AI स्टार्टअप Ringg AI को मिली 15 मिलियन डॉलर की फंडिंग
Ringg AI की स्थापना 2023 में सिद्धार्थ त्रिपाठी, काली चरण वेमुरु और उत्कर्ष शुक्ला ने की थी. कंपनी का हेडक्वार्टर बेंगलुरु में है. नई फंडिंग के बाद Ringg AI अब अपने AI एजेंट्स और एंटरप्राइज बिजनेस को भारत के साथ दूसरे इंटरनेशनल मार्केट्स में भी तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रही है.
बेंगलुरु स्थित Ringg AI ने अपने Series A फंडिंग राउंड के विस्तार के तहत 15 मिलियन डॉलर जुटाए हैं. इस राउंड की अगुवाई Peak XV Partners ने की. Arkam Ventures और Capital 2b ने भी इसमें हिस्सा लिया.
Ringg AI की स्थापना 2023 में सिद्धार्थ त्रिपाठी, काली चरण वेमुरु और उत्कर्ष शुक्ला ने की थी. कंपनी ऐसे AI एजेंट बनी रही है, जो कंपनियों के लिए ग्राहकों से बातचीत करने के साथ उसके बाद होने वाले बिजनेस से जुड़े काम भी खुद कर सकते हैं.
आज कई कंपनियां AI का इस्तेमाल कस्टमर सपोर्ट, सेल्स और दूसरे कामों में कर रही हैं. लेकिन अब चुनौती सिर्फ AI असिस्टेंट तैयार करने की नहीं है. कंपनियां ऐसे AI सिस्टम चाहती हैं, जो ग्राहक से बातचीत समझने के बाद उससे जुड़े पूरे वर्कफ्लो को भी पूरा कर सकें.
Ringg AI इसी समस्या को हल करने पर काम कर रही है. कंपनी का प्लेटफॉर्म वॉइस, वॉट्सऐप और ब्राउजर एजेंट्स को एक साथ जोड़ता है.
मसलन, किसी ग्राहक से बातचीत वॉइस एजेंट के जरिए शुरू हो सकती है. इसके बाद वही बातचीत वॉट्सऐप पर जारी रह सकती है. जरूरत पड़ने पर ब्राउजर एजेंट किसी CRM (Customer Relationship Management) या दूसरे एंटरप्राइज सिस्टम में जाकर जरूरी काम भी पूरा कर सकता है.
इस पूरी प्रक्रिया में ग्राहक की जानकारी और बातचीत का संदर्भ अलग अलग एजेंट्स के बीच बना रहता है. अगर किसी समय इंसान को बातचीत संभालनी पड़े, तो उसे पिछली बातचीत, ग्राहक की जानकारी और अब तक किए गए काम का पूरा संदर्भ मिल जाता है.
Ringg AI इसके लिए एक कॉन्टेक्स्ट ग्राफ तैयार करती है. इसमें ग्राहकों, बातचीत, बिजनेस नियमों, वर्कफ्लो और अलग-अलग एंटरप्राइज सिस्टम से जुड़ी जानकारी होती है. यही जानकारी कंपनी के AI एजेंट्स के लिए साझा मेमोरी की तरह काम करती है.
कंपनी के एजेंट लीड क्वालिफिकेशन, कस्टमर ऑनबोर्डिंग, कस्टमर सपोर्ट, कलेक्शंस और रिन्यूअल जैसे कामों को ऑटोमेट कर सकते हैं.

Ringg AI की टीम
नई फंडिंग का इस्तेमाल Ringg AI अपने AI प्लेटफॉर्म को मजबूत करने में करेगी. कंपनी वॉइस, वॉट्सऐप और ब्राउजर एजेंट्स को आगे विकसित करेगी. इसके अलावा अपने प्रोप्राइटरी AI मॉडल्स और कॉन्टेक्स्ट ग्राफ में भी निवेश बढ़ाएगी.
कंपनी भारत के साथ इंटरनेशनल मार्केट्स में अपने एंटरप्राइज बिजनेस को तेजी से बढ़ाना चाहती है.
Ringg AI का कहना है कि AI एजेंट को किसी कंपनी में लागू करना सिर्फ एक बार का काम नहीं है. कंपनी अपने प्लेटफॉर्म में ऐसे इवैल्यूएशन टूल्स भी देती है, जो बातचीत की क्वालिटी, पॉलिसी का पालन, वर्कफ्लो पूरा होने और बिजनेस नतीजों को मापते हैं.
इससे कंपनियां एजेंट के परफॉर्मेंस पर नजर रख सकती हैं. जरूरत पड़ने पर इंसान बातचीत या वर्कफ्लो को अपने हाथ में ले सकता है. इसके बाद मिले अनुभव का इस्तेमाल AI एजेंट को लगातार बेहतर बनाने में किया जाता है.
Ringg AI के फाउंडर और CEO सिद्धार्थ त्रिपाठी ने कहा कि कंपनियां सिर्फ इसलिए Ringg नहीं खरीदतीं क्योंकि उसका AI डेमो अच्छा लगता है. असली वजह यह है कि इससे ऑनबोर्डिंग बेहतर होता है, रिजॉल्यूशन टाइम कम होता है या क्वालिफाइड लीड्स अपने आप CRM में पहुंचने लगती हैं.
उन्होंने कहा कि कंपनियों को वॉइस लेयर खरीदकर उसके ऊपर बाकी सिस्टम अलग से जोड़ने की जरूरत नहीं होनी चाहिए. Ringg AI बातचीत से लेकर एक्शन, इवैल्यूएशन और इम्प्रूवमेंट तक पूरी प्रक्रिया को एक साथ संभालना चाहती है.
Ringg AI के एजेंट्स पहले से कई बड़ी कंपनियों में प्रोडक्शन में इस्तेमाल हो रहे हैं. इनमें Policybazaar, CRED, Flipkart, Groww, Practo, Tabby, SuperNova और GoodScore शामिल हैं.
Ringg AI ने ऐसे एंटरप्राइज यूज केस पर ध्यान दिया है, जहां AI एजेंट के लिए चुनौतियां ज्यादा होती हैं. इनमें शोर वाली फोन कॉल्स, बातचीत के बीच भाषा बदलना, वॉट्सऐप पर एसिंक्रोनस बातचीत और कई एंटरप्राइज एप्लिकेशंस के बीच ब्राउजर वर्कफ्लो शामिल हैं.
Ringg AI के को-फाउंडर और CTO काली चरण वेमुरु ने कहा कि कंपनी ने शुरुआत में समस्या के सबसे मुश्किल हिस्से को हल करने पर ध्यान दिया है. उनका कहना है कि अगर कोई AI एजेंट शोर वाली कॉल संभाल सकता है, बातचीत के दौरान भाषा बदलने को समझ सकता है और फिर भी वास्तविक वर्कफ्लो पूरा कर सकता है, तो उसे कई दूसरे कामों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
कंपनी भारत में अपनी AI टेक्नोलॉजी तैयार कर रही है और इसे ग्लोबल मार्केट के लिए विकसित कर रही है.
Ringg AI अपने AI स्टैक का एक बड़ा हिस्सा खुद तैयार करने पर भी काम कर रही है. इसमें Parrot नाम का प्रोप्राइटरी ‘स्पीच टू टेक्स्ट’ मॉडल शामिल है. कंपनी आगे छोटे लैंग्वेज मॉडल्स पर भी काम कर रही है.
इससे एंटरप्राइज कंपनियों को लागत, कंप्लायंस और डेटा रेजिडेंसी पर ज्यादा नियंत्रण मिलने की उम्मीद है. Ringg AI भारत, जीसीसी, अमेरिका और यूरोप में इन रीजन डिप्लॉयमेंट के साथ ऑन प्रिमाइसेस डिप्लॉयमेंट की सुविधा भी देती है.



