हालांकि, इसके सफल कार्यान्वयन के लिए वित्त पोषण, नीतिगत समन्वय, और जनभागीदारी जैसी चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक होगा.


